बोले हल्द्वानी: नमक से इंकार, गल्ले का इंतजार, राशन डीलरों को घटिया माल मंजूर नहीं
हल्द्वानी में सरकारी राशन की दुकानों पर घटिया आपूर्ति और बदइंतजामी ने डीलरों और उपभोक्ताओं के बीच तनाव बढ़ा दिया है। करीब 280 राशन विक्रेताओं ने नमक में कंकड़ और गंदगी की शिकायतों के बाद उसका उठान बंद करने का निर्णय लिया है।
हल्द्वानी, दीक्षा बिष्ट लमगड़िया। सरकारी राशन की दुकानों पर बदइंतजामी और घटिया आपूर्ति ने उपभोक्ताओं के साथ-साथ डीलरों की भी कमर तोड़ दी है। शहर के करीब 280 राशन विक्रेताओं ने सरकारी नमक में कंकड़ और गंदगी की शिकायतों के बाद गोदामों से इसका उठान बंद करने का सामूहिक निर्णय लिया है। एक ओर जहां अंत्योदय कार्ड धारकों को पिछले 18 महीनों से चीनी नसीब नहीं हुई है, वहीं फरवरी का आधा महीना बीतने के बाद भी कई दुकानों तक मासिक गल्ला (गेहूं-चावल) नहीं पहुंचा है। विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली से न केवल गरीबों का चूल्हा प्रभावित हो रहा है, बल्कि डीलरों और उपभोक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक के हालात बने हुए हैं।
शहर के करीब 280 राशन डीलरों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। खाद्य आपूर्ति विभाग की लचर कार्यप्रणाली ने राशन डीलरों और जनता की कमर तोड़ दी है। सबसे गंभीर स्थिति सरकारी नमक को लेकर बनी है। नमक में कंकड़ और गंदगी की शिकायतों के कारण उपभोक्ताओं ने इसे खरीदने से साफ मना कर दिया है। डीलरों का आरोप है कि विभाग जबरन नमक थोप रहा है, जिसका अग्रिम भुगतान करने के कारण उनकी पूंजी डंप स्टॉक में फंस रही है। ऐसे में डीलरों ने अब गोदामों से नमक का उठान बंद करने का सामूहिक निर्णय लिया है। दूसरी ओर, अंत्योदय कार्ड धारकों को पिछले 18 महीनों से चीनी नसीब नहीं हुई है। नियमानुसार मिलने वाली एक किलो रियायती चीनी न आने से गरीब परिवारों को बाजार से महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है। विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि फरवरी का आधा महीना बीतने के बाद भी कई दुकानों पर मासिक खाद्यान्न गेहूं और चावल नहीं पहुंचा है, जबकि नियमानुसार इसे जनवरी अंत तक पहुंच जाना चाहिए था। राशन की देरी और घटिया नमक के कारण दुकानों पर उपभोक्ताओं और डीलरों के बीच तीखी नोकझोंक हो रही है। अंत्योदय कार्ड धारकों को डेढ़ साल से नहीं मिली चीनी सरकार भले ही गरीबों को राशन देने के दावे कर रही हो, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। हल्द्वानी के अंत्योदय कार्ड धारकों को पिछले डेढ़ साल से चीनी नसीब नहीं हुई है। राशन डीलरों का कहना है कि विभाग की ओर से चीनी की आपूर्ति ठप होने के कारण गरीब परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नियम के अनुसार अंत्योदय कार्ड धारकों को प्रति कार्ड एक किलो चीनी रियायती दरों पर दी जाती है। शहर के राशन डीलरों ने बताया कि 18 महीनों से राशन की दुकानों पर चीनी का कोटा नहीं पहुंचा है। उपभोक्ता हर महीने दुकान पर उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है। गरीब परिवारों के लिए बाजार से महंगे दामों पर चीनी खरीदना बजट से बाहर हो रहा है। स्थानीय राशन डीलरों का कहना है कि चीनी न मिलने के कारण उन्हें उपभोक्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ता है। अभी तक नहीं आया फरवरी का राशन राशन