chaitra navratri 6th day 24 march 2026 maa katyayani puja vidhi bhog katha and mantras to get her blessings Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के छठे दिन ऐसे करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें सही विधि, कथा और मंत्र, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के छठे दिन ऐसे करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें सही विधि, कथा और मंत्र

चैत्र नवरात्रि 2026 में छठा दिन 24 मार्च 2026 को यानी आज है। नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि।

Tue, 24 March 2026 07:34 AMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के छठे दिन ऐसे करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें सही विधि, कथा और मंत्र

नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। यह दिन साहस, विजय और शक्ति प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। मां कात्यायनी की उपासना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति में सफलता मिलती है तथा सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति भी होती है। चैत्र नवरात्रि 2026 में छठा दिन 24 मार्च 2026 को यानी आज है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि, मंत्र, भोग, कथा और महत्व।

मां कात्यायनी का स्वरूप

मां कात्यायनी का वर्ण सुनहरा (स्वर्णिम) है। माता की चार भुजाएं हैं और वे रत्नों से सुशोभित रहती हैं। वे शेर (सिंह) पर सवार होती हैं। उनके दाहिने ऊपरी हाथ में अभय मुद्रा है, जो भक्तों को आशीर्वाद देती है। नीचे वाला दाहिना हाथ वर मुद्रा में है। बाएं ऊपरी हाथ में चंद्रहास नामक तलवार है, जबकि नीचे वाले बाएं हाथ में कमल का फूल है। यह स्वरूप साहस, शक्ति और विजय का प्रतीक है।

मां कात्यायनी पूजा विधि

नवरात्रि के छठे दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। कलश की पूजा करें और मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

मां को लाल वस्त्र अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं। रोली, चंदन, अक्षत और फूल चढ़ाएं। भोग लगाने के बाद कपूर जलाएं और मां कात्यायनी की आरती करें। पूजा के दौरान मंत्र जाप अवश्य करें। पूजा के अंत में आरती और प्रार्थना के साथ समापन करें। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त फलाहार करें।

मां कात्यायनी के प्रमुख मंत्र

  • मूल मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
  • प्रार्थना मंत्र: चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
  • स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • बीज मंत्र: क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः॥

इन मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें। इससे मां कात्यायनी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मां कात्यायनी का भोग

मां कात्यायनी को पीले रंग की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। विशेष रूप से बेसन का हलवा, पीली बर्फी, केसर वाली मिठाई या पीले फल अर्पित करें। भोग लगाते समय मंत्र जाप करते रहें। ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

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मां कात्यायनी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन नि:संतान थे। उन्होंने पुत्री प्राप्ति के लिए देवी भगवती की कठोर तपस्या की। देवी प्रसन्न हुईं और वर दिया कि वे महर्षि कात्यायन के घर पुत्री रूप में जन्म लेंगी।

इसी बीच महिषासुर नामक असुर ने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से प्रार्थना की। तीनों देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ। देवताओं ने उनका नाम कात्यायनी रखा, क्योंकि वे सबसे पहले महर्षि कात्यायन के घर जन्मी थीं।

मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया और देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। इसलिए उन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।

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मां कात्यायनी पूजा का महत्व

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा से साहस, विजय और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। अविवाहितों को सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। विवाहितों के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है। इस दिन की पूजा से पितृ दोष, कालसर्प दोष और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।

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मां कात्यायनी की पूजा श्रद्धा और निष्ठा से करें। उनकी कृपा से जीवन में हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होगी।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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