उत्तराखंड में UP जैसा कानून, लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण पर उम्रकैद; क्या-क्या नए बदलाव
उत्तराखंड की धामी सरकार जबरन धर्मांतरण में यूपी के कानून का अनुसरण करते हुए मौजूदा कानून को और सख्त करने जा रही है। प्रस्ताव पास हो चुका है और 19 अगस्त से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र में इसे सदन में पेश किया जाएगा।

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने यूपी मॉडल का अनुसरण करते हुए लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर ली है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अब ऐसे मामलों में 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और जुर्माने की धाराएं शामिल होंगी। इस कानून में धर्मांतरण की परिभाषा, डिजिटल माध्यमों से धर्मांतरण, छिपाकर विवाह और ट्रैफिकिंग जैसी गतिविधियों को दंडनीय बनाने के लिए कई नए और सख्त बदलाव किए गए हैं।
उत्तराखंड कैबिनेट ने 12 अगस्त को राज्य में जबरन धर्मांतरण रोकने वाले कानून को और कड़ा करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस प्रस्तावित धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) बिल, 2025 में जेल की अवधि बढ़ाने और “धर्मांतरण” की परिभाषा को विस्तारित करने जैसे महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। यह बिल मॉनसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश किया जाएगा। सत्र 19 अगस्त से भराड़ी सैंड में शुरू हो रहा है।
जबरन धर्मांतरण पर सरकार की चिंता
सरकार का दावा है कि राज्य में धार्मिक धर्मांतरण बढ़े हैं, खासकर महिलाओं के मामलों में। भाजपा अक्सर “लव जिहाद” शब्द का इस्तेमाल करती रही है। हाल ही में अलग धर्म के लोगों द्वारा विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह करने वाले जोड़ों को धमकियां और विरोध का सामना करना पड़ा।
बिल में मुख्य बदलाव
बिल में अब धर्मांतरण की परिभाषा को और व्यापक बनाया गया है। किसी भी व्यक्ति को डिजिटल माध्यमों जैसे ईमेल, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए धर्मांतरण कराने के लिए उकसाना या साजिश करना अब अपराध माना जाएगा। साथ ही, किसी धर्म की प्रथाओं या समारोहों की तुलना करके दूसरों का अपमान करना या किसी धर्म की महिमा बढ़ाकर दूसरे धर्म के खिलाफ प्रचार करना भी दंडनीय होगा।
छुपाकर विवाह करना दंडनीय
यदि कोई व्यक्ति विवाह के लिए धर्म छुपाता है, तो 3 से 10 साल की जेल और 3 लाख रुपये जुर्माने की सजा होगी। अब पीड़ित वह भी होगा जिसने अपराध के कारण कोई चोट या नुकसान उठाया हो। इसमें व्यक्ति के अभिभावक और कानूनी उत्तराधिकारी भी शामिल हैं। यदि धर्मांतरण अपराध से संपत्ति अर्जित की गई, तो जिला मजिस्ट्रेट इसे जब्त कर सकता है। आरोपी पर दोष सिद्ध करने का बोझ होगा।
सजा में वृद्धि
पहले 2018 के कानून में जबरन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण पर 5 साल तक की जेल का प्रावधान था। 2022 में यह 2 से 10 साल तक और न्यूनतम जुर्माना 25,000 रुपये किया गया। अब 2025 संशोधन के तहत- सामान्य अपराध में 3–10 साल जेल और 50,000 रुपये जुर्माना। पीड़ित यदि महिला, बच्चा, SC/ST या विकलांग हो तो अपराधी को 5–14 साल जेल + न्यूनतम 1 लाख जुर्माने की सजा। जबरन विवाह या ट्रैफिकिंग के जरिए धर्मांतरण पर 20 साल से आजीवन कारावास और पीड़ित की चिकित्सा और पुनर्वास का खर्च।
विदेशी फंडिंग के मामले में कड़ी कार्रवाई
विदेशी या प्रतिबंधित फंडिंग से जुड़ा अपराध: 7–14 साल सख्त कारावास और कम से कम 10 लाख जुर्माना। 2022 में पीड़ित या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा एफआईआर दर्ज की जा सकती है। धर्मांतरण के 60 दिन के अंदर जिला मजिस्ट्रेट को विवरण देना अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी लगभग 14% है। भाजपा ने अक्सर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया है। राज्य ने हाल ही में UCC लागू किया और कृषि भूमि पर “बाहरी लोगों” के लिए पाबंदियां लगाई हैं। कई अवैध मदरसों पर कार्रवाई भी हुई है।
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