डीलरों ने बताया कि फरवरी का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की कई राशन की दुकानों पर अभी तक फरवरी माह का खाद्यान्न नहीं पहुंचा है। इससे राशन कार्ड धारकों को दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। राशन डीलरों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया कि नियमानुसार आगामी माह का राशन पिछले महीने की अंतिम तारीख तक दुकानों में पहुंच जाना चाहिए। यानी फरवरी का राशन 31 जनवरी तक उपलब्ध हो जाना चाहिए था लेकिन इस बार फरवरी का आधा पखवाड़ा बीतने के बाद भी डिपो से राशन की आपूर्ति नहीं हो पाई है। राशन समय पर न मिलने से कारण कार्ड धारकों और डीलरों के बीच तीखी नोकझोंक हो रही है। कई गरीब परिवारों के लिए महीने भर का चूल्हा इसी सरकारी राशन पर निर्भर रहता है, ऐसे में देरी उनके लिए बड़ा संकट बन गई है। सरकारी नमक खरीदने से लोगों ने किया मना खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से सरकारी राशन की दुकानों के माध्यम से वितरित किया जा रहा नमक अब राशन डीलरों के लिए जी का जंजाल बन गया है। गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के कारण उपभोक्ताओं ने सरकारी नमक लेने से हाथ खड़े कर लिए हैं, जिससे दुकानों में नमक का स्टॉक डंप हो रहा है और डीलरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। राशन की दुकानों पर पहुंच रहे कार्डधारकों का स्पष्ट कहना है कि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में मिल रहे नमक में कंकड़ और गंदगी की शिकायतें मिल रही हैं। उपभोक्ताओं का तर्क है कि स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। ग्राहकों की मांग है कि उन्हें आईएसओ प्रमाणित बेहतर क्वालिटी का नमक ही दिया जाए। घटिया गुणवत्ता की आशंका के चलते लोग बाजार से महंगा नमक खरीदना बेहतर समझ रहे हैं। ऐसे में स्थानीय राशन डीलरों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग की ओर से नमक की खेप तो भेज दी जा रही है और इसका भुगतान भी डीलरों से पहले ही ले लिया जाता है। लेकिन दुकानों में यह नमक महीनों से डंप पड़ा है क्योंकि कोई इसे खरीदने को तैयार नहीं है। पांच शिकायतें उपभोक्ता नहीं खरीद रहे सरकारी नमक पुराना राशन नहीं बिके तो वापस नहीं लेता विभाग अंत्योदय कार्ड धारकों को डेढ़ साल से नहीं मिली चीनी अभी तक नहीं दिया गया फरवरी का राशन राशन विक्रेताओं को नहीं मिलता मानदेय पांच सुझाव नमक की गुणवत्ता सुधारी जाए पुराना राशन नहीं बिके तो विभाग उसे वापस ले अंत्योदय कार्ड धारकों के लिए चीनी भेजी जाए हम माह का राशन माह शुरू होने से पहले भेजा जाए राशन विक्रेताओं का मानदेय तय किया जाए बोले राशन डीलर विभाग की कार्यप्रणाली समझ से परे है। नियम कहते हैं कि राशन समय पर पहुंचना चाहिए, लेकिन फरवरी आधा बीत गया और गोदाम खाली हैं। ऊपर से घटिया नमक थोपा जा रहा है जिसे जनता छूने को तैयार नहीं। अजहरउद्दीन, आजादनगर विभाग की ओर से अंत्योदय कार्ड नहीं बनाए जा रहे है। जिससे काफी परेशानी है। हमने सालों दो साल पहले कार्ड बनाने के लिए अप्लाई किया था लेकिन अभी तक कार्ड नहीं बना है। गरीमा, नवाबी रोड मैं 70 प्रतिशत दिव्यांग हूं। मेरे पास विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र भी हैं। मैंने सितंबर 2024 में अंत्योदय कार्ड बनवाने के लिए पंजीकरण किया था लेकिन अभी तक मेरा कार्ड नहीं बना है। दीपक कुमार, नवाबी रोड अंत्योदय परिवारों को हम क्या जवाब दें। 