Workers doing work in Factory wearing Cameras Social Media buzz on AI सिर पर कैमरा, काम की रिकॉर्डिंग; कंपनी के कर्मचारियों के वीडियो पर छिड़ी बहस, Viral-news Hindi News - Hindustan
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सिर पर कैमरा, काम की रिकॉर्डिंग; कंपनी के कर्मचारियों के वीडियो पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया पर एक फैक्ट्री का वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नजर आ रहा है कि फैक्ट्री के कर्मचारी अपने सिर पर कैमरा लगाए हुए काम कर रहे हैं। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस छिड़ गई है।

Mon, 13 April 2026 08:01 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सिर पर कैमरा, काम की रिकॉर्डिंग; कंपनी के कर्मचारियों के वीडियो पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया पर एक फैक्ट्री का वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नजर आ रहा है कि फैक्ट्री के कर्मचारी अपने सिर पर कैमरा लगाए हुए काम कर रहे हैं। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस छिड़ गई है। लोग इसे भविष्य में नौकरियों के लिए खतरा बता रहे हैं। वीडियो में पहले तो नजर आ रहा है कि लंबी लाइनों में बैठे कर्मचारी किसी कपड़े की फैक्ट्री में सिलाई कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही नजर उनके माथे पर लगे छोटे कैमरों पर जाती है, पूरी कहानी बदल जाती है। असल में यह कोई लैब एक्सपेरिमेंट नहीं है, बल्कि फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों पर रियल टाइम में किया जा रहा प्रयोग है।

सोशल मीडिया पर अलग-अलग थियरी
कर्मचारियों के सिर पर लगे कैमरे उनके काम की एक-एक एक्टिविटी दर्ज हो रही है। इसी को लेकर लोग हैरानी जता रहे हैं कि आखिर कंपनी इन एक्टिविटीज को रिकॉर्ड करके क्या करना चाहती है। हालांकि वीडियो में यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कहां का है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर अलग-अलग थियरी चल रही हैं। एक थियरी में कहा जा रहा है कि कर्मचारियों के सिर पर लगे कैमरों से दर्ज वीडियो से एआई की ट्रेनिंग दी जा रही है। ऐसी बातें इसलिए कही जा रही हैं क्योंकि कैमरों में कर्मचारियों का पूरा काम बारीकी के साथ रिकॉर्ड हो रहा है। इसमें उनके हाथों का मूवमेंट, हैंड आई को-ऑर्डिनेशन और वो टास्क को कैसे अंजाम दे रहे हैं यह सब। इसके जरिए मशीनों के लिए एक बड़ा डेटाबेस तैयार हो रहा है।

कहीं, रोबोट्स को ट्रेनिंग देना तो मकसद नहीं
अनुमान लगाया जा रहा है कि महंगे मोशन-कैप्चर टूल्स की जगह, कंपनी इस ह्यूमन आई व्यू से रोबोट्स को सिखाने की कोशिश की जाएगी। अगर यह बातें सही साबित होती हैं तो पूरा नजरिया ही बदल जाएगा। असल में जो आज किसी चीज को डॉक्यूमेंट करने की एक कोशिश नजर आ रही है, वह कल की तारीख में एआई ट्रेनिंग का टूल साबित हो सकता है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि हो सकता है कि इन कर्मचारियों को यह पता ही न हो कि यह सब क्यों हो रहा है। शायद उन्हें यह अंदाजा न हो कि आने वाले वक्त में इसका इस्तेमाल कैसे हो सकता है।

कुछ लोग पक्ष में भी दे रहे तर्क
वहीं, कुछ अन्य लोग अलग तर्क दे रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि यह तकनीक में बदलाव की एक नया चरण हो सकता है। असल में इंडस्ट्रीज तेजी से बदल रही हैं और ऑटोमेशन पिछले कई साल से इस यात्रा का हिस्सा है। ऐसे में अगर इस प्रक्रिया को रोका जाता है तो यह प्रैक्टिकली ठीक नहीं होगा। तर्क यह भी है कि इससे बेहतर होगा कि कर्मचारी एडजस्ट करें और नई स्किल्स सीखने पर ध्यान दें। टेक्नोलॉजी के खिलाफ जाने के बजाए उन्हें इसके साथ काम करने पर ध्यान देना होगा। तभी वह भविष्य में सर्वाइव कर पाएंगे।

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