Residents of Baidikhatta Suffer Due to Poor Development and Health Crisis बोले हल्द्वानी: बैड़ीखत्ता में दो साल से अधर में लटका डामरीकरण, धूल के गुबार में घुट रहा लोगों का दम, Haldwani Hindi News - Hindustan
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बोले हल्द्वानी: बैड़ीखत्ता में दो साल से अधर में लटका डामरीकरण, धूल के गुबार में घुट रहा लोगों का दम

हल्द्वानी के बैड़ीखत्ता क्षेत्र में पिछले दो वर्षों से विकास कार्यों के नाम पर खोदी गई सड़कों ने लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। धूल और गंदगी के कारण बच्चों और बुजुर्गों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। निकासी नालियों की कमी और अव्यवस्थित पार्किंग भी समस्याओं को बढ़ा रही है।

Mon, 23 Feb 2026 04:59 PMNewswrap हिन्दुस्तान, हल्द्वानी
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बोले हल्द्वानी: बैड़ीखत्ता में दो साल से अधर में लटका डामरीकरण, धूल के गुबार में घुट रहा लोगों का दम

हल्द्वानी, दीक्षा बिष्ट लमगड़िया। हाइडिल गेट शिव मंदिर के पीछे स्थित बैड़ीखत्ता के निवासियों के लिए विकास एक अभिशाप बन गया है। पिछले दो वर्षों से क्षेत्र की जनता विभागीय तालमेल की कमी और प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेल रही है। पेयजल और सीवर लाइन डालने के लिए खोदी गई सड़कों ने पूरे क्षेत्र को धूल के गुबार में झोंक दिया है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग अब सांस की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मानसून में कीचड़ और सूखे में उड़ती धूल ने लोगों का घरों से निकलना दूभर कर दिया है। वहीं सड़कों के किनारे निकासी नालियां न होने से घरों का गंदा पानी रास्तों पर बह रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

