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उत्तराखंड: दिव्यांग कोटे से भर्ती 234 लेक्चरर्स की होगी मेडिकल जांच, क्या आरोप?

उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने दिव्यांग कोटे से नियुक्त सभी 234 व्याख्याताओं की मेडिकल जांच का निर्णय लिया है। फर्जीवाड़े के आरोपों के कारण 7 मार्च से 2 अप्रैल तक एम्स-ऋषिकेश में इनका स्वास्थ्य परीक्षण होगा। 

Fri, 6 March 2026 09:13 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून
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उत्तराखंड: दिव्यांग कोटे से भर्ती 234 लेक्चरर्स की होगी मेडिकल जांच, क्या आरोप?

उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने दिव्यांग कोटे से नियुक्त सभी 234 व्याख्याताओं की पात्रता की जांच करने का निर्णय लिया है। फर्जी प्रमाण-पत्र के आरोपों के बाद हाईकोर्ट में दायर याचिका के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। इन सभी शिक्षकों का स्वास्थ्य परीक्षण 7 मार्च से 2 अप्रैल के बीच ऋषिकेश एम्स में होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिक्षक निर्धारित समय पर जांच के लिए नहीं पहुंचा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई निश्चित है।

234 लेक्चरर्स का होगा मेडिकल टेस्ट

एक अधिकारी ने बताया कि शिक्षा विभाग ने राज्य गठन के बाद से दिव्यांग कोटे से नियुक्ति पाने वाले सभी 234 व्याख्याताओं (लेक्चरर्स) का मेडिकल परीक्षण कराने का निर्णय लिया है। यह परीक्षण अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में कराई जाएगी।

मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पत्र

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने इस संबंध में उत्तराखंड के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर जरूरी निर्देश दिए हैं।

दो अप्रैल तक एम्स-ऋषिकेश में जांच

निर्देशों के अनुसार, दिव्यांग कोटे के तहत नियुक्त सभी 234 व्याख्याताओं का स्वास्थ्य परीक्षण सात मार्च से दो अप्रैल तक एम्स-ऋषिकेश में कराया जाएगा। जांच हफ्ते में 2 दिन हर गुरुवार और शनिवार को सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक होगी। एक दिन में 50 व्याख्याताओं की दिव्यांगता संबंधी जांच की जाएगी।

विभाग लेगा ऐक्शन

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्याख्याता निर्धारित अवधि में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मौजूद नहीं होता है तो उसके खिलाफ विभाग की ओर से एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। आदेश में कहा गया है कि मेडिकल जांच नहीं कराने वाले खुद जिम्मेदार होंगे।

फर्जी कागज पर नौकरी लेने का आरोप

आरोप है कि शिक्षा विभाग में कुछ लोगों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर व्याख्याता के पद पर नियुक्ति पाई है। इसके खिलाफ 'नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड' ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है।

क्या बोले मंत्री?

इसके बाद दिव्यांग कोटे से नौकरी पाने वाले सभी व्याख्याताओं की दिव्यांगता की जांच का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में प्रदेश के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि जब भी सरकार के संज्ञान में ऐसे प्रकरण आते हैं, उनकी जांच कराने के बाद उचित कार्रवाई की जाती है।

तैयारियां पूरीं

शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऋषिकेश एम्स के सहायक जनसंपर्क अधिकारी श्रीनॉय मोहंती ने बताया कि उत्तराखंड सरकार के अनुरोध पर स्वास्थ्य परीक्षण की सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। मूत्र रोग (यूरोलॉजी) विभाग के डॉ. मृत्युंजय कुमार को जांच पैनल का प्रमुख बनाया गया है।

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