Amavasya kab hai 18 march or 19 march chaitra amavasya correct date when will do pitr tarpan and chaitra navratri Amavasya kab Hai: चैत्र अमावस्या कब है, 18 या 19 मार्च, पितरों के लिए तर्पण कब करें, नवरात्र की प्रतिपदा तिथि कब?, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Amavasya kab Hai: चैत्र अमावस्या कब है, 18 या 19 मार्च, पितरों के लिए तर्पण कब करें, नवरात्र की प्रतिपदा तिथि कब?

chaitra amavasya kab hai :पितरों के लिए तर्पण करने के लिए यह शुभ दिन है। इस दिन सुबह स्नान करें, लौटे में जलभरकर काले तिल डालकर पितरों को अर्पित करें।  

Tue, 17 March 2026 09:40 AMAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Amavasya kab Hai: चैत्र अमावस्या कब है, 18 या 19 मार्च, पितरों के लिए तर्पण कब करें, नवरात्र की प्रतिपदा तिथि कब?

इस साल अमावस्या तिथि को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ है। दरअसल इस बार अमावस्या तिथि दो दिन 18 और 19 मार्च को है। अब लोगों में सवाल है कि अमावस्या दो दिन है, तो चैत्र नवरात्रि 19 से कैसे शुरू हो रहे हैं। यहां हम आपकी कंफ्यूजन को दूर कर रहे हैं। इस साल अमावस्या तिथि 18 तारीख की सुबह 8.25 बजे से लग रही है। अमावस्या तिथि 19 मार्च की सुबह 6.52 तक रहेगी। ऐसे में अमावस्या दो दिन मिल रही है। 19 तारीख को 6.52 मिनट के बाद प्रतिपदा लग जाएगी, लेकिन उदया तिथि की प्रतिपदा नहीं रहेगी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना होती है। इसलिए नवरात्रि की शुरुआत भी इसी दिन से है। 19 मार्च से लेकर चैत्र नवरात्रि 27 मार्च तक रहेगें। इन दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

अब दो दिन अमावस्या है तो 18 और 19 मार्च को क्या करें

आपको बता दें कि अगर आप अमावस्या पर पितरों के लिए धूपदान करते हैं, तो आप 18 मार्च की दोपहर में कर सकते हैं। अगले दिन 19 मार्च को नहीं हो पाएगा, क्योंकि सुबह सात बजे से पहले ही तिथि समाप्त हो जाएगी। 19 मार्च को आप स्नान और दान कर सकते हैं। लेकिन अमावस्या से जुड़े पितरों के काम 18 मार्च को ही होंगे। 19 मार्च को नौ देवियों की कलश स्थापना होगी। इस दिन पंचक भी है।

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अमावस्या तिथि पर क्या करें

पितरों के लिए तर्पण करने के लिए यह शुभ दिन है। इस दिन सुबह स्नान करें, लौटे में जलभरकर काले तिल डालकर पितरों को अर्पित करें। गाय के गोबर का कंड़ा जलाकर इस पर खीर पूड़ी रखें। कौवे, गाय, कुत्ते और गरीबों को भोजन कराएं। पीपल के पेड़ की भी पूजा भी करें। दीपक जलाएं और सात परिक्रमा करें।

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यहां पढ़ें अमावस्या के बाद शुरु होंगे चैत्र नवरात्रि

18 मार्च (बुधवार) : चैत्र कृष्ण चतुर्दशी तिथि प्रातः 08.26 मिनट तक पश्चात अमावस्या तिथि। पितृकार्येषु अमावस। पंचक।

19 मार्च (गुरुवार) : चैत्र कृष्ण अमावस्या तिथि प्रातः 06.53 मिनट तक पश्चात प्रतिपदा रात्रि 04.53 मिनट तक तदनंतर द्वितीया तिथि। चैत्र अमावस (प्रातः 06.53 मिनट तक)। वि. संवत् 2082 पूर्ण। रौद्र नाम नव वि. संवत् 2083 प्रारंभ। चैत्र (वासंत) नवरात्र प्रारंभ। घटस्थापन (अभिजित मुहूर्त में)। ध्वजारोहण। तैलाभ्यंग। श्री दुर्गा पूजा। गुड़ी पड़वा। पंचक। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय।

20 मार्च (शुक्रवार) : चैत्र शुक्ल द्वितीया तिथि नवरात्र व्रत रात्रि, 02.31 मिनट तक। चंद्रदर्शन। पंचक समाप्त रात्रि 02.28 मिनट। उत्तर गोल प्रारंभ।

21 मार्च (शनिवार) : चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि नवरात्र व्रत, रात्रि 11.57 मिनट तक। श्री मत्स्य जयंती। गणगौरी तृतीया। शव्वाल (मु.) मास प्रारंभ। गंडमूल रात्रि 12.38 मिनट तक।

22 मार्च (रविवार) : चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि नवरात्र व्रत, रात्रि 09.17 मिनट तक। शक चैत्र एवं संवत् 1948 प्रारंभ। दमनक चतुर्थी।

23 मार्च (सोमवार) : चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि सायं 06.39 मिनट तक। श्री (लक्ष्मी) पंचमी। -पं. ऋभुकांत गोस्वामी

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