उत्तराखंड में टनकपुर के 20 गांवों में जमीन की खरीद बिक्री पर रोक, क्या वजह?
उत्तराखंड के चंपावत जिला प्रशासन ने एनएच-125 के 4 लेन चौड़ीकरण परियोजना के मद्देनजर टनकपुर क्षेत्र के 20 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगा दी है।

उत्तराखंड के चंपावत जिला प्रशासन ने टनकपुर क्षेत्र के 20 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगा दी है। सितारगंज से टनकपुर के बीच एनएच-125 के चार लेन चौड़ीकरण परियोजना के मद्देनजर उक्त आदेश जारी किया गया है। इस सड़क निर्माण के लिए जल्द ही जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके तहत गांवों में जमीन के स्वरूप में बदलाव और बैनामे को प्रतिबंधित किया गया है।
जमीन की खरीद बिक्री पर रोक
चंपावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार ने सोमवार को बताया कि जिला प्रशासन ने नेशनल हाईवे-125 के चौड़ीकरण को देखते हुए टनकपुर के 20 गांवों में जमीन की खरीद बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से एनएच-125 के सितारगंज से टनकपुर अनुभाग के बीच चार लेन चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है।
लैंड यूज बदलने पर भी रोक
इस महत्वपूर्ण योजना के लिए जल्द ही जमीन लेने का काम शुरू किया जाएगा। इस योजना को देखते हुए चंपावत जिले के टनकपुर क्षेत्र के 20 गांवों में जमीन खरीदने और बेचने रजिस्ट्री और जमीन के प्रकार को बदलने पर तुरंत रोक लगा दी गई है।
ये गांव शामिल
प्रभावित गांवों में पचकरिया, देवीपुरा, बनबसा, बमनपुरी, आनंदपुर, भजनपुर, चंदनी, विचई, मोहनपुर, छीनीगोठ, छीनी मल्ली, नायकखेड़ा, कछुवापाती, सैलानीगोठ, बगदौराखास, देवरामपुर उर्फ सीतापुर, बगदौराहंसी, मनिहारगोठ, ज्ञानखेड़ा और टनकपुर शामिल हैं।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
चंपावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार ने साफ किया कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में यदि किसी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित शख्स अथवा अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जमीन संबंधी किसी भी मामले से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
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