Bhai Dooj 2025: भाई दूज आज, नोट कर लें तिलक शुभ मुहूर्त, मंत्र, उपाय से लेकर सबकुछ
Bhai Dooj 2025: पंच पर्व दीपावली का पांचवा त्योहार भाई दूज होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक करती हैं।

Bhai Dooj 2025: पंच पर्व दीपावली का पांचवा त्योहार भाई दूज होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक करती हैं और उनकी लंबी उम्र और खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। भाई भी अपने बहन का सम्मान करता है और उसके सुख-शांति की कामना करता है। इस साल यह पर्व 23 अक्तूबर को है। यह दिन भाई-बहन के प्यार, सुरक्षा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस बार भाई दूज पर पंचांग के 27 योगों में से एक अहम योग आयुष्मान योग बन रहा है। यह योग स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।
शुभ संयोग बन रहा
ज्योतिषविदों के अनुसार आयुष्मान योग के प्रभाव से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और रोग-शोक दूर होते हैं। आयुष्मान योग का बनना अत्यंत शुभ संयोग माना जा रहा है। यह योग भाइयों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह योग उनके जीवन में स्वास्थ्य, सुख और सफलता के द्वार खोलता है। ज्योतिषचार्य विभोर इंदूसुत के अनुसार इस बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 22 अक्तूबर को रात 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और 23 अक्तूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगी। सूर्योदय से रात्रि तक मुख्य रूप से द्वितीया केवल 23 अक्तूबर को ही है। इसलिए भाई दूज का पर्व 23 अक्तूबर गुरुवार को मनाया जाएगा।
टीका करने का शुभ समय
द्वितीया तिथि 23 अक्तूबर को सूर्योदय के समय से पूर्व ही मौजूद रहेगी इसलिए प्रातः काल से ही भाई दूज पर टीका करने के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।
● सुबह 6 बजकर 26 मिनट से 7 बजकर 51 मिनट के बीच शुभ चौघड़िया
● सुबह 10 बजकर 39 मिनट से दोपहर 1 बजेकर 27 मिनट तक चर और लाभ चौघड़िया का श्रेष्ठ मुहूर्त
शाम को भी तिलक संभव
किसी कारणवश दिन में अपने भाई को टीका ना कर पाएं तो शाम 4 बजकर 16 मिनट से रात 8 बजकर 52 मिनट के बीच शुभ अमृत और चर और लाभ चौघड़िया तीनों मुहूर्त उपस्थित रहेंगे। इसलिए शाम 4 बजकर 16 मिनट से रात 8 बजकर 52 मिनट के बीच भी बहनें अपने भाई को टीका कर सकती हैं ।
यह समय ठीक नहीं
दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से अपराह्न 3.00 बजे के बीच राहुकाल रहेगा। इस बीच टीका करना वर्जित माना जाता है।
पूजा विधि: ऐसे करें भाई का तिलक
पूजा के लिए आसन पर चावल का घोल फैलाकर चौक बनाया जाता है और भाई को उस पर बिठाकर पूजा की जाती है। बहन भाई के हाथों पर चावल का घोल, सिंदूर, फूल, पान और सुपारी रखती हैं। फिर “गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को…” मंत्र बोलते हुए तिलक किया जाता है। इसके बाद भाई के हाथ में कलावा बांधकर उसे मिठाई खिलाई जाती है। ऐसा करने से कहा जाता है कि भाई की उम्र लंबी होती है और उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। भाई भी बहन को उपहार देते हैं।
उपाय- भाई दूज के दिन बहनें यमराज के नाम से चौमुखा दीपक जलाकर घर की दहलीज पर रखती हैं। ऐसा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और अच्छी ऊर्जा बनी रहती है। यह दीपक यमराज से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है और घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।




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