बेटे की चाहत में हैवानियत! पत्नी को बेरहमी से पीटने के बाद करंट लगाया; गर्भ में बच्ची की मौत
देहरादून में पति ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी। पत्नी को लात-घूंसे मारने के बाद टब में डुबोकर करंट लगाया। इस घटना में गर्भ में पल रही बच्ची की मौत हो गई।

देहरादून जिले के सहसपुर क्षेत्र में पति ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। बेटे की चाहत में उसने आठ माह की गर्भस्थ पत्नी के पेट में लात-घूंसे मारने के साथ करंट लगा दिया। पिटाई के चलते गर्भस्थ बच्ची की पेट में ही मौत हो गई। महिला दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को ऑपरेशन के जरिए मृत शिशु को बाहर निकाला गया। पीड़िता की दून अस्पताल में हालत गंभीर बनी हुई है। आरोप है कि कुछ दिन पहले पति ने पानीपत में गैर कानूनी तरीके से पत्नी का लिंग परीक्षण करवाया था, जिसमें गर्भ में बेटी होने की पुष्टि होने के बाद नाराज पति ने पत्नी की पिटाई की।
सात साल पहले हुई थी शादी
शेरसिंह निवासी बालूवाला विकासनगर ने कोतवाली सहसपुर में तहरीर दी। बताया कि उनकी पुत्री सीमा की शादी सात वर्ष पूर्व बबलू निवासी पानीपत हाल निवासी जस्सोवाला विकासनगर से हुई थी। सीमा की दो बेटियां होने से बबलू खुश नहीं था और मारपीट करता था। अब महिला आठ माह की गर्भवती थी। कोतवाल प्रदीप रावत ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
जबरन लिंग परीक्षण
आरोप है कि चार-पांच दिन पहले पति सीमा को पानीपत जबरदस्ती ले गया और भ्रूण का लिंग परीक्षण कराया। जांच में गर्भ में बेटी की पुष्टि होने के बाद उसके साथ मारपीट की। टब में पानी भरकर करंट लगाकर जान से मारने की कोशिश भी की।
रूह कंपाने वाली सजा दी
सहसपुर क्षेत्र में पिटाई के बाद गर्भस्थ बच्ची की मौत ने मानवता को झकझोर दिया है। यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच का काला चेहरा है जो आज भी बेटे और बेटी के बीच इंसानियत को तौलती है। एक महिला, जिसने पहले ही दो बेटियों को जन्म दिया था, तीसरी बार मां बनने वाली थी, लेकिन जन्म से पहले ही बच्ची को गर्भ में मार दिया गया। कथित तौर पर गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग परीक्षण कराने से मना करने पर महिला के साथ ऐसा बर्ताव किया गया, जिसे सुनकर रूह कांप उठती है। टब में पानी भरकर करंट लगाकर जान लेने की कोशिश की गई।
दर्द से कराहती रही महिला, किसी का दिल नहीं पसीजा
उसके पेट पर लात और घूंसों से वार किए गए। एक मां दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब कानून स्पष्ट रूप से लिंग परीक्षण पर रोक लगाता है, तो फिर यह खेल कैसे चल रहा है। आखिर किन अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के बंद दरवाजों के पीछे यह गैरकानूनी कारोबार फल-फूल रहा है कौन हैं वे लोग जो पैसे के लिए कानून और इंसानियत दोनों का गला घोंट रहे हैं। लोगों का कहना है कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग की जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्र की जांच होनी चाहिए। देखना है कि इस मामले में पुलिस की जांच किन-किन तक लोगों पर पहुंचती है। पुलिस की जांच में हकीकत से पर्दा उठ सकता है।
पिता को बेटी से मिलने से रोका
दून अस्पताल में पीड़िता का इलाज चल रहा था। सूचना पर जब वह बेटी से मिलने पहुंचे तो बबलू ने उन्हें उससे मिलने से रोकने की कोशिश की। जिसके बाद उन्होंने पुलिस हेल्पलाइन में कॉल की। पुलिस की मदद से वह अपनी बेटी और और दामाद को कोतवाली सहसपुर लाए। हालत गंभीर होने के कारण उसकी बेटी को सहसपुर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां से उसे दून अस्पताल में रेफर कर दिया गया। दून अस्पताल में डॉक्टरों ने पेट में पल रही बच्ची के मृत होने की पुष्टि की, जिसके बाद ऑपरेशन के जरिए मृत शिशु को बाहर निकाला गया। वर्तमान में पीड़िता का इलाज दून अस्पताल में चल रहा है।
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