एक साल का बैन लगाइए; केदारनाथ-बद्रीनाथ में गैर हिंदू एंट्री पर हरीश रावत की एक सलाह
हरीश रावत ने एक सवाल भी उठाया कि दुनिया के अन्य धर्म लोगों को अपने विश्वास और अच्छाइयों को समझने के लिए आमंत्रित करते हैं, लेकिन हमारे ऊपर कई जगहों पर पाबंदियां लगाई जाती हैं। रावत ने यह भी खास तौर पर कहा कि आज भी हमारे मंदिरों को बनाने वाले कई मूर्तिकार, शिल्पकार और कारीगर गैर-हिंदू हैं।

उत्तराखंड में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक वाले फैसले पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। अब इस मसले पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी बयान दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को जहां भी जरूरी लगे, वो एक साल के लिए ऐसे प्रतिबंध लगा सकते हैं। इसे नया मुद्दा न मानते हुए रावत ने कहा कि हमारे मंदिरों को बनाने वाले कई मूर्तिकार, शिल्पकार और कारीगर गैर हिंदू हैं और हमारा धर्म और सनातन परंपरा तो सबको साथ लेकर चलने वाली है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि मेरा अनुरोध है कि केंद्र और राज्य सरकार को जहां भी जरूरी लगे, वे कम से कम एक साल के लिए ऐसे प्रतिबंध लगा सकते हैं। रावत ने कहा कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है। ऐतिहासिक रूप से कई जगहों पर स्थानीय समुदाय खुद ऐसे फैसले लेते रहे हैं। कुछ कानूनी प्रावधान भी ऐसे हैं जहां कुछ खास धर्मों के लोगों के रहने या न रहने के फैसले पहले से मौजूद हैं। उन्होंने याद दिलाया कि हिंदू धर्म और सनातन परंपरा हमेशा से उदार और सबको साथ लेकर चलने वाली रही है।
हरीश रावत ने एक सवाल भी उठाया कि दुनिया के अन्य धर्म लोगों को अपने विश्वास और अच्छाइयों को समझने के लिए आमंत्रित करते हैं, लेकिन हमारे ऊपर कई जगहों पर पाबंदियां लगाई जाती हैं। रावत ने यह भी खास तौर पर कहा कि आज भी हमारे मंदिरों को बनाने वाले कई मूर्तिकार, शिल्पकार और कारीगर गैर-हिंदू हैं।
इस मुद्दे पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इसी मामले पर पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे पवित्र स्थलों के प्रबंधन में सभी पक्षों की राय ली जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी धार्मिक स्थल हमारी आस्था के प्राचीन केंद्र हैं। इसलिए, इन जगहों पर आने वाले लोगों, धार्मिक संगठनों, तीर्थ समितियों (जैसे गंगा सभा, केदार सभा), बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और संत समाज के विचारों पर गौर किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इन पवित्र स्थानों का बहुत बड़ा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है, और इन्हें लेकर अतीत में भी कुछ खास कानून बनाए गए थे। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इन स्थलों के प्रबंधन और नियमों को लेकर जो भी निर्णय होगा, उसमें वहां से जुड़े सभी समुदायों और समितियों की राय शामिल होगी।
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