Uttarakhand Cabinet Big Decisions Costlier Homes Cheaper Liquor and Easier Travel उत्तराखंड में घर बनाना महंगा, शराब सस्ती और सफर आसान; धामी सरकार के बड़े फैसले, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
More

उत्तराखंड में घर बनाना महंगा, शराब सस्ती और सफर आसान; धामी सरकार के बड़े फैसले

Uttarakhand Cabinet Big Decisions: पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कैबिनेट में कई अहम फैसले लिए। घर बनाना अब थोड़ा महंगा पड़ेगा। शराब से वैट कम कर लिया है तो सस्ती मिलेगी। सफर आसान होगा। एक नजर सभी फैसलों पर

Fri, 1 May 2026 07:22 AMGaurav Kala देहरादून
share
उत्तराखंड में घर बनाना महंगा, शराब सस्ती और सफर आसान; धामी सरकार के बड़े फैसले

उत्तराखंड में आम आदमी के लिए घर बनाना अब महंगा होने वाला है जबकि रोडवेज की बसों से सफर सुविधाजनक होगा। राज्य सरकार ने खनन सामग्री पर रॉयल्टी बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे रेत, बजरी की कीमतों में इजाफा होना तय है। ये निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।

कैबिनेट बैठक के बाद सचिव (गोपन) शैलेश बगौली ने सचिवालय के मीडिया सेंटर में निर्णयों के संबंध में जानकारी दी। बगौली ने बताया कि कैबिनेट ने कुल 17 प्रस्तावों पर निर्णय लिया। इनमें औद्योगिक विकास विभाग के तहत उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली 2023 में संशोधन को मंजूरी देते हुए खनन सामग्री पर राॅयल्टी एक रुपये प्रति कुंतल बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे रॉयल्टी की दर सात रुपये प्रति कुंतल से अब आठ रुपये प्रति कुंतल हो जाएगी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:धामी कैबिनेट के फैसले; मदरसों के लिए नए नियम, पूर्व सैनिकों को मुफ्त कानूनी मदद

मदरसों में कक्षा आठ तक जिलों से मिलेगी मंजूरी

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 के प्रावधानों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। पहले कक्षा एक से बारह तक विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता ली जानी थी। अब नई व्यवस्था में कक्षा एक से आठ तक जिलास्तरीय शिक्षा समिति से संबद्धता दी जाएगी। कक्षा नौ से 12 तक के संचालन को विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेनी होगी। वर्तमान में राज्य में 452 मदरसे हैं। इनमें 400 से अधिक मदरसों में कक्षा एक से आठ तक की ही पढ़ाई कराई जाती है। कैबिनेट ने अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में अध्यादेश लाने को मंजूरी दी।

देहरादून में पार्षदों को प्रति माह 25 हजार रुपये भत्ता

देहरादून के पार्षदों को भत्ते के रूप में 25 हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रस्ताव गुरुवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक में पास हो गया। ये व्यवस्था एक जून से लागू होगी। देहरादून के पार्षद वर्षों से मानदेय की मांग कर रहे थे। नगर निगम की चार बोर्ड बैठकों में इस संबंध में प्रस्ताव रखा गया पर उसे बोर्ड का अनुमोदन नहीं मिला। बुधवार को फिर बोर्ड में मानदेय के संबंध में प्रस्ताव रखा गया जिसका सभी पार्षदों ने समर्थन किया।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:देहरादून: सेलाकुई में अकबर कॉलोनी अब श्री राम एन्क्लेव, कई इलाकों के बदलेंगे नाम

अफसरों ने निगम पर सालाना तीन करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ने का तथ्य रखते हुए टालने की कोशिश की। इस पर पार्षदों ने हंगामा किया। मामले में मेयर सौरभ थपलियाल ने पार्षदों की सहमति से समिति बनाकर रिपोर्ट मांगी। समिति की रिपोर्ट में ईंधन, स्टेशनरी,ऑफिस समेत छोटे-मोटे खर्च के लिए 25 रुपये प्रतिमाह भत्ता देने की सिफारिश की गई। इस संस्तुति के साथ प्रस्ताव फिर बैठक में रखा गया। बोर्ड बैठक के दूसरे दिन प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मेयर ने इसे मंजूरी दे दी।

सरकार ने आधा किया वैट अब सस्ती हो जाएगी शराब

धामी कैबिनेट ने शराब पर वैट (मूल्य वर्धित कर) की दर 12 से घटाकर छह प्रतिशत करने को मंजूरी दे दी। इससे शराब की कीमतों में कमी आ सकती है। शराब पर वैट को लेकर आबकारी और वाणिज्य कर विभाग में विसंगति थी। आबकारी नीति में पहले से ही 6% वैट का प्रावधान था। वाणिज्य कर की नियमावली में तकनीकी तालमेल नहीं था। लिहाजा, गुरुवार को कैबिनेट ने आबकारी नीति के अनुरूप ही वाणिज्य कर विभाग के नियमों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। फैसला पड़ोसी राज्यों में शराब की कीमतों को ध्यान में रखते हुए भी लिया है। इससे न केवल कीमतों में संतुलन आएगा, बल्कि सीमा क्षेत्रों में होने वाली शराब तस्करी पर भी कुछ हद तक रोक लग सकेगी।

छोटे ठेकेदारों को अब डेढ़ करोड़ तक के काम मिल सकेंगे

उत्तराखंड में छोटे ठेकेदारों को बड़ा अवसर देने की दिशा में धामी सरकार ने अहम फैसला लिया है। अब डी-श्रेणी के ठेकेदारों को डेढ़ करोड़ तक के ठेके मिल सकेंगे। वित्त विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी देते हुए नियमों में संशोधन कर दिया है।

सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में गुरुवार को कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए सचिव-गोपन शैलेश बगौली ने बताया कि अभी तक डी श्रेणी के ठेकेदार एक करोड़ तक के ठेके के लिए ही पात्र थे। इससे बड़े टेंडरों में वह भाग नहीं ले पाते थे, जिस कारण स्थानीय स्तर पर ठेके मिलने में दिक्कतें आ रही थीं। ठेकेदार संघ लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाने की मांग उठा रहा था। अब कैबिनेट के फैसले के बाद डी श्रेणी के ठेकेदार डेढ़ करोड़ तक के टेंडरों में भाग ले सकेंगे।

बड़े ठेकेदारों पर निर्भरता होगी खत्म: इस निर्णय से छोटे ठेकेदारों को बड़ी राहत मिल सकेगी। अब उनको बड़े काम पाने के लिए बड़े ठेकेदारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जबकि, पहले एक करोड़ से थोड़ा अधिक लागत के काम भी उनकी पहुंच से बाहर हो जाते थे, जिस वजह से उनको सबलेटिंग का इंतजार करना पड़ता था। लेकिन, अब ठेके की सीमा बढ़ने से क्षेत्रीय विकास को भी रफ्तार मिल सकेगी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:उत्तराखंड का चर्चित उद्यान घोटाला, 22 महीने बाद CBI ने केस चलाने की मंजूरी मांगी

उत्तराखंड में 15 हजार के करीब छोटे ठेकेदार

उत्तराखंड के विभिन्न विभागों में मौजूदा समय में डी श्रेणी के करीब 15 हजार ठेकेदार पंजीकृत हैं। लोक निर्माण विभाग में सबसे अधिक करीब 7 हजार ठेकेदार इस श्रेणी में आते हैं। सिंचाई, लघु सिंचाई, ग्रामीण निर्माण विभाग, पेयजल निगम, जल संस्थान और यूपीसीएल में भी बड़ी संख्या में डी श्रेणी के ठेकेदार हैं।

अशासकीय कॉलेजों में भी शोध को बढ़ावा मिलेगा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब 21 अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों में भी ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना’ लागू की जाएगी। धामी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को इस शर्त के साथ मंजूरी दी है कि ऐसे महाविद्यालयों में पूर्णकालिक प्राचार्यों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इससे निजी सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

उत्तराखंड रोडवेज के बेड़े से जल्द जुड़ेंगी 259 नई बसें

कुंभ से पहले उत्तराखंड रोडवेज अपने बेड़े का विस्तार करने जा रहा है। मुसाफिरों की बढ़ती संख्या और यात्री सुविधा में सुधार के उद्देश्य से रोडवेज अब 259 नई बसें खरीदेगा। गुरुवार को धामी कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

इसके तहत 200 बसें मैदानी, जबकि 59 बसें पहाड़ी रूट पर चलाई जाएंगी। वर्तमान में रोडवेज के पास करीब 1450 बसें हैं। नई बसें शामिल होने के बाद यह संख्या 1700 हो जाएगी। नई बसों की खरीद प्रक्रिया में दिलचस्प पहलू यह भी है कि रोडवेज में शामिल होने वाली नौ बसें बीते वर्ष की बची हुई जीएसटी राशि से खरीदी जाएंगी। बता दें कि, पर्यटन और त्योहारी सीजन में दबाव के चलते बसें अक्सर कम पड़ जाती हैं। गुरुवार को जीएम (संचालन) क्रांति सिंह ने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि दीवाली से पहले नई बसें डिपो तक पहुंच जाएं।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।