Adhik maas 2026 Kab hai: मलमासी जेठ में दो पूर्णिमा, दो अमावस्या, गुरुपुष्य योग भी दो बार, क्या दान करें
adhik maas 2026:भगवान विष्णु को समर्पित अधिमास तो हर चौथे साल आता है लेकिन जेठ में अबकी 27 साल बाद आ रहा है। पहले महीने का पहला पखवाड़ा बीतने के बाद दूसरे जेठ का आगमन कब से होगा , इसमें क्या करें, सब जाने यहां

भगवान विष्णु को समर्पित अधिमास तो हर चौथे साल आता है लेकिन जेठ में अबकी 27 साल बाद आ रहा है। इसके चलते जेठ के दो महीने होंगे। पहले महीने का पहला पखवाड़ा बीतने के बाद दूसरे जेठ का आगमन 17 मई को होगा। 15 जून को इसके प्रस्थान के बाद पहले जेठ का दूसरा पखवाड़ा आरंभ होगा। दो पूर्णिमा, दो अमावस्या के साथ ही मलमासी जेठ में गुरुपुष्य योग भी दो बार बनेगा। एक योग मई के अंत और दूसरा जून के पहले सप्ताह में बनेगा। आदर्श सेवा संस्कृत कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार सनातनी पंचांगों की गणना संतुलित करने के लिए अधिमास की व्यवस्था है।
क्या है अधिकमास
सूर्य वर्ष करीब 365 दिनों का जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है। हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बनता है। यही अंतर तीन वर्ष में करीब एक महीने हो जाता है। सूर्य और चंद्र वर्ष के इस अंतर को समाप्त करने के लिए हर 32 महीने 16 दिन में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। यही अतिरिक्त महीना अधिक मास, मलमास और पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। अधिमास में सूर्य एक से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करते। ऐसी स्थिति में यह महीना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो जाता है किंतु मांगलिक कार्यों पर अल्पविराम लग जाता है।
अधिमास में क्या ना करें
महावीर पंचांग के संपादक डॉ.रामेश्वरनाथ ओझा बताते हैं कि अधिक मास को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इस दौरान शादी-विवाह से जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं। नए घर में प्रवेश, नींव पूजन या प्रॉपर्टी से जुड़े बड़े फैसले भी इसमें नहीं लेने चाहिए। जनेऊ संस्कार, सगाई, मुंडन आदि भी वर्जित है। नया कारोबार, दुकान या शोरूम खोलने से आर्थिक क्षति की आशंका रहती है। कुल मिलाकर हमारे ग्रंथ इस समय बड़े फैसलों और नई शुरुआत से बचने की सलाह देते हैं। अधिमास में तामसिक भोजन से हर हाल में बचना चाहिए।
अधिमास में विषम संख्या में जपें माला
भृगु संहिता विशेषज्ञ पं. वेदमूर्ति शास्त्री के अनुसार अधिमास में भगवान विष्णु की पूजा अत्यंत फलदायी होती है। इस महीने आस्थावानों को ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार नित्य जप करना चाहिए। यदि अधिक बार जप करना हो तो इसे तीन, पांच और सात के क्रम में आगे बढ़ाएं। इस मंत्र के जप से मानसिक शांति की अनुभूति होती है। सकारात्मक विचारों का जीवन में उदय होता है। विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा, श्रीमद्भागवत या गीता का पाठ करना भी आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक सिद्ध होता है।
अधिमास में दान-पुण्य का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार अधिमास में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। हर व्यक्ति को जरूरतमंद लोगों को अनाज, जल, तिल, वस्त्र और फल का दान अनिवार्य रूप से करना चाहिए। पवित्र जल में स्नान करने से पूर्व घर पर स्नान करके ही जाना उत्तम कहा गया है। यदि जल स्थान तक न जा सकें तो सामान्य जल में गंगाजल मिला कर स्नान करने से भी गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त होगा। इस अवधि को भक्ति, साधना और आत्मचिंतन में लगाना श्रेष्ठ माना गया है। भगवत कृपा पाने का यह विशेष अवसर होता है।




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