18 महीनों से चीनी नहीं आई है। गरीब उपभोक्ता हम पर शक करते हैं कि शायद हम चीनी दबा रहे हैं, जबकि हकीकत में विभाग ने सप्लाई ही बंद कर रखी है। अभिलाष पसपोला, गोविंदपुर बगडवाल नमक में कंकड़ और गंदगी की इतनी शिकायतें हैं कि हमने अब उसका उठान ही बंद कर दिया है। एडवांस पैसा देकर इसे खरीदना हमें मंजूर नहीं। उपभोक्ता साफ और आईएसओ प्रमाणित नमक मांग रहे हैं। उवैस कादरी, इंदिरानगर राशन की देरी से दुकानों पर हर रोज उपभोक्ताओं के साथ तीखी नोकझोंक होती है। लोगों को लगता है हम जानबूझकर देरी कर रहे हैं, जबकि गोदामों से ही गल्ला दुकानों तक नहीं पहुंचा है। कुंदन शर्मा, डहरिया फरवरी का राशन जनवरी के आखिर तक आ जाना चाहिए था। अब फरवरी आधा बीत गया है, गरीब परिवार खाली हाथ लौट रहे हैं। प्रशासन की सुस्ती गरीबों के चूल्हे पर भारी पड़ रही है। ओमप्रकाश, राजेंद्र नगर चीनी के लिए लाल कार्ड धारक महिलाएं हर महीने उम्मीद से आती हैं। पिछले डेढ़ साल से उन्हें बाजार की महंगी चीनी खानी पड़ रही है। सरकार के मुफ्त राशन के दावों की यहाँ पोल खुल रही है। देवेंद्र जोशी, गौजाजाली गंदा नमक बेचकर हम लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं कर सकते। उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि कंकड़ वाला नमक मुफ्त में भी नहीं चाहिए। विभाग को अपनी गुणवत्ता सुधारनी होगी। दीप चंद्र सुयाल, तल्ली हल्द्वानी डीलर बीच में पिस रहा है। एक तरफ विभाग की तानाशाही है कि नमक लेना ही पड़ेगा, दूसरी तरफ जनता का दबाव है कि गुणवत्ता ठीक नहीं। हमने अब सामूहिक रूप से उठान रोकने का फैसला लिया है। खीमानंद भगत, बरेल रोड लोग कहते हैं कि सरकारी नमक खाकर बीमार पड़ने से अच्छा है बाजार से 20 रुपये का पैकेट खरीद लें। विभाग हमें व्यापारिक नुकसान की ओर धकेल रहा है। नरेश कुमार अग्वाल, गणेश विहार मुखानी बिना मांग के नमक भेजना बंद होना चाहिए। हमारी दुकानों में जगह कम है और नमक की बोरियां सड़ रही हैं। अधिकारियों को धरातल पर आकर स्थिति देखनी चाहिए। मोहम्मद इदरीस मिकरानी, इंदिरानगर 18 महीने यानी डेढ़ साल से चीनी न मिलना कोई छोटी बात नहीं है। विभाग की फाइलों में सब ठीक होगा, पर हमारी दुकानों के रजिस्टर में चीनी का कॉलम महीनों से खाली पड़ा है। मुकेश सक्सेना, बमोरी राशन वितरण का समय फिक्स होना चाहिए। जब राशन ही 20 तारीख को आएगा, तो हम वितरण कब करेंगे? विभाग की लेटलतीफी का खामियाजा डीलर और उपभोक्ता दोनों भुगत रहे हैं। यतीश बिनवाल, रूपनगर हमारी शिकायत नहीं है उपभोक्ता लगातार नमक की गुणवत्ता को लेकर शिकायत कर रहे है सवाल उठा रहे है। इसलिए हम गोदाम से नमक नहीं उठाएंगे। इसलिए सरकार से गुजारिश है नमक की गुणवत्ता सुधारी जाए। रेवाधर बृजवासी, देवलचौड़ आईएसओ प्रमाणित नमक की मांग जायज है। जब सरकार हर चीज में क्वालिटी की बात करती है, तो गरीबों को कंकड़ वाला नमक क्यों दिया जा रहा है? जब तक गुणवत्ता नहीं सुधरेगी, हम नमक नहीं उठाएंगे। दिनेश पांडे, कठघरिया
बोले जिम्मेदार
राशन डीलर जो भी समस्याएं लिखित रूप में देंगे, उन्हें उच्च अधिकारियों के सामने रख जाएगा। वे जो भी निर्णय लेंगे, उस पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। विजय नैनवाल, गोदाम इंचार्ज
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