बोले हल्द्वानी: बद्रीपुरा में 40 साल पुरानी सीवर लाइन से हर घर परेशान
बद्रीपुरा तल्ला गोरखपुर में 40 साल पुरानी सीवर लाइन की समस्या से परेशान क्षेत्रवासियों ने पार्षद के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया। लोग गंदे पानी की समस्या और संक्रामक बीमारियों के खतरे से चिंतित हैं। अधिकारियों के बार-बार आश्वासन के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है, जिससे लोगों का धैर्य टूट गया है।
बद्रीपुरा तल्ला गोरखपुर में दशकों पुरानी सीवर लाइन की बदहाली और विभागीय उदासीनता के खिलाफ क्षेत्रवासियों के सब्र का बांध टूट गया। बार-बार आश्वासनों के बावजूद धरातल पर समाधान न होने से क्षुब्ध होकर पार्षद के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने गुरुवार को धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 40 साल पुरानी जर्जर और संकरी सीवर लाइन अब पूरी तरह जवाब दे चुकी है। आए दिन लाइन चोक होने से गंदा पानी गलियों में बह रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र संक्रामक बीमारियों के मुहाने पर खड़ा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद अधिकारी त्योहारों का बहाना बनाकर काम टालते रहे हैं, जिससे लोग काफी परेशान हो चुके है।
वार्ड नंबर 11, बद्रीपुरा तल्ला गोरखपुर में कई वर्षों से सीवर लाइन की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रवासियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। अधिकारियों की कार्यप्रणाली और आश्वासन की राजनीति से तंग आकर क्षेत्रीय पार्षद रवि जोशी ने स्थानीय के साथ गुरुवार को बद्रीपुरा में धरना प्रदर्शन किया। पार्षद ने बताया कि बद्रीपुरा क्षेत्र में बिछी सीवर लाइन करीब 40 साल पुरानी हो चुकी है। जर्जर और संकरी होने के कारण यह लाइन आए दिन चोक हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप सीवर का गंदा पानी गलियों और मोहल्लों में बहने लगता है, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय निवासी पिछले कई महीनों से नर्क जैसी स्थिति में रहने को मजबूर हैं। लोगों ने विभाग के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमने कई बार जल निगम के उच्चाधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार हमें केवल तारीख पर तारीख दी गई। काम धरातल पर शुरू करने के बजाय विभाग कागजी कार्रवाई और झूठे आश्वासनों में उलझा हुआ है। पार्षद के धरने पर बैठने और स्थानीय लोगों के बढ़ते दबाव को देखते हुए जल निगम के सहायक अभियंता मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को शांत कराते हुए आश्वासन दिया कि विभाग जल्द ही इस पर काम शुरू करने जा रहा है। आश्वासन के बाद पार्षद ने इस चेतावनी के साथ धरना स्थगित किया कि यदि निर्धारित समय के भीतर काम शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। 40 साल पुरानी लाइन बनी मुसीबत पार्षद ने बताया कि बद्रीपुरा क्षेत्र में वर्तमान में बिछी सीवर लाइन लगभग 40 साल पुरानी हो चुकी है। जिस समय यह लाइन डाली गई थी, उस दौर की आबादी और जरूरतों के हिसाब से सीवर लाइन ठीक थी। बीते चार दशकों में क्षेत्र की जनसंख्या में कई गुना इजाफा हुआ है, लेकिन सीवर लाइन की क्षमता आज भी वही पुरानी है। इसलिए लाइन को बदलकर बड़ा करने की मांग की गई। पार्षद ने तकनीकी खामियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आबादी बढ़ने के कारण वर्तमान पाइपलाइन लोड झेलने में पूरी तरह अक्षम साबित हो रही है, जिसके चलते गलियों और मोहल्लों में आए दिन सीवर चोक होने की समस्या बनी रहती है। जलभराव और गंदगी के कारण स्थानीय लोगों को न केवल आवाजाही में दिक्कत हो रही है, बल्कि घरों के भीतर तक सीवर का गंदा पानी बैक मारने लगा है। लोगों ने मांग उठाई है कि क्षेत्र में तत्काल बड़ी क्षमता की लाइन डाली जानी चाहिए ताकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समस्या का स्थाई समाधान हो सके। आश्वासनों की भेंट चढ़ी सीवर समस्या क्षेत्र की सीवर लाइन को लेकर विभागीय अधिकारियों का रवैया पूरी तरह टालमटोल वाला रहा है, जिससे स्थानीय जनता का धैर्य अब जवाब दे गया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि विभाग के पास समाधान के नाम पर सिर्फ नई तारीखें हैं। जल निगम के अधिकारियों ने पहले दीपावली के बाद काम शुरू करने का वादा किया था, जो अधूरा रहा। इसके बाद नए साल का झांसा दिया गया, फिर मकर संक्रांति और हाल ही में महाशिवरात्रि के बाद खुदाई शुरू करने का पक्का भरोसा दिलाया गया था। विडंबना यह है कि महाशिवरात्रि का पर्व भी बीत चुका है, लेकिन धरातल पर एक ईंट तक नहीं हिली है। अब अधिकारी इस काम को होली के बाद टालने की बात कह रहे हैं। बार-बार टूटते वादों से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी केवल त्योहारों की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। सीवर चोक होने से गलियों में फैल रही गंदगी और बदबू ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब वे तारीख पर तारीख के खेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे। काम जल्द से जल्द शुरू किया जाए। संक्रामक बीमारियों की आहट से सहमे लोग क्षेत्र में सीवर की समस्या अब केवल गंदगी और दुर्गंध तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसने एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। क्षेत्रवासियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सीवर लाइन के लगातार चोक होने और गलियों में बहते गंदे पानी के कारण इलाके में संक्रामक बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। जलभराव और सीवर की गाद के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे स्थानीय लोग, खासकर बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में उल्टी, दस्त, बुखार और त्वचा संबंधी रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। सीवर का पानी अब भूजल और पेयजल लाइनों को भी दूषित कर सकता है, जिससे हैजा और टायफाइड जैसी महामारी फैलने का खतरा भी हो सकता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने जल्द ही सीवर लाइन को दुरुस्त नहीं किया, तो यहां की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। पांच शिकायतें क्षेत्र में संकरी सीवर लाइन होने से हो रही दिक्कतें लाइन का गंदा पानी घरों में बैक मार रहा 40 सालों से नहीं हुई लाइन की मरम्मत सड़कों में जमा हो जाता है गंदा पानी विभागीय अधिकारियों के आश्वासन से परेशान लोग पांच सुझाव क्षेत्र में आबादी अनुसार बड़ी सीवर लाइन डाली जाए क्षेत्र में नई सीवर लाइन बिछाई जाए सफाई करने के लिए छोटा सीवर टैंक दिया जाए क्षेत्र में जमा हो रहा गंदा पानी साफ करवाया जाए आश्वासन नहीं धरातल पर काम करे विभाग बोले लोग 40 साल पुरानी लाइन अब बोझ बन चुकी है।
आबादी दस गुना बढ़ गई है, लेकिन पाइप वही संकरे हैं। सीवर का पानी सड़कों पर बहना आम बात हो गई है। अधिकारियों को हमारी तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है। रवि जोशी, पार्षद वार्ड 11
सीवर चोक होने से गंदा पानी घरों के किचन और बाथरूम में बैक मार रहा है। घर में रहना दूभर हो गया है। घरों में बैठकर खाना खाना तक मुश्किल हो र है क्योंकि हर वक्त बदबू आती रहती है। स्वाति रस्तोगी
विभाग ने हमें मजाक बना रखा है। हर त्योहार के बाद काम शुरू करने का वादा करते हैं और त्योहार बीतते ही गायब हो जाते हैं। अब होली के बाद की रट लगाई जा रही है जो सरासर झूठ है। मानसी रस्तोगी
स्वच्छ भारत का नारा यहां फेल है। नालियां बजबजा रही हैं और संक्रामक बीमारियों का खतरा सिर पर है। हमने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया है, सुधार नहीं हुआ तो हम सड़कों पर उतरेंगे। गोविंद शर्मा
अनुशासन और समय सीमा विभाग की डिक्शनरी में नहीं है। 40 साल पुरानी जर्जर लाइन को बदलने का काम प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। हमें आश्वासन नहीं, धरातल पर नई पाइपलाइन चाहिए। चंपा पांडे
शिवरात्रि बीत गई, काम शुरू नहीं हुआ। अब होली के बाद का झांसा दिया जा रहा है। विभाग केवल समय काट रहा है। हम अपने पार्षद के साथ खड़े रहेंगे हम इस समस्या का समाधान चाहिए। दया नेगी
आश्वासन की राजनीति अब नहीं चलेगी। हमने अधिकारियों को बहुत समय दे दिया। अब अगर एक हफ्ते में मशीनें नहीं उतरीं, तो हम विभाग का घेराव करेंगे और काम शुरू करवा कर ही दम लेंगे। परमिला श्रीवास्तव
40 साल पुरानी संकरी लाइन अब पूरी तरह जवाब दे चुकी है। आबादी दस गुना बढ़ गई है, लेकिन व्यवस्था वही पुरानी है। अधिकारी केवल त्योहारों का बहाना बनाकर हमें टाल रहे हैं। रामवती
विभाग ने दिवाली, नया साल और अब शिवरात्रि भी निकाल दी। हर बार एक नई तारीख दे दी जाती है। अब होली के बाद काम करने को कह रहे है। हमारे साथ सरासर गलत किया जा रहा है। दिनेश मंडल
सीवर का गंदा पानी अब नालियों से निकलकर हमारे किचन और आंगन तक पहुंचने लगा है। घर में चौबीसों घंटे बदबू रहती है, सोना भी दूभर हो गया है। विभाग को हमारी तकलीफ दिखाई नहीं देती क्या। भारत जोशी अधिकारी
कहते हैं होली के बाद देखेंगे। क्या हम हर त्योहार गंदगी में ही मनाएं? पिछली बार दिवाली पर भी यही कहा गया था। प्रशासन की इस तारीख पर तारीख वाली नीति ने पूरे क्षेत्र को परेशान कर दिया है। ललित मोहन तिवारी
जब तक पार्षद धरने पर नहीं बैठे, कोई अधिकारी सुध लेने नहीं आया। एई साहब ने एक हफ्ते का समय माँगा है, हम देख रहे हैं। अगर सात दिन में जेसीबी मशीन मोहल्ले में नहीं दिखी, तो हम अधिकारियों का घेराव करेंगे। भगवान देवी
हमारी उम्र इस मोहल्ले में बीत गई। 40 साल पहले जब यह लाइन डली थी, तब आबादी बहुत कम थी। अब आबादी बढ़ गई है, लेकिन पाइप वही पुराने और संकरे हैं। जिससे काफी परेशानी हो रही है। दीपा गुप्ता
सीवर के गंदे पानी के कारण चौबीसों घंटे बदबू के साये में रहना पड़ता है। लोग बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। अधिकारियों को हमारी तकलीफ नहीं दिखती, वे बस त्योहारों के नाम पर टालमटोल कर रहे हैं। रीना
बोले जिम्मेदार
बद्रीपुरा में 40 साल पहले सीवर लाइन बिछाई गई थी जो कि अब आबादी बढ़ने के कारण परेशानी पैदा कर रही है। क्षेत्र में पाइपलाइन बदलने का कार्य किया जाना है। जिसे जल्द ही शुरू किया जाएगा। -वाईएस लसपाल, सहायक अभियंता, जल निगम
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