बोले हल्द्वानी की टीम ने जब लोगों से बातचीत की तो उन्होंने अपनी समस्याएं बताईं और उनके समाधान के लिए सुझाव भी दिए। वार्ड नंबर 35 हाइडिल गेट स्थित बैड़ीखत्ता के निवासियों के लिए पिछले दो साल किसी दुस्वप्न से कम नहीं रहे हैं। क्षेत्र में विकास के नाम पर बिछाई गई पेयजल और सीवर लाइन ने सड़कों को पूरी तरह छलनी कर दिया है। विभाग की ओर से मरम्मत न किए जाने से उड़ती धूल अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन गई है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग सांस व आंखों की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मानसून में ये सड़कें कीचड़ का तालाब बन जाती हैं, जिससे पैदल चलना भी दूभर है। निकासी नालियां न होने से घरों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे गंदगी और दुर्गंध फैल रही है। इसके साथ ही, सिर के ऊपर झूलते हाई-वोल्टेज बिजली के तार और सड़कों के बीचों-बीच खड़े खंभे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से भी क्षेत्र संवेदनशील बना हुआ है। लावारिस कुत्तों के झुंड राहगीरों को अपना निशाना बना रहे हैं, वहीं लंबे समय से बाघ की आवाजाही से लोग दहशत के साये में घरों में कैद होने को मजबूर हैं। आपदा के दौरान टूटी सिंचाई गुलों की आज तक सुध नहीं ली गई, जिससे कृषि कार्यों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। कई लोगों ने खेती करनी भी छोड़ दी है। पिछले दो साल से टूटी पड़ी हैं सड़कें लोगों ने कहा कि पिछले दो वर्षों से क्षेत्र की सड़कें बदहाली का शिकार हो चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगभग दो साल पहले पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए क्षेत्र की मुख्य सड़कों को खोदा गया था, जिसे कार्य पूर्ण होने के बाद भी दुरुस्त नहीं किया गया। अभी लोग इस समस्या से जूझ ही रहे थे कि कुछ माह पूर्व सीवर लाइन डालने के लिए एक बार फिर सड़कों को छलनी कर दिया गया। विभागीय तालमेल की कमी का खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। सड़कों की मरम्मत न होने के कारण अब पूरा क्षेत्र धूल के गुबार में तब्दील हो चुका है। निवासियों ने बताया कि उड़ती धूल के कारण घरों के दरवाजे और खिड़कियां खोलना भी नामुमकिन हो गया है। सांस की बीमारियों की चपेट में आ रहे बच्चे और बुजुर्ग, प्रशासन मौन लोगों ने कहा कि क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर खोदी गई सड़कों ने अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। पाइपलाइन और सीवर लाइन के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत न होने से उड़ने वाली धूल स्थानीय निवासियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को बीमार कर रही है। स्थानीय निवासियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे दोहरी मार झेल रहे हैं। जब बारिश होती है, तो पूरी सड़क गहरे कीचड़ और मलबे में तब्दील हो जाती है, जिससे पैदल चलना भी नामुमकिन हो जाता है। वहीं, जैसे ही सड़क सूखती है, धूल के ऐसे गुबार उड़ते हैं कि सामने का रास्ता तक दिखाई नहीं देता। इस धूल के कारण क्षेत्र में सांस संबंधी बीमारियों, अस्थमा और आंखों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। धूल का आलम यह है कि लोगों ने अपने घरों की खिड़कियां और दरवाजे स्थायी रूप से बंद कर लिए हैं। भोजन से लेकर बिस्तर तक हर जगह धूल की परत जमा हो रही है। लोगों का कहना है कि विभागीय लापरवाही के कारण उनका स्वास्थ्य और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। क्षेत्र में आवारा कुत्तों का है आतंक क्षेत्र में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है। सड़कों और गलियों में झुंड बनाकर घूम रहे हिंसक कुत्तों ने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है। स्थिति यह है कि शाम ढलते ही लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र के हर मोड़ और सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों के झुंड जमा रहते हैं। ये कुत्ते न केवल राहगीरों को देखकर भौंकते हैं, बल्कि अचानक उनके पीछे दौड़ने लगते हैं। दुपहिया वाहन चालकों के पीछे कुत्ते दौड़ने के कारण आए दिन लोग संतुलन खोकर गिर रहे हैं, जिससे बड़ी दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। झूल गए बिजली के तार क्षेत्र में बिजली की लाइनें और पोल किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। यहाँ बिजली के तार इतने नीचे तक झूल गए हैं कि अगर कोई बडा वाहन वहां से गुजर तो तारों से टकरा सकता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पूरे क्षेत्र में बिजली के तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। कई जगह हाई वोल्टेज तार काफी नीचे तक लटक रहे हैं, जिससे हल्की सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषकर ऊंचे वाहनों और बारिश के समय इन झूलते तारों से करंट उतरने का खतरा बना रहता है। विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि क्षेत्र की कई सड़कों के ठीक बीचों-बीच बिजली के खंभे लगे हुए हैं। सड़कों के चौड़ीकरण या निर्माण के समय इन पोलों को शिफ्ट नहीं किया गया, जिसके कारण लोगों को आवाजाही करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नालियां न होने से सड़कों पर बह रहा गंदा पानी क्षेत्र में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है। क्षेत्र की सड़कों के दोनों ओर नालियां नहीं होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सड़कों पर बह रहा है। इसके चलते पूरी सड़क कीचड़ और गंदगी से सराबोर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों पर लगातार पानी बहने के कारण सड़कों पर कीचड़ हो जाता है। निकासी का कोई रास्ता न होने से यह गंदा पानी कई जगह जमा होकर सड़न पैदा कर रहा है। राहगीरों, विशेषकर महिलाओं और स्कूली बच्चों को इस बदबूदार और गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। पांच शिकायतें क्षेत्र की सड़कें पिछले दो साल से टूटी हुई है सड़कों पर लोगों ने बना दी है अवैध पार्किंग आपदा में टूटी सिचांई गुल की नहीं हुई मरम्मत निकासी नालियां ना होने से सड़कों पर बह रहा गंदा पानी क्षेत्र में लंबे समय से बाघ के आतंक से दहशत में लोग पांच सुझाव टूटी सड़कों की मरम्मत की जाए सड़कों पर पार्किंग करने वालों पर कार्रवाई की जाए आपदा में टूटी सिंचाई गुल को ठीक किया जाए सड़कों के दोनों ओर निकासी नालियां बनाई जाए बाघ को पकड़कर जंगल में छोड़ा जाए बोले लोग दो साल पहले पाइपलाइन के लिए सड़क खोदी गई थी, जो आज तक नहीं बनी। अब सीवर लाइन ने रही-सही कसर पूरी कर दी। धूल के कारण घर के अंदर बैठना भी दूभर हो गया है। लछीराम धूल से सांस लेना मुश्किल है। विभाग ने पाइप डालने के बाद गड्ढे ऐसे ही छोड़ दिए। जब हम शिकायत करते हैं, तो एक विभाग दूसरे पर जिम्मेदारी टाल देता है। धनीराम धूल की वजह से बच्चों को लगातार खांसी और आंखों में इंफेक्शन हो रहा है। हमने खिड़की-दरवाजे खोलना बंद कर दिया है, लेकिन फिर भी धूल अंदर आ ही जाती है। गिरीश चंद्र बरसात में यह सड़क कीचड़ का दलदल बन जाती है और सूखे में रेगिस्तान की तरह धूल उड़ती है। बुजुर्गों का इस सड़क पर चलना किसी सजा से कम नहीं है। बीरू सड़क के दोनों ओर नालियां नहीं हैं। रसोई और बाथरूम का गंदा पानी सड़क पर बहता है, जिससे बदबू और बीमारियों का खतरा हर वक्त बना रहता है। अनिल निकासी नालियां ना होने से बारिश का पानी सडकों पर बहता है। वहीं लोगों के घरों का गंदा पानी भी सडकों पर बह रहा है। जिससे जगह-जगह कीचड़ जमा हो जाता है। विरेंद्र कुमार बिजली के तार इतने नीचे लटक रहे हैं कि कोई भी बड़ा ट्रक उनसे टकरा सकता है। करंट का खतरा हर पल सिर पर मंडराता रहता है, पर कोई सुनने वाला नहीं। अर्जुन लाल टम्टा बाघ की दहशत ने हमें शाम होते ही घरों में कैद कर दिया है। वन विभाग को इसे पकड़कर जंगल छोड़ना चाहिए ताकि हम चैन की सांस ले सकें। हरीश बिष्ट दो साल पहले पानी की पाइपलाइन डाली गई, तब से सड़क नहीं बनी। अब सीवर के गड्ढों ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। उड़ती धूल के कारण घर की खिड़कियां खोलना मुश्किल हो गया है। महेशानंद पिछले दो साल से धूल ने तो जीना मुश्किल कर दिया है। दुकान खोलो बाद में पहले धूल भर जाती है। सामान सारा धूल से खराब हो जाता है। आशा देवी सड़कों पर लोगों ने अवैध रूप से गाड़ियां पार्क कर दी हैं, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल है। प्रशासन को चाहिए कि इन पर कार्रवाई करे और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराए। राजेंद्र सड़क के बिल्कुल बीच में बिजली के पोल खड़े हैं। रात के अंधेरे में ये पोल बड़े हादसों का कारण बन रहे हैं। विभाग इन्हें किनारे शिफ्ट क्यों नहीं करता। पुष्पा

बोले जिम्मेदार

क्षेत्र की समस्याओं के बारे में कई बार विभागीय अधिकारियों से पत्राचार किया गया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। रेनू टम्टा, पार्षद वार्ड 35

क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन व सीवरी की लाइन बिछाने का काम हो गया है। अब जल्द ही चैंबर बनाने के बाद सड़क का काम भी शुरू किया जाएगा। कुलदीप सिंह, परियोजना प्रबंधक, यूयूएसडीए

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