बंगाल में 'सबका हिसाब' करने की बात क्यों कह रहे हैं दिलीप घोष, बुलडोजर पर मनाया जीत का जश्न
2021 की हार और 2026 की जीत के अंतर को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने पिछली बार भाजपा को विपक्ष की भूमिका निभाने का मौका दिया था। लोगों ने देखा कि देश जिस दिशा में बढ़ रहा है बंगाल उसके विपरीत जा रहा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड जीत के बाद अब हर कोई जीत की जश्न में डूबा हुआ है। खड़गपुर सदर सीट से टीएमसी के प्रदीप सरकार को 30,506 वोटों से हराने वाले दिलीप घोष ने अपनी जीत का जश्न एक बुलडोजर पर सवार होकर मनाया। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश अध्यक्ष रहे घोष ने स्पष्ट कर दिया है कि नई सरकार का एजेंडा राज्य को बदहाली से बाहर निकालना है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'सबका साथ, सबका विकास' की नीति की चर्चा करते हुए 'सबका हिसाब' की भी बात कही।
राज्य के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए दिलीप घोष ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि बंगाल में संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी शासन के दौरान लगभग 50 लाख युवाओं को रोजगार की तलाश में बंगाल छोड़ना पड़ा। भाजपा सरकार इन युवाओं को वापस लाकर राज्य में ही अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि जैसे बिहार की स्थिति में सुधार हो रहा है, वैसे ही 'मोदी है तो मुमकिन है' के मंत्र के साथ बंगाल को एक बेहतर प्रशासन दिया जाएगा।
'सबका साथ' के साथ 'सबका हिसाब'
पार्टी के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए दिलीप घोष ने प्रधानमंत्री मोदी के नारे को एक नए आयाम के साथ पेश किया। उन्होंने कहा, "हमारा मंत्र 'सबका साथ, सबका विकास' तो होगा ही, लेकिन एक नई चीज होगी 'सबका हिसाब'। कानून अपना काम करेगा और भ्रष्टाचारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।"
2021 की हार और 2026 की जीत के अंतर को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने पिछली बार भाजपा को विपक्ष की भूमिका निभाने का मौका दिया था। लोगों ने देखा कि देश जिस दिशा में बढ़ रहा है बंगाल उसके विपरीत जा रहा है। इसी भटकाव को ठीक करने के लिए जनता ने इस बार भाजपा को पूर्ण बहुमत दिया है। टीएमसी द्वारा अपने कार्यकर्ताओं और कार्यालयों पर हमलों के आरोपों को खारिज करते हुए घोष ने 2021 की चुनावी हिंसा की याद दिलाई। उन्होंने कहा, "2021 के नतीजों के बाद हमारे कितने ही कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी, उसे भूलना नहीं चाहिए। भाजपा हिंसा में विश्वास नहीं करती। जो कार्यालय टीएमसी ने जबरन कब्जा लिए थे, उन्हें वापस लिया जा रहा है।" उन्होंने डायमंड हार्बर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां टीएमसी ने जेसीबी का उपयोग करके भाजपा के 12 कार्यालयों को ध्वस्त किया था।
बंगाल में बुलडोजर ऐक्शन
जब उनसे उनके 'बुलडोजर' वाले अंदाज और भावी पोर्टफोलियो के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "पश्चिम बंगाल को भ्रष्टाचार और बांग्लादेशी घुसपैठियों को साफ करने के लिए जेसीबी की जरूरत है। जहां तक मेरी भूमिका का सवाल है, मैंने हमेशा पार्टी के आदेश का पालन किया है। आगे भी पार्टी जो तय करेगी, मैं वही करूंगा।"
आपको बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व बर्धमान जिले के कटवा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दक्षिण बंगाल में केंद्रित राजनीतिक रूप से प्रभावशाली शरणार्थी समुदाय मतुआ और नामशूद्र को आश्वस्त किया था कि उनका भविष्य सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से नहीं, बल्कि संविधान और सीएए से सुरक्षित है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार न केवल 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के साथ काम करेगी बल्कि उसमें 'सबका हिसाब' भी जोड़ेगी, यानी हर "लुटेरे और अत्याचारी" को पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाएगा।




साइन इन