रोज शाम घर में करते हैं आरती? जान लें सही तरीका और समय, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा
अगर आप हर शाम घर में रोज आरती करते हैं तो कुछ विशेष बातों का ध्यान जरूर दें। कई बार सही तरीका ना पता होने पर लोग गलत तरीके से पूजा या आरती करते हैं, जिससे पूजा का पूरा-पूरा फल नहीं मिल पाता है।

हमारे सनातन धर्म में शाम की पूजा और आरती का खास महत्व होता है। दिन भर की थकान के बाद जब आरती की जाती है तो मन को एक अलग ही शांति और सुकून मिलता है। साथ ही आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। माना जाता है कि अगर सही समय और सही तरीके से आरती की जाए तो इसका दोगुना फल मिलता है। हालांकि कई लोगों को आरती का सही तरीका नहीं पता होता है या फिर कई बार समय की कमी के चलते लोग खानापूर्ति भर कर देते हैं। अगर आप भी आरती चालीसा उठाकर आरती पढ़ लेते हैं और दीया जला देते हैं तो आपको अब आरती करने का सही तरीका जानना चाहिए। तो चलिए आसान तरीके से समझते हैं कि आरती करने का सही तरीका और सही समय क्या है?
आरती करते वक्त रखें इन नियमों का ध्यान
1. आरती की थाली के घुमाने को लेकर भी लोग गलती कर जाते हैं। सबसे आम गलती होती है आरती को बस गोल-गोल घुमाते रहना। शास्त्रों के अनुसार आरती हमेशा ॐ की आकृति के अनुसार ही घुमानी चाहिए। माना जाता है कि इस तरीके से आरती उतारी जाए तो पूजा प्रभावशाली होती है।
2. आरती के दौरान दीए की संख्या हमेशा विषम होनी चाहिए। चाहे तो आप एक ही दीया रख सकते हैं। इसके अलावा आप 3, 5 या 7 दीए भी ले सकते हैं। कई लोग बिना दीए की गिनती किए ही आरती करने लगते हैं। शास्त्र के अनुसार ऐसा करना सही नहीं है। सही संख्या के साथ अगर आप पूजा में दीयों को रखेंगे तो इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी।
3. आरती कैसे करनी है? इस सवाल पर भी कई लोग कन्फ्यूजन रहते हैं। बता दें कि आरती हमेशा भगवान के चरणों से शुरू करनी चाहिए। पहले आरती 4 बार चरणों में दिखानी चाहिए। इसके बार 2 बार नाभि के पास। अंत में भगवान के चेहरे यानी मुख मंडल की ओर आरती करनी चाहिए। अगर इस क्रम को छेड़ा गया तो आरती को हमेशा ही अधूरी माना जाता है।
4. तमाम लोग आरती बैठकर करते हैं लेकिन ये सही तरीका नहीं है। मान्यता और सही नियम के अनुसार जो लोग पूरी तरह से स्वस्थ हैं उन्हें हमेशा खड़े होकर ही आरती करनी चाहिए। दरअसल खड़े होने से आरती करने से सही ऊर्जा और श्रद्धा बनी रहती है। दिशा की बात करें तो हमेशा पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ही आरती करनी चाहिए।
5. कई लोगों को लगता है कि आरती कर लेने से पूजा पूरी हो जाती है लेकिन ऐसा नहीं है। आरती पूरी होते ही दीए के चारों ओर जल का घेरा जरूर बनाना चाहिए। बता दें कि इसे आचमन कहा जाता है। तमाम लोग इस प्रक्रिया को भूल जाते हैं या कइयों को इस बारे में ठीक से पता नहीं होता है। बता दें कि इससे बिना आरती को अधूरा माना जाता है। कहते हैं कि अगर ऐसा ना किया जाए आरती का पूरा-पूरा लाभ नहीं मिलता है।
6. शाम की आरती के समय को लेकर लोगों के बीच काफी कन्फ्यूजन होता है। नियम के अनुसार आरती का सही समय सूर्यास्त यानी संध्या काल वाला समय होता है। देर रात में आरती करना सही नहीं माना जाता है। मान्यता है कि इससे इसका सकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)




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