ब्रज की होली 2026: रमणरेती आश्रम में अबीर-गुलाल के लड्डूओं से खेली गई होली, फूलों से बने रंगों में डूबे भक्त
रमणरेती आश्रम में गोपाल जयंती के वार्षिकोत्सव के अंतिम दिन ठाकुर रमण बिहारी और प्रिया-प्रियतमा ने भक्तों संग होली खेली। जयपुर से विशेष प्रकार के अबीर-गुलाल के लड्डू मंगाए गए थे।

मथुरा के महावन स्थित रमणरेती आश्रम में शनिवार को ब्रज की पारंपरिक होली बड़े ही उत्साह और भक्ति से मनाई गई। ठाकुर रमण बिहारी जी के आंगन में अबीर-गुलाल के लड्डू बरसे, फूलों के रंगों की वर्षा हुई और हजारों श्रद्धालु प्रेम रस में सराबोर हो उठे। यह होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का अनुपम संगम थी।
रमणरेती आश्रम में होली की शुरुआत
आश्रम के प्रांगण में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। गोपाल जयंती के वार्षिकोत्सव के अंतिम दिन ठाकुर रमण बिहारी और प्रिया-प्रियतमा ने भक्तों संग होली खेली। जयपुर से विशेष प्रकार के अबीर-गुलाल के लड्डू मंगाए गए थे। इन लड्डुओं को हवा में उछाला जाता था, तो गुलाल के बादल घुमड़ते नजर आते थे। हर तरफ रंगों की बौछार हो रही थी और श्रद्धालु निहाल होकर झूम रहे थे।
फूलों के रंगों और टेसू की खासियत
होली पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल थी। इंदौर, मध्य प्रदेश से गुलाब, गेंदा, कमल, चंपा, चमेली, लिली, डाहलिया, हिबिस्कस, सूरजमुखी, मैगनोलिया, बहुलिया, कचनार, कनेर और गुलमोहर जैसे फूलों की पंखुड़ियां मंगाई गईं। इन फूलों से बने रंगों की वर्षा हुई। साथ ही टेसू के प्राकृतिक रंग का भी खूब प्रयोग हुआ। फूलों की खुशबू और इत्र की सुगंध से पूरा आश्रम महक उठा। भक्तों ने फूलों की होली खेली और ठाकुरजी पर पुष्पों की वर्षा की।
लठामार होली और ब्रज गोपियों की फटकार
रमणरेती में लठामार होली भी अनूठी रही। ब्रज गोपियां श्रद्धालुओं पर प्रेम भरी लाठियों की स्नेहिल फटकार लगाती रहीं। यह फटकार क्रोध की नहीं, बल्कि स्नेह और प्रेम की थी। भक्त हंसते-खेलते इन फटकारों का आनंद लेते रहे। पूरे पांडाल में भक्त एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते और रंगों में डूबते दिखे। रासमंडली के कलाकारों ने महारास और कृष्ण लीलाओं की प्रस्तुति दी। भजन-कीर्तन और नृत्य पर श्रद्धालु घंटों झूमते रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और उत्साह
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार भी रमणरेती होली में शामिल हुए। दोनों अधिकारियों ने ठाकुरजी पर पुष्पों की वर्षा की और श्रद्धालुओं पर अबीर-गुलाल बरसाया। संतों और भक्तों ने उन्हें रंगों से सराबोर किया। जिलाधिकारी ने एक बच्चे को गोद में उठाकर होली की मस्ती में शामिल हुए। दोनों अधिकारी भाव-विभोर होकर आश्रम की दिव्य होली देखते रहे और संतों से आशीर्वाद लिया।
रमणरेती की यह होली ब्रज की सभी परंपराओं को एक साथ समेटे हुए थी। फूलों, अबीर-गुलाल, लठामार और प्रेम के रंगों में डूबी यह होली भक्तों के मन को छू गई।




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