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Bhai Dooj Vrat Katha : भाई दूज के मौके पर जरूर पढ़ें यमराज और यमुना की ये कथा

भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक है। यह पर्व हर साल कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक करती हैं, उन्हें मिठाई खिलाती हैं और उनके लंबे जीवन, खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

Thu, 23 Oct 2025 06:45 AMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Bhai Dooj Vrat Katha : भाई दूज के मौके पर जरूर पढ़ें यमराज और यमुना की ये कथा

Bhai Dooj Vrat Katha : भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक है। यह पर्व हर साल कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक करती हैं, उन्हें मिठाई खिलाती हैं और उनके लंबे जीवन, खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई अपनी सामर्थ्य और स्नेह के अनुसार बहनों को आशीर्वाद और उपहार देते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि परिवार में भावनात्मक जुड़ाव और भाई-बहन के मजबूत बंधन का प्रतीक है। इस साल भाई दूज 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर यह बहुत शुभ है कि आप भाई दूज की व्रत कथा को पढ़ें या सुनें।

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Bhai Dooj Vrat Katha, भाई दूज व्रत कथा-

भगवान सूर्य नारायण की पत्नी छाया हैं। छाया और सूर्य के पुत्र यमराज और पुत्री यमुना हैं। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत प्रेम करती थीं और हमेशा उन्हें अपने घर खाने के लिए बुलाती थीं। यमराज, जो संसार में प्राण लेने वाले और न्याय के अधिकारी थे, अपने काम में व्यस्त रहते थे। कभी-कभी वह बहन की बातों को टाल देते थे।

एक बार यमुना ने पूरे प्रेम और विनम्रता के साथ अपने भाई यमराज को विशेष रूप से भोजन पर आमंत्रित किया। यमराज ने सोचा, “मैं तो प्राणों को लेने वाला हूं, मुझे कोई भी अपने घर बुलाएगा, यह सोच कर डर सकता है। लेकिन बहन इतनी स्नेह और आदर से मुझे बुला रही है, मैं उसका सम्मान करूंगा।”

यमुना ने अपने घर को पूरी तरह सजाया। उन्होंने साफ-सुथरे कपड़े पहनकर अपने घर को स्वागत के लिए तैयार किया। जब यमराज उनके घर आए, तो यमुना ने उन्हें स्नान कराकर ताजगी भरे कपड़े पहनाए। फिर स्वादिष्ट भोजन और मिठाइयां परोसीं। यमराज को बहन की यह सेवा और प्यार देखकर बहुत खुशी हुई।

भाई की प्रसन्नता देखकर यमुना ने उनसे वर मांगा और कहा, “भाई, आप हर साल इसी दिन मेरे घर आएं। जैसे मैं आपको आदर और स्नेह देती हूँ, वैसे ही जो बहन इस दिन अपने भाई को तिलक और सेवा करेगी, उसके जीवन में कभी मृत्यु का भय नहीं होगा।”

यमराज ने बहन की बात स्वीकार की और उन्हें अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक लौट गए। तभी से भाई दूज का पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई।

आज भी भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई के लिए लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं। भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं और उनके प्रेम और आदर का सम्मान करते हैं। भाई दूज का पूजन कथा के बिना अधूरा माना जाता है।

यह कथा हमें भाई-बहन के रिश्ते की महत्ता, प्रेम और स्नेह बनाए रखने की सीख देती है। भाई दूज का त्योहार न केवल भाई-बहन का प्रेम दिखाता है, बल्कि परिवार में खुशहाली और विश्वास भी बढ़ाता है।

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