aaj ka vichar quote of the day 24 april 2026 Chanakya nitiThese are enemies to the greedy and to thieves Quote Of The Day: लोभी के लिए मांगने वाला होता है शत्रु, चोरों के लिए लिए चांदनी, पढ़ें आज के अनमोल विचार, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Quote Of The Day: लोभी के लिए मांगने वाला होता है शत्रु, चोरों के लिए लिए चांदनी, पढ़ें आज के अनमोल विचार

aaj ka vichar: आचार्य चाणक्य केवल एक महान शिक्षक और कुशल रणनीतिकार ही नहीं थे, बल्कि मानव स्वभाव और जीवन के गहरे ज्ञाता भी थे। उन्होंने अपनी नीतियों के जरिए जीवन के कई पहलुओं, विशेष रूप से रिश्तों और व्यवहार को बेहद सरल और तार्किक तरीके से समझाया है।

Fri, 24 April 2026 08:24 AMDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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Quote Of The Day: लोभी के लिए मांगने वाला होता है शत्रु, चोरों के लिए लिए चांदनी, पढ़ें आज के अनमोल विचार

Aaj Ka Suvichar: आचार्य चाणक्य केवल एक महान शिक्षक और कुशल रणनीतिकार ही नहीं थे, बल्कि मानव स्वभाव और जीवन के गहरे ज्ञाता भी थे। उन्होंने अपनी नीतियों के जरिए जीवन के कई पहलुओं, विशेष रूप से रिश्तों और व्यवहार को बेहद सरल और तार्किक तरीके से समझाया है। उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही उपयोगी हैं जितनी प्राचीन समय में थीं। माना जाता है कि जो व्यक्ति उनकी नीतियों को सही ढंग से अपनाता है, उसके जीवन में सफलता के रास्ते खुद खुलने लगते हैं। नीचे उनके कुछ ऐसे श्लोक दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर हम जीवन की कई समस्याओं से बच सकते हैं।

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श्लोक 1

यस्मिन रुष्टे भयं नास्ति तुष्टे नैव धनागमः।
निग्रहाऽनुग्रहोनास्ति स रुष्टः किं करिष्यति।।

अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति के नाराज होने पर कोई भय नहीं होता, और प्रसन्न होने पर भी कोई धन लाभ नहीं मिलता और जो न दंड दे सकता है न ही कृपा कर सकता है, उसके नाराज होने से क्या फर्क पड़ता है? इसका मतलब है कि जिस इंसान के पास न सजा देने की शक्ति है और न ही इनाम देने की क्षमता, उसके गुस्सा होने या खुश होने का कोई महत्व नहीं होता।

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श्लोक 2

"न स्नेहात् कृत्वा विघ्नं न द्वेषात् न च लोभतः।
न मोहत् कार्यमत्यन्तं कार्यं कार्यवदाचरेत्"

अर्थ- इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किसी भी काम को प्रेम, नफरत लालच या मोह में यानी भ्रम में आकर नहीं करना चाहिए। हमेशा अपने कार्य को कर्तव्य समझकर, निष्पक्ष और विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए। यानी जैसे कार्य आवश्यक है, उसे वैसे ही करना चाहिए।

श्लोक 3

धनहीनो न हीनश्च धनिकः स सुनिश्चयः।
विद्यारत्नेन हीनो यः स हीनः सर्ववस्तुषु ॥ १०:१॥

अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गरीबी किसी इंसान को छोटा नहीं बनाती, लेकिन शिक्षा और ज्ञान की कमी इंसान को सच में कमजोर और पीछे बना देती है। विद्या रूपी ज्ञान जिसके पास है, वह सबसे धनी है, चाहे उसके पास बाहरी धन न हो।

श्लोक 4

लुब्धानां याचकः शत्रुमूर्खाणां बोधको रिपुः ।
जारस्त्रीणां पतिः शत्रुश्चौराणां चन्द्रमा रिपुः ॥

अर्थ-

लोभी लोगों के लिए मांगने वाला शत्रु होता है, मूर्खों के लिए समझाने वाला व्यक्ति शत्रु होता है। व्यभिचारी स्त्रियों के लिए उनका पति शत्रु होता है और चोरों के लिए चंद्रमा शत्रु होता है। क्योंकि चांदनी यानी रोशनी में चोरी छिप नहीं सकती।

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श्लोक 5

गुणैरुत्तमतां याति नोच्चैरासनसंस्थितः।
प्रासादशिखरस्थोऽपि काकः किं गरुडायते॥

अर्थ-इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य की श्रेष्ठता उसके पद या स्थिति से नहीं, बल्कि उसके गुणों से तय होती है। केवल ऊंचे स्थान पर पहुंच जाना किसी को महान नहीं बना देता। जैसे महल की चोटी पर बैठा कौआ भी गरुड़ नहीं बन सकता, उसी प्रकार बिना उत्कृष्ट गुणों के कोई व्यक्ति श्रेष्ठ नहीं कहलाता।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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