शुभेंदु अधिकारी या कोई नया चेहरा, अगर बंगाल में भाजपा जीती तो कौन बनेगा मुख्यमंत्री?
पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार बनेगी, इसका फैसला सोमवार 4 मई को वोटों की गिनती के बाद हो जाएगा। अधिकांश एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है, जिससे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की 2011 से चली आ रही सत्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार बनेगी, इसका फैसला सोमवार 4 मई को वोटों की गिनती के बाद हो जाएगा। अधिकांश एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है, जिससे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की 2011 से चली आ रही सत्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगर बीजेपी सरकार बनाती है तो सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री पद का होगा। बीजेपी की ओर से कौन बंगाल को संभालेगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन कयासों का बाजार गर्म है।
दरअसल, बीजेपी ने अब तक आधिकारिक तौर पर किसी चेहरे को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल का मुख्यमंत्री बंगाली होगा। दमदम चुनाव रैली में अमित शाह ने कहा था कि टीएमसी गलत प्रचार कर रही है कि बीजेपी की जीत पर मुख्यमंत्री बाहर से आएगा। बंगाल में पैदा हुआ, बंगाली माध्यम से पढ़ा-लिखा और बंगाली भाषा जानने वाला व्यक्ति ही मुख्यमंत्री बनेगा।
बीजेपी के संभावित चेहरे
वैसे प्रदेश में बीजेपी के पास कई मजबूत दावेदार हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष 2021 के चुनाव में पार्टी को 70 से ज्यादा सीटें दिलाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं और सीएम पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य, लॉकेट चटर्जी और रूपा गांगुली का नाम भी चर्चा में है। हालांकि, सबसे मजबूत दावेदारी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की मानी जा रही है।
शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे क्यों?
दरअसल, शुभेंदु अधिकारी ने 2021 में ममता बनर्जी को उनकी परंपरागत सीट नंदीग्राम में ही हराकर टीएमसी को बड़ा झटका दिया था। इस बार भी उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से लड़ाई लड़ी है। नंदीग्राम में टीएमसी ने उनके पूर्व सहयोगी पबित्र घोष को मैदान में उतारा है। 2021 के चुनाव से पहले टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी को पार्टी ने ममता बनर्जी के विकल्प के रूप में देखा। हिंदू बाहुल क्षेत्रों में उनकी छवि कट्टर हिंदुत्ववादी नेता के रूप में मजबूत हुई है। सियासी पंडित उन्हें बंगाल में हिमंता बिस्वा सरमा की तरह स्थानीय चेहरा मान रहे हैं।
एग्जिट पोल में क्या कह रहे हैं?
अब तक आए विभिन्न एग्जिट पोल एजेंसियों ने बीजेपी को बहुमत से ज्यादा सीटें देने का अनुमान जताया है...
- न्यूज 18: बीजेपी 143-163, टीएमसी 127-147
- टुडेज चाणक्य: बीजेपी 192, टीएमसी 100
- पोल डायरी: बीजेपी 142-171, टीएमसी 99-127
- मैट्रिज: बीजेपी 146-161, टीएमसी 125-140
- पी-मार्क: बीजेपी 150-175, टीएमसी 118-138
हालांकि कुछ एजेंसियों ने टीएमसी को बढ़त दिखाई है, लेकिन ज्यादातर सर्वे बीजेपी की सरकार बनाने की ओर इशारा कर रहे हैं।
बीजेपी बाहर से आए नेताओं को देती है मौका
बीजेपी का इतिहास दिखाता है कि वह बड़े जनाधार वाले नेताओं को बाहर से लाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने से परहेज नहीं करती। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, अरुणाचल के पेमा खांडू, मणिपुर के एन. बीरेन सिंह और त्रिपुरा के माणिक साहा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और मुख्यमंत्री बने। बिहार में सम्राट चौधरी भी इसी श्रेणी में आते हैं।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी टीएमसी की आंतरिक कमजोरियों को अच्छी तरह जानते हैं और हिंदू ध्रुवीकरण में उनकी भूमिका अहम रही है। अगर बीजेपी सरकार बनाती है तो शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना सबसे प्रबल मानी जा रही है। लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि संभव है कि बीजेपी यहां पर भी चौंकाने वाला फैसला ले सकती है। ऐसे में अभी कयास ही लगाया जा सकता है।




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