Quote Of The Day: नदी, शस्त्रधारी, सींग वाले जानवरों पर कभी ना करें भरोसा, जीवन को सुखी बना देंगे चाणक्य के ये विचार
aaj ka vichar: आचार्य चाणक्य एक महान विचारक थे, जिनकी सीख आज भी लोगों को सही दिशा दिखाती है। चाणक्य ने सिर्फ राजनीति और अर्थशास्त्र ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज, रिश्ते, नौकरी और सफलता से जुड़ी अहम बातें भी समझाई हैं, जो आज भी उपयोगी हैं।

Aaj Ka Vichar: आचार्य चाणक्य एक महान विचारक थे, जिनकी सीख आज भी लोगों को सही दिशा दिखाती है। चाणक्य ने सिर्फ राजनीति और अर्थशास्त्र ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज, रिश्ते, नौकरी और सफलता से जुड़ी अहम बातें भी समझाई हैं, जो आज भी उपयोगी हैं। ऐसे ही एक श्लोक के जरिए उन्होंने यह बताया है कि हमें किन किन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अगर इस नीति का ध्यान नहीं रखा जाता है तो, हमारे जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं। आज हम उनके 5 ऐसे श्लोकों के बारे में जानेंगे, जिन्हें जीवन में अपनाकर सफलता की राह आसान बनाई जा सकती है।
श्लोक 1
नदीनां शस्त्रपाणीनां नखीनां श्रृंगीणां तथा।
विश्वासो नैव कर्तव्य: स्त्रीषु राजकुलेषु च।।
अर्थ- चाणक्य नीति के इस श्लोक का भाव यह है कि कुछ चीज़ों पर आंख बंद करके भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है। नदियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनका बहाव कभी भी अचानक तेज हो सकता है और खतरा पैदा कर सकता है। हथियार रखने वाले व्यक्ति यानी शस्त्रधारियों से भी सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि वह गुस्से में आकर नुकसान पहुंचा सकता है। नुकीले नाखून या सींग वाले जानवर भी कभी भी हमला कर सकते हैं, इसलिए उनसे दूरी बनाकर रखना बेहतर है। आचार्य चाणक्य के अनुसार, बुरे स्वभाव वाले लोगों से भी सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि वे अपना काम निकलने के बाद धोखा दे सकते हैं। इसी तरह, किसी भी पद या शक्ति से जुड़े व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय समझदारी और सावधानी से काम लेना चाहिए।
श्लोक 2
आपदर्थे धनं रक्षेद्दारान् रक्षेध्दनैरपि ।
नआत्मानं सततं रक्षेद्दारैरपि धनैरपि ।।
अर्थ- चाणक्य बताते हैं कि जीवन में आने वाली मुश्किलों से बचने के लिए धन की बचत करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर धन खर्च करके भी अपने जीवनसाथी की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन जब बात स्वयं की सुरक्षा की हो, तो धन और अन्य संबंध भी छोटे पड़ जाते हैं। चाणक्य के अनुसार, जीवन में धन का महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए उसकी रक्षा और सही उपयोग करना जरूरी है। जो लोग धन की अहमियत नहीं समझते और उसे बेवजह खर्च करते हैं, उन्हें आगे चलकर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, धन से भी ज्यादा जरूरी आत्मा की सुरक्षा और शुद्धता है। यदि मन और आत्मा शुद्ध रहें, तो जीवन में सुख-समृद्धि और धन का आशीर्वाद भी बना रहता है।
श्लोक 3
गुणैरुत्तमतां याति नोच्चैरासनसंस्थितः।
प्रासादशिखरस्थोऽपि काकः किं गरुडायते॥
अर्थ- इस श्लोक का अर्थ है कि मनुष्य अपनी ऊंची जगह या पद से महान नहीं बनता, बल्कि अपने गुणों से श्रेष्ठ बनता है। जैसे महल के शिखर (ऊपर) पर बैठा हुआ कौआ भी गरुड़ नहीं बन जाता, उसी तरह सिर्फ ऊंचे स्थान पर पहुंचने से कोई महान नहीं हो जाता। इसके यह सीख मिलती है कि इंसान की असली पहचान उसके गुण, ज्ञान और आचरण से होती है, न कि उसके पद या बाहरी दिखावे से।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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