अप्रैल से पहले नहीं मिल पाएंगे सिलेंडर! LPG संकट से कई गैस एजेंसियों पर ताला लगने की नौबत
गैस कंपनियों के नए नियमों ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अगर सालभर के कोटे के 12 सिलेंडर पूरे हो गए हैं तो अप्रैल से पहले नया सिलेंडर नहीं मिलेगा। देहरादून में हाल ये हैं कि बुकिंग के बाद भी नई गैस नहीं मिल पा रही।

देश में एलपीजी संकट गहराता जा रहा है। उत्तराखंड में भी घरेलू और कॉमर्शियल रसोई गैस की किल्लत ने विकराल रूप ले लिया है। यदि दो-तीन दिनों के भीतर आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो देहरादून शहर की कई गैस एजेंसियों पर ताले लटकने की नौबत आ जाएगी। गैस कंपनियों द्वारा नियमों में किए गए बदलावों ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यदि 12 सिलेंडर का कोटा पूरा हो चुका है तो अप्रैल से पहले नई गैस नहीं मिलेगी।
वर्तमान में मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के कारण शहर की एजेंसियों का कुल बैकलॉग 50 हजार के आंकड़े को पार कर गया है। जिले में घरेलू रसोई गैस के कुल 7.81 लाख कनेक्शन हैं, जिनकी सेवा के लिए 62 एजेंसियां कार्यरत हैं। सामान्य दिनों में शहर में रोजाना 18 हजार सिलेंडरों की खपत होती है, लेकिन इन दिनों केवल 11 हजार सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं।
बुकिंग के बाद भी डिलीवरी नहीं
इस भारी कमी के कारण स्थिति यह है कि कई एजेंसियां बुकिंग के एक सप्ताह बाद भी डिलीवरी नहीं दे पा रही हैं। लोग खाली सिलेंडर लेकर एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, 19 हजार कमर्शियल गैस उपभोक्ता हैं और रोजाना करीब 1700 सिलेंडरों की डिमांड रहती है। कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने से एजेंसियों ने होटलों और रेस्टोरेंटों को गैस देना बंद कर दिया है। वर्तमान में केवल अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को ही प्राथमिकता के आधार पर सीमित सप्लाई दी जा रही है।
12 सिलेंडर का कोटा पूरा, अप्रैल से पहले नहीं मिलेगी गैस
गैस कंपनियों द्वारा नियमों में किए गए बदलावों ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नियम के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में केवल 12 रियायती सिलेंडर ही मिलते हैं। पहले ई-केवाईसी करवाने पर उपभोक्ताओं को तीन अतिरिक्त सिलेंडर मिल जाते थे, लेकिन वर्तमान में यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस कारण वे लोग सबसे अधिक परेशान हैं जो 1 अप्रैल 2025 से अब तक अपने 12 सिलेंडरों का कोटा पूरा कर चुके हैं।
नए नियमों के बाद सख्ती
नए नियमों की सख्ती के चलते अब इन उपभोक्ताओं को अगला सिलेंडर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में ही मिल पाएगा। गैस की किल्लत और इन तकनीकी नियमों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
डीएसओ केके अग्रवाल का कहना है कि रसोई गैस का संकट है और हम बैकलॉग को कम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल कॉमर्शियल सप्लाई बंद है, इसलिए अस्पताल और शिक्षण संस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे, लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है।
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