यूपी से लेकर दिल्ली-NCR तक लू का अलर्ट, इन राज्यों में कब पहुंचेगा मॉनसून; IMD ने बताया
IMD ने यह भी बताया कि अगले तीन-चार दिनों में मॉनसून के दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं।

Monsoon Rain Updates: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने शनिवार को दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, अंडमान सागर और पूरे निकोबार द्वीप समूह में दस्तक दे दी है। वहीं दूसरी तरफ यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में इस सप्ताह 22 मई तक भीषण लू चलने का अलर्ट जारी किया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, वर्तमान में मौसमी परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। अगले तीन से चार दिनों के भीतर मॉनसून के दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के कुछ और हिस्सों, बंगाल की खाड़ी के शेष इलाकों और अंडमान सागर के बचे हुए हिस्सों में आगे बढ़ने की प्रबल संभावना है। वहीं, उत्तर प्रदेश में आगामी पांच दिनों तक मौसम शुष्क बने रहने के आसार हैं।
आईएमडी ने पश्चिम राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में अगले एक सप्ताह तक लू और भीषण लू चलने की चेतावनी दी है। राजस्थान में 21 और 22 मई को भीषण लू की संभावना है, जबकि उत्तर प्रदेश में 19 से 22 मई के बीच गर्मी और अधिक बढ़ सकती है। राजस्थान में तापमान एक बार फिर बढ़ेगा। पश्चिमी राजस्थान में तीव्र गर्मी का दौर शुरू होगा।
आईएमडी ने यह भी बताया कि अगले तीन-चार दिनों में मॉनसून के दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। अंडमान द्वीप समूह और अंडमान सागर के शेष हिस्सों के साथ-साथ पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में भी इस दौरान मॉनसून का आगमन हो सकता है। आईएमडी ने कहा, ''क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए सभी मानदंड पूरे हो रहे हैं।'' मौसम विभाग ने शुक्रवार को कहा था कि केरल में 26 मई की सुबह दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आने की संभावना है।
आपको बता दें कि केरल में मॉनसून की शुरुआत आमतौर पर एक जून को होती है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम (जून से सितंबर) का आरंभ होता है।
क्या होता है अल नीनो
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है। यह तब होता है, जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इस तापमान में वृद्धि के कारण पूरे वायुमंडल में हवा के पैटर्न बदल जाते हैं। इससे कुछ हिस्सों में भीषण सूखा और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ती है। कहीं बाढ़ आ जाती है।
आपको बता दें कि अल नीनो हर 2 से 7 साल में आता है और 9-12 महीने तक इसका प्रभाव रहता है। इसके प्रभाव की तीव्रता इस बात से मापी जाती है कि प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से कितना अधिक गर्म हुआ है। जब तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री तक रहता है तो कमजोर अल नीनो होता है। यदि 2 डिग्री से अधिक बढ़ता है तो सुपर अल नीनो की स्थिति होती है। नई रिपोर्ट में तापमान वृद्धि की बात कही गई है।
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