Quote Of The Day: दूसरों से नफरत करने से धन हानि, ज्ञानी से नफरत परिवार का विनाश, पढ़ें आज का विचार
quote of the day: आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अपने ही लोगों से द्वेष यानी नफरत रखने से मृत्यु का कारण बन सकता है। दूसरों से द्वेष करने से धन का नुकसान होता है। राजा से द्वेष करने से खुद का विनाश होता है। नीचे पढ़ें आज का विचार।

Aaj Ka Suvichar: आचार्य चाणक्य एक महान विचारक और नीति-निर्माता थे, जिनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को सही दिशा दिखाती हैं। चाणक्य नीति में जीवन के हर पहलू-जैसे परिवार, समाज, रिश्ते, करियर और सफलता—से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। उनका मानना था कि हर व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है, और सही सोच व व्यवहार से यह संभव है। आज हम आपके लिए चाणक्य नीति के कुछ ऐसे श्लोक लेकर आए हैं, जो जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र हैं और जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
श्लोक 1
आप्तद्वेषाद्भवैन्मृत्युः परद्वेषाद्धनक्षयः।
राजद्वेषाद्भवेन्नशो ब्रह्मद्वेषात्कुलक्षयः॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अपने ही लोगों से द्वेष यानी नफरत रखने से मृत्यु का कारण बन सकता है। दूसरों से द्वेष करने से धन का नुकसान होता है। राजा से द्वेष करने से खुद का विनाश होता है। ज्ञानी लोगों से द्वेष करने से परिवार यानी कुल का नाश होता है। इसका मतलब है कि द्वेष हर रूप में नुकसान ही देता है, चाहे अपने लोगों से हो, दूसरों से, सत्ता से या ज्ञान से। इसलिए द्वेष से बचना ही बेहतर है।
श्लोक 2
विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।
तस्मात् मूलं यत्नो रक्षणीयम् छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम् ॥
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ज्ञानी व्यक्ति एक वृक्ष के समान होता है। उसकी ज्ञानी रूपी वृक्ष की जड़ नित्य उपासना के समान होता है। वेद उसकी शाखाएं हैं और धर्म-कर्म उसके पत्ते हैं। इसलिए उस जड़ी की विशेष देखभाल करनी चाहिए। क्योंकि जड़ नष्ट हो जाने पर ना ही शाखाएं बचती है और ना ही पत्ते।
श्लोक 3
एकवृक्षे समारूढा नानावर्णा बिहंगमाः।
प्रभाते दिक्षु दशसु का तत्र परिवेदना?
अर्थ- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अलग-अलग रंग के पक्षी एक ही पेड़ पर बैठे होते हैं, लेकिन सुबह होते ही वे सब अलग-अलग दिशाओं में उड़ जाते हैं। फिर इसमें दुख करने की क्या बात है? ठीक यही दशा मनुष्यों का भी जीवन में लोग (परिवार, दोस्त) कुछ समय के लिए साथ होते हैं, लेकिन समय आने पर सब अपने-अपने रास्ते चले जाते हैं। इसलिए बिछड़ने पर ज्यादा दुख नहीं करना चाहिए, यह स्वाभाविक है।
श्लोक 4
बुद्धिर्यस्य बलं तस्य निर्बुध्दैश्व कुतो बलम्।
वने हस्ती मदोन्मत्तः शशकेन निपातितः ॥
अर्थ- इस श्लोक में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिसके पास बुद्धि यानी समझदारी होती है, वही वास्तव में शक्तिशाली होता है। बिना बुद्धि के बल का कोई महत्व नहीं होता। जंगल में एक मदमस्त हाथी को भी एक छोटे से खरगोश ने हरा दिया था। असली ताकत दिमाग की होती है, सिर्फ शरीर की ताकत से जीत नहीं मिलती। समझदारी से बड़ा काम किया जा सकता है।
श्लोक 5
शाकेन रोगा वर्द्धते पयसो वर्द्धते तनुः।
घृतेन वर्द्धते वीर्यं मांसान्मांस प्रवर्द्धते ॥
अर्थ- यह श्लोक बताता है कि अलग-अलग प्रकार के भोजन का शरीर पर अलग असर होता है, दूध और घी ताकत बढ़ाते हैं, जबकि मांस से शरीर मजबूत होता है। अधिक साग खाने से रोग बढ़ सकते हैं। दूध से शरीर बढ़ती है। घी से ऊर्जा बढ़ती है। मांस खाने से शरीर का मसल्स बढ़ता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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