UCC में क्या-क्या बदलाव किए, जवाब दे सरकार; जमात-ए-उलेमा हिंद की याचिका पर HC
उत्तराखंड हाई कोर्ट में यूसीसी में किए संशोधनों को लेकर कई जनहित याचिकाएं दायर हुई। हाई कोर्ट ने सभी पर एक साथ सुनवाई की। साथ ही सरकार को संशोधन की जानकारी देने के निर्देश दिए।

उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से लागू की गई समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कई प्राविधानों को चुनौती देती याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने बुधवार को एकसाथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में निर्धारित की है।
सुनवाई पर याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि पूर्व में सरकार ने कहा था कि यूसीसी में संशोधन किए हैं। लेकिन ऐसा हुआ या नहीं, उन्हें नहीं मालूम। ऐसे में खंडपीठ ने सरकार से कहा है कि यूसीसी में हुए संशोधन की जानकारी अगली तिथि तक देने को कहा है।
उत्तराखंड जमात-ए-उलेमा हिंद के अध्यक्ष मो. मुकीम निवासी हल्द्वानी, सचिव तंजीम (हरिद्वार), सदस्य शोएब अहमद (मल्लीताल नैनीताल), मो. शाहनजर (देहरादून), अब्दुल सत्तार (देहरादून) ने यूसीसी के कई प्रावधानों को चुनौती दी थी।
यूसीसी को लेकर कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
इसी तरह एक अन्य रिट देहरादून के नईम अहमद, बिजनौर के हिजाब अहमद, देहरादून के जावेद अख्तर व आकिब कुरैशी के साथ-साथ अन्य ने भी दायर की। वहीं, यूसीसी के कुछ प्राविधानों को अधिवक्ता आरुषि गुप्ता ने भी जनहित याचिका के जरिये चुनौती दी है।
लिव इन प्रावधानों को चुनौती
वहीं, भीमताल निवासी सुरेश सिंह नेगी ने भी यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप के प्राविधानों को जनहित याचिका से चुनौती दी है। जबकि देहरादून के एलमसुद्दीन व अन्य ने रिट याचिका दायर कर यूसीसी को चुनौती दी है। याचिकाओं में कहा गया कि यूसीसी के प्राविधानों में सुधार करने की आवश्यकता है।
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