aaj ka vichar quote of the day 23 april 2026 Chanakya niti ki acchi baatein Quote Of The Day: मूर्खों के शत्रु विद्वान होते हैं, गरीब के धनवान, कुलवती स्त्रियों की... पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Quote Of The Day: मूर्खों के शत्रु विद्वान होते हैं, गरीब के धनवान, कुलवती स्त्रियों की... पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

aaj ka vichar: आचार्य चाणक्य न केवल एक महान गुरु और कुशल रणनीतिकार थे, बल्कि मानव जीवन के गहरे जानकार भी थे। उन्होंने अपनी नीतियों के माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं, खासकर रिश्तों और व्यवहार को बेहद सरल और तार्किक ढंग से समझाया है।

Thu, 23 April 2026 08:29 AMDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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Quote Of The Day: मूर्खों के शत्रु विद्वान होते हैं, गरीब के धनवान, कुलवती स्त्रियों की... पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार

Aaj Ka Suvichar: आचार्य चाणक्य न केवल एक महान गुरु और कुशल रणनीतिकार थे, बल्कि मानव जीवन के गहरे जानकार भी थे। उन्होंने अपनी नीतियों के माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं, खासकर रिश्तों और व्यवहार को बेहद सरल और तार्किक ढंग से समझाया है। उनकी बातें आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उस दौर में थीं। कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति उनकी नीतियों को सही तरीके से अपने जीवन में उतार ले, तो सफलता उसके कदम चूमती है। नीचे आचार्य चाणक्य के कुछ श्लोक है, जिन्हें जीवन में उतार लिया जाए तो हम कई समस्याओं से बच सकते हैं।

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श्लोक 1

मूर्खाणां पण्डिता द्वेष्या अधनानां महाधनाः।
वरांगना कुलस्त्रीणां सुभगानां च दुर्भगा॥

अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख लोगों को विद्वान लोग अच्छे नहीं लगते, वे उनसे द्वेष करते हैं। वहीं, गरीब लोगों को धनवान लोग पसंद नहीं आते हैं। चरित्रहीन स्त्रियां कुलीन और सती स्त्रियों से ईर्ष्या करती हैं। इसके अलावा विधवाओं या दुर्भाग्यशाली स्त्रियां, सौभाग्यशाली स्त्रियों से जलती हैं

श्लोक 2

प्दुष्टाभार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः ।
ससर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव नः संशयः ।।

अर्थ- चाणक्य नीति के इस श्लोक में बताया गया है कि कुछ संबंध ऐसे होते हैं, जो दिखने में सामान्य लगते हैं लेकिन वास्तव में बहुत खतरनाक साबित हो सकते हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दुष्ट स्वभाव की पत्नी, झूठ बोलने वाला मित्र, चालाक और कपटी सेवक और सर्प इनके साथ रहना हमेशा जोखिम भरा होता है। ऐसे लोगों या परिस्थितियों के साथ जीवन बिताना धीरे-धीरे खुद को संकट में डालने जैसा है। ये कभी भी धोखा दे सकते हैं, नुकसान पहुंचा सकते हैं या जीवन को अशांत बना सकते हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि ऐसे संबंधों से दूरी बनाई जाए, क्योंकि इनके साथ रहना मानो स्वयं मृत्यु को गले लगाने के समान है।

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श्लोक 3

आपदर्थे धनं रक्षेद्दारान् रक्षेध्दनैरपि ।
नआत्मानं सततं रक्षेद्दारैरपि धनैरपि ।।

अर्थ- चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति को भविष्य में आने वाली कठिन परिस्थितियों से बचने के लिए हमेशा धन का संचय करना चाहिए। धन संकट के समय सहारा बनता है, इसलिए उसकी सुरक्षा और सही उपयोग जरूरी है। वहीं, यदि परिवार पर संकट आए तो धन का त्याग करके भी पत्नी की रक्षा करना व्यक्ति का कर्तव्य माना गया है। लेकिन जब बात स्वयं के अस्तित्व, आत्मा या जीवन की रक्षा की हो, तब सबसे पहले खुद को बचाना आवश्यक है। ऐसी स्थिति में धन और अन्य संबंध भी गौण हो जाते हैं। यानी जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है, क्योंकि उसी के आधार पर बाकी सब कुछ संभव है।

श्लोक 4

यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवः ।
न च विद्यागमऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत् ।।

अर्थ-चाणक्य नीति का यह श्लोक यह समझाता है कि व्यक्ति को ऐसे स्थान पर नहीं रहना चाहिए, जहां उसे सम्मान न मिले या आजीविका के साधन उपलब्ध न हों। इसी तरह, जहां सच्चे मित्रों का अभाव हो और ज्ञान का वातावरण न हो, वह स्थान भी जीवन के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। ऐसे स्थानों को छोड़ देना ही समझदारी है, क्योंकि ये व्यक्ति के विकास और सुख दोनों में बाधा बनते हैं।

श्लोक 5

जानीयात् प्रेषणे भृत्यान् बान्धवान् व्यसनागमे ।
मित्रं चापत्तिकाले तु भार्यां च विभवक्षये ।।

अर्थ- चाणक्य नीति का यह श्लोक बताता है कि व्यक्ति के आसपास के लोगों की असली पहचान कठिन समय में ही होती है। जब हालात खराब होते हैं, तभी सेवक की निष्ठा सामने आती है। मुसीबत में फंसने पर रिश्तेदारों का व्यवहार स्पष्ट होता है, जबकि संकट के समय सच्चे मित्र की पहचान होती है। इसी तरह, विपत्ति आने पर पत्नी का साथ और समर्पण परखा जाता है। यानी कठिन परिस्थितियां ही रिश्तों की सच्चाई उजागर करती हैं।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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