IMD Weather Forecast Monsoon and Rain Updates for year 2026 Monsoon kaisa rahega इस साल कैसा रहेगा मॉनसून, किन इलाकों में कितनी बारिश? मौसम एजेंसी ने सब बताया, Weather Hindi News - Hindustan
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इस साल कैसा रहेगा मॉनसून, किन इलाकों में कितनी बारिश? मौसम एजेंसी ने सब बताया

जुलाई और अगस्त के महीने चावल, दालों और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इन महीनों में बारिश कम होती है, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

Wed, 8 April 2026 10:23 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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इस साल कैसा रहेगा मॉनसून, किन इलाकों में कितनी बारिश? मौसम एजेंसी ने सब बताया

Monsoon Forecast: भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है। यही वजह है कि किसान से लेकर सरकार तक की निगाहें मॉनसून पर टिकी होती हैं। इस बीच मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) की भविष्यवाणी सबकी चिंता बढ़ा सकती है। एजेंसी का कहना है कि इस साल मॉनसून सामान्य से कम रहने की आशंका है। जून से सितंबर के दौरान दीर्घावधि औसत (LPA) की केवल 94% बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। इस गिरावट का मुख्य कारण अल-नीनो का मजबूत होना बताया जा रहा है, जो अक्सर भारतीय मॉनसून को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

स्काईमेट के अनुसार, इस सीजन में कुल वर्षा लगभग 817 मिमी रहने की संभावना है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि 30% संभावना है कि देश को सूखे का सामना करना पड़ सकता है। 40% संभावना है कि बारिश सामान्य से कम रहे। केवल 10% ही संभावना है कि मॉनसून सामान्य रहेगी।

सितंबर में मॉनसून की विदाई

मॉनसून का वितरण इस साल किसानों की चिंता बढ़ा सकता है। आंकड़ों के अनुसार, केवल जून का महीना राहत भरा हो सकता है। जून में मॉनसून की शुरुआत सामान्य रहने की उम्मीद है, विशेषकर गंगा के मैदानी इलाकों और पश्चिमी घाटों में खूब बारिश होगी। जुलाई में मुख्य बुवाई का महीना होता है। इसमें बारिश में कमी आने लगेगी। अगस्त तक जाते-जाते बारिश में गिरावट और तेज होगी, जिससे खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है। सितंबर में मॉनसून की विदाई होगी। इस समय उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में सूखा रहने की संभावना 79% तक है।

जुलाई और अगस्त के महीने चावल, दालों और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इन महीनों में बारिश कम होती है, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। स्काईमेट वेदर सर्विसेज के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने कहा, "इस साल ग्रामीण क्षेत्रों में संकट की प्रबल संभावना है। यदि मॉनसून कमजोर रहता है, तो न केवल खेती बल्कि बिजली क्षेत्र पर भी भारी दबाव रहेगा।"

कम बारिश से अर्थव्यवस्था पर असर

कम बारिश का मतलब है, कम पैदावार, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल आ सकता है। भारत की एक बड़ी आबादी आज भी सिंचाई के लिए पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर है। ऐसे में बारिश की कमी ग्रामीण आय को घटा सकती है, जिससे देश की कुल आर्थिक वृद्धि (GDP) पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

कहां पड़ेगी सबसे ज्यादा मार?

उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में जुलाई से अगस्त के बीच इन क्षेत्रों में बारिश की भारी कमी देखी जा सकती है। दक्षिण और पूर्वी भारत में सितंबर में केवल इन्हीं कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश की उम्मीद है, जबकि बाकी देश शुष्क रह सकता है।

अब सबकी नजरें भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भविष्यवाणी पर टिकी हैं। इसी महीने के अंत में जारी होने की उम्मीद है। मॉनसून के साथ-साथ आने वाले समय में उत्तर-पूर्वी मॉनसून (अक्टूबर-दिसंबर) और सर्दियों की बारिश की भूमिका रबी फसलों (जैसे गेहूं) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाएगी।

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