rahul gandhi kolkata rally permission denied congress slams mamata banerjee tmc 'ममता की जागीर नहीं है बंगाल', राहुल गांधी की रैली को नहीं मिली इजाजत; भड़की कांग्रेस, West-bengal Hindi News - Hindustan
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'ममता की जागीर नहीं है बंगाल', राहुल गांधी की रैली को नहीं मिली इजाजत; भड़की कांग्रेस

बंगाल चुनाव से पहले राहुल गांधी की रैली को प्रशासन ने इजाजत नहीं दी है। कांग्रेस ने इसे ममता बनर्जी सरकार की घबराहट और 'राजनीतिक असुरक्षा' बताया है। वहीं, टीएमसी ने चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया है।

Wed, 22 April 2026 02:44 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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'ममता की जागीर नहीं है बंगाल', राहुल गांधी की रैली को नहीं मिली इजाजत; भड़की कांग्रेस

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर जमकर निशाना साधा, क्योंकि कोलकाता में राहुल गांधी की एक चुनावी रैली को प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दी गई।

समाचार एजेंसी ANI के हवाले से कांग्रेस सूत्रों ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन और विशेष रूप से पुलिस पूरी तरह से ममता बनर्जी सरकार के इशारे पर काम कर रही है। पार्टी का कहना है कि उन्होंने अनुमति के लिए शाम 6:00 बजे तक इंतजार किया। लेकिन इजाजत न मिलने के कारण अंत समय में रैली की तैयारियां करना संभव नहीं रह गया था।

नई तारीखों का प्रस्ताव

कांग्रेस अब 25 या 26 अप्रैल के लिए प्रशासन के सामने एक नया आवेदन और संशोधित कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने दावा किया कि मालदा और मुर्शिदाबाद में राहुल गांधी की रैलियों में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर टीएमसी और भाजपा दोनों 'घबरा' गए हैं। इसी बौखलाहट में अब रैलियों के लिए जगह की अनुमति भी नहीं दी जा रही है।

सोशल मीडिया (X) पर कांग्रेस का प्रहार

कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर कड़े शब्दों में लिखा: बंगाल ममता बनर्जी या टीएमसी की निजी जागीर नहीं है! राहुल गांधी के चुनाव प्रचार दौरे को रोकना प्रशासन की आड़ में छिपी उनकी राजनीतिक असुरक्षा है। अगर आपका जनादेश इतना मजबूत है, तो एक जनसभा से कैसा डर? बंगाल असली लोकतंत्र का हकदार है, पुलिस द्वारा नियंत्रित राजनीति का नहीं।

टीएमसी का पलटवार और स्पष्टीकरण

पश्चिम बंगाल की मंत्री और टीएमसी नेता शशि पांजा ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया और प्रशासनिक नियमों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो चुकी है। ऐसे में राज्य की 'कार्यवाहक सरकार' किसी भी रैली के रद्द होने के लिए जवाबदेह नहीं है। इसका जवाब चुनाव आयोग ही दे सकता है।

पांजा ने स्पष्ट किया कि किसी भी जनसभा की अनुमति के लिए चुनाव आयोग के 'सुविधा पोर्टल' के माध्यम से आवेदन करना होता है और यह प्रक्रिया रैली से 2 से 7 दिन पहले पूरी करनी होती है। यह नियम सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होता है।

पश्चिम बंगाल चुनाव का राजनीतिक समीकरण

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में एक बेहद कड़ा और हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबला देखने को मिल रहा है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन कर सरकार बनाने की जुगत में है। कांग्रेस भी यहां टीएमसी के खिलाफ चुनाव लड़ रही है।

त्रिकोणीय मुकाबले की कोशिश

2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का राज्य में सूपड़ा साफ हो गया था यानी शून्य सीटें। इस बार पार्टी टीएमसी और भाजपा के बीच चल रहे इस सीधे (द्विपक्षीय) मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस बार दो चरणों में मतदान होना है। पहले चरण की वोटिंग कल 23 अप्रैल और दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। वोटों की गिनती 4 मई को होगी।