Why is unseasonal rain occurring in March and April IMD predicts rain in these states aaj ka mausam मार्च-अप्रैल में क्यों हो रही है बेमौसम बारिश? IMD ने कहा- इन राज्यों में बरसते रहेंगे बादल, Weather Hindi News - Hindustan
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मार्च-अप्रैल में क्यों हो रही है बेमौसम बारिश? IMD ने कहा- इन राज्यों में बरसते रहेंगे बादल

Aaj ka Mausam: जब ये पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में पहुंचते हैं, तो वे निचले वायुमंडल में एक चक्रवाती परिसंचरण पैदा करते हैं। इसी दौरान, दक्षिण की ओर से आने वाली नम हवाएं इनके साथ मिल जाती हैं।

Fri, 3 April 2026 10:15 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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मार्च-अप्रैल में क्यों हो रही है बेमौसम बारिश? IMD ने कहा- इन राज्यों में बरसते रहेंगे बादल

Weather Updates: आमतौर पर मार्च और अप्रैल का महीना भारत में गर्मी की शुरुआत और 'लू' (Heatwave) के आगमन का समय होता है। लेकिन इस वर्ष नजारा बिल्कुल अलग है। देश के उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य और पूर्वी हिस्सों तक गरज के साथ छींटें, तेज हवाएं और ओलावृष्टि देखी जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसके पीछे कई जटिल मौसमी प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने को जिम्मेदार ठहराया है।

सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ

इस बेमौसम बारिश का सबसे बड़ा कारण पश्चिमी विक्षोभ की लगातार सक्रियता है। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले कम दबाव के तूफान हैं, जो सर्दियों में भारत में बारिश लाते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में एक के बाद एक कई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में दाखिल हुए हैं। ये विक्षोभ न केवल हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी कर रहे हैं, बल्कि मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं और नमी का संचार भी कर रहे हैं।

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में नमी

जब ये पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में पहुंचते हैं, तो वे निचले वायुमंडल में एक चक्रवाती परिसंचरण पैदा करते हैं। इसी दौरान, दक्षिण की ओर से आने वाली नम हवाएं इनके साथ मिल जाती हैं। जब ठंडी और गर्म-नम हवाओं का मिलन होता है, तो वायुमंडल में अस्थिरता पैदा होती है, जिससे गरज-चमक के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनती है।

'ला नीना' से न्यूट्रल स्थिति

IMD के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ENSO की स्थिति भी बदलाव के दौर में है। वर्तमान में 'ला नीना' की स्थिति कमजोर हो रही है और मौसम 'न्यूट्रल' स्थिति की ओर बढ़ रहा है। इस संक्रमण काल के दौरान अक्सर प्री-मानसून गतिविधियां सामान्य से अधिक तीव्र और अनिश्चित हो जाती हैं।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण वायुमंडल की नमी सोखने की क्षमता बढ़ गई है। इससे पश्चिमी विक्षोभों के व्यवहार में बदलाव आया है। अब ये विक्षोभ सर्दियों के बाद भी तीव्र बने रहते हैं, जिससे अप्रैल जैसे महीनों में भी भीषण ठंड और बारिश का अहसास होता है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-NCR में धूल भरी आंधी और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है, जहां बिजली गिरने की संभावना अधिक है।

आपको बता दें कि यह समय रबी की फसलों (जैसे गेहूं, सरसों) की कटाई का होता है। बेमौसम बारिश और ओलों ने तैयार फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

IMD ने भविष्यवाणी की है कि अप्रैल के मध्य तक मौसम में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इस बारिश से भीषण गर्मी और हीटवेव से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन कृषि और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और आंधी-तूफान के दौरान ऊंचे पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।

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