बोले हल्द्वानी: वेतन बढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बुद्ध पार्क में भरी हुंकार
अपनी जायज मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सब्र अब जवाब दे गया है। मंगलवार को 'आंगनबाड़ी कार्यकर्ती/सेविका संगठन' के बैनर तले बुद्ध पार्क में जो
हल्द्वानी, दीक्षा बिष्ट लमगड़िया। अपनी जायज मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सब्र अब जवाब दे गया है। मंगलवार को ‘आंगनबाड़ी कार्यकर्ती/सेविका संगठन’ के बैनर तले बुद्ध पार्क में जोरदार प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ शंखनाद कर दिया। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी तब तक वें आंगनवाड़ी केंद्रों को नहीं लौटेंगे। उन्होंने कहा केंद्रों में ताले लटके हुए हैं और यह तालाबंदी मानदेय वृद्धि होने तक जारी रहेगी। कार्यकर्ताओं ने विभाग पर आरोप लगाया कि सालाना मात्र 2000 के डेटा खर्च में फेस कैप्चर और ऑनलाइन मॉनिटरिंग का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वे अपनी जेब काटने को मजबूर हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार वेतन नहीं बढ़ाती, तब तक पोषण ट्रैकर और बीएलओ सहित सभी सरकारी कार्यों का पूर्ण बहिष्कार जारी रहेगा।आंगनबाड़ी कार्यकर्ती/सेविका/मिनी कर्मचारी संगठन उत्तराखंड के बैनर तले अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्षरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आक्रोश मंगलवार को बुद्ध पार्क में फूट पड़ा। भारी संख्या में जुटी कार्यकर्ताओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और दो टूक चेतावनी दी कि यदि मानदेय में वृद्धि नहीं की गई, तो केंद्रों पर ताले लटकेंगे और बीएलओ समेत सभी सरकारी कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने 14 मार्च 2026 को देहरादून में हुई प्रदेश स्तरीय रैली का जिक्र करते हुए कहा कि अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाने जा रही महिलाओं को प्रशासन ने 'भेड़-बकरियों' की तरह घसीटकर गाड़ियों में भरा। इस अपमानजनक और शर्मनाक व्यवहार से कार्यकर्ताओं में गहरा रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस दमनकारी नीति के जवाब में वर्तमान में केवल उपस्थिति दर्ज की जा रही है और 'पोषण ट्रैकर' पर काम बंद है, लेकिन सरकार फिर भी मौन है। संगठन ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब भी वे अपनी समस्याएं लेकर ब्लॉक या जिला स्तर पर जाती हैं, तो अधिकारी उन्हें सरकार के पास भेज देते हैं। लेकिन जैसे ही संगठन सरकार के पास जाता है, विभाग उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के नोटिस जारी कर डराने का काम करता है। धरने में कार्यकर्ताओं ने विभाग से तीखे सवाल पूछे उन्होंने कहा साल में मात्र ₹2000 या तीन महीने में ₹250 देकर 24 घंटे ऑनलाइन मॉनिटरिंग और 'फेस कैप्चर' का काम कैसे संभव है, क्या विभाग को नहीं पता कि रिचार्ज कितने महंगे हैं। क्या विभाग राशन की ढुलान और खाना पकाने के लिए ईंधन का पैसा समय पर दे रहा है। योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए क्षेत्र में घूमने का किराया और अन्य डिश/स्टॉल लगाने का खर्च क्या सरकार वहन करती है। सच्चाई यह है कि विधवा, परित्यक्ता और बीपीएल श्रेणी की आंगनबाड़ी बहनें अपने छोटे से मानदेय में से पैसा लगाकर सरकारी काम पूरा कर रही हैं। महिलाओं ने कहा कि जबतक मानदेय नहीं बढ़ाया जाएगा वे लोग धरने में बैठे रहेगे। आंगनबाड़ी केंद्रों पर जड़ा ताला, ठप हुआ कामकाजमानदेय वृद्धि और सरकारी शोषण के खिलाफ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आक्रोश अब चरम पर है। संगठन के आह्वान पर 2 अप्रैल से प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लटका हुआ है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। केंद्रों पर तालाबंदी के कारण बच्चों के पोषण और टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि जब तक मानदेय नहीं बढ़ता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी।अतिरिक्त कार्य के बोझ से दबीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताआंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने विभाग व प्रशासन द्वारा उन पर लादे जा रहे अतिरिक्त कार्यों के खिलाफ भी रोष व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मूल कार्यों के अलावा उनसे बीएलओ और अब एसआईआर जैसे कार्यों में भी ड्यूटी लगाई जा रही है, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक शोषण हो रहा है। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे पूरी निष्ठा से काम कर रही हैं, लेकिन घंटों की अतिरिक्त मेहनत के बदले उन्हें कुछ नहीं दी जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि या तो उनसे अतिरिक्त कार्य न करवाया जाए, या फिर उस कार्य का उचित मेहनताना