Husband follows saint rampal not hindu devi devta wife seeks divorce uttarakhand high court suggests marital counselling हिंदू देवी-देवता नहीं, संत रामपाल को मानता है पति; तलाक के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंची पत्नी, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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हिंदू देवी-देवता नहीं, संत रामपाल को मानता है पति; तलाक के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंची पत्नी

 उत्तराखंड हाईकोर्ट में तलाक का एक अनोखा मामला पहुंचा है। एक महिला ने अपने पति से हिंदू रीति-रिवाजों का पालन नहीं करने के आधार पर मांगा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में दंपती को काउंसलिंग के जरिये आपसी सुलह की संभावनाएं तलाशने को कहा है।  

Sun, 2 Nov 2025 02:53 PMPraveen Sharma नैनीताल, भाषा
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हिंदू देवी-देवता नहीं, संत रामपाल को मानता है पति; तलाक के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंची पत्नी

उत्तराखंड हाईकोर्ट में तलाक का एक अनोखा मामला पहुंचा है। एक महिला ने अपने पति से हिंदू रीति-रिवाजों का पालन नहीं करने के आधार पर मांगा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में दंपती को काउंसलिंग के जरिये आपसी सुलह की संभावनाएं तलाशने को कहा है। महिला ने अपनी तलाक की याचिका में कहा है कि उसका पति और उसका परिवार स्वयंभू संत रामपाल को मानता है, इसलिए वे हिंदू नहीं हैं।

इससे पहले नैनीताल फैमिली कोर्ट ने महिला की वह अर्जी खारिज कर दी थी, जिसमें उसने अपने पति से तलाक मांगा था। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का रुख किया है।

जस्टिस रवींद्र मैठाणी और जस्टिस आलोक माहरा की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दंपती को सुलह की संभावनाएं तलाशने के लिए काउंसलिंग के लिए भेज दिया।

मामले के अनुसार, महिला ने अपने पति से इस आधार पर तलाक मांगा है कि उसका पति और उसका परिवार स्वयंभू संत रामपाल का अनुयायी है और वे हिंदू रीति-रिवाजों का पालन नहीं करते हैं।

महिला ने अपनी अर्जी में यह दावा किया कि उसके पति और उसके परिवार ने उस पर भी अपना हिंदू धर्म और रीति-रिवाजों को छोड़ने का दवाब बनाया। उसने कहा कि उसके पति के परिवार के सदस्यों ने उसके मंदिर को घर से हटा दिया था उसमें रखे देवी-देवताओं की मूर्तियों को कपड़े में बांधकर घर से बाहर रख दिया था।

उसने कहा कि वह एक धार्मिक महिला है और हिंदू धर्म उसके लिए जीने का तरीका है। वह बहुत श्रद्धा से हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करती है। इस कारण उसके लिए अपने पति के साथ रहना संभव नहीं है।

महिला ने कहा कि वह अपने पति से तलाक चाहती है क्योंकि उसने यह कहते हुए अपने बेटे का 'नामकरण संस्कार' करने से मना कर दिया था कि उसका "आध्यात्मिक गुरु" इस रीति-रिवाज को नहीं मानता।

हाईकोर्ट ने दंपती के 7 वर्षीय बेटे के भविष्य की सुरक्षा के लिए उन्हें सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावना तलाशने हेतु काउंसलिंग के लिए भेज दिया।

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