रंगभरी एकादशी से शुरू होगा बांके बिहारी मंदिर में होली का रंगोत्सव, जानें क्या है शेड्यूल और क्या है भोग
banke bihari temple holi: ठाकुरजी के रंगभरी एकादशी से होली का आनंद उठाएंगे। आपको बता दें कि विश्वविख्यात ठाकुर बांके बिहारी मंदिर होली महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं>

ठाकुरजी के रंगभरी एकादशी से होली का आनंद उठाएंगे। आपको बता दें कि विश्वविख्यात ठाकुर बांके बिहारी मंदिर होली महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। रंगभरी एकादशी के लिए दिन से लेकर होलिका दहन के दिन तक होली उत्सव बांके बिहारी मंदिर वृंदावन में शुरु होगा। आपको बता दें कि इस साल रंगभरी एकादशी जिसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं, वो 26 फरवरी को रात 08:03 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 27 फरवरी 2026 को शाम 6:02 बजे खत्म होगी, इसलिए एकादशी का पर्व 27 फरवरी को मनाया जाएगा। इसी दिन से बांकेबिहारी मंदिर में रंगोत्सव शुरू होगा।
कब से कब तक क्या-क्या होगा होली रंगोत्सव शेड्यूल में
ठाकुरजी के सेवायत इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि बांकेबिहारी मंदिर में रंगोत्सव 27 फरवरी रंगभरी एकादशी से शुरू होगा, जो 2 मार्च चतुर्दशी की रात तक चलेगा।इस महोत्सव में ठाकुरजी रंग-ग़ुलाल से होली खेलेंगे।उन्होंने बताया कि पर्व के दौरान ठाकुरजी जगमोहन में भव्य सिंहासन पर विराजमान होकर दिव्य दर्शनसुख प्रदान करेंगे। वहीं होली पर्व पर जन जन के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी महाराज के होली खेलने के लिए कश्मीरी केसर, कन्नौजिया इत्र, कर्नाटकी चंदन और हाथरस से प्राकृतिक अबीर-गुलाल मंगवाया गया है। इस दिन फूलों को सुखारकर बनाए जाने वाले टेसू के फूलों के रंगों से होली खेली जाएगी।
किन चीजों का होली पर ठाकुर जी को लगेगा भोग
आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार होली पर्व के दृष्टिगत काबुली मेवा भी मंगाई गई, जिसका ठाकुरजी को भोग अर्पित किया जाएगा। ठाकुरजी को चाट, जलेबी व पकवानों का विशेष भोग लगाया जाएगा। इस चाट में दहीबड़ा, दही पकौड़ी, सोंठ बड़ा, सोंठ पकौड़ी, आटा-सूजी की टिकिया, पानी पूरी, समोसा, पकोड़े, गुजिया, पापड़ी, खाजा, ठोर, लठोर आदि व्यंजन प्रमुख रूप से शामिल होते हैं। इस मौके पर काजू, बादाम, पिस्ता, अखरोट, पोस्त, खरबूजा के बीज, किसमिस, मुनक्का, गुलकंद, दूध-मलाई युक्त ठंडाई और आलू एवं मैदा की स्वादिष्ट जलेबियां भी ठाकुरजी को अर्पित की जाएंगी।
ठाकुर जी के होली उत्सव का शेड्यूल
उन्होंने बताया कि 2 मार्च तक लागातर रंगीली होली आयोजन के उपरांत 3 मार्च को मंदिर में डोलोत्सव (धुलैडी पर्व) मनाया जाएगा। उस दिन भगवान स्वयं होली नहीं खेलेंगे, सिर्फ़ भक्तों को धुलैडी मनाते हुए निहारेंगे। 03 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण इस बार डोलोत्सव के दर्शन सीमित समय तक ही होंगे। आपको बता दें कि इस साल होली पर धुलैडी के दिन चंद्र ग्रहण है, इसलिए आम लोग होली अगले दिन 4 मार्च को होली खेलेंगे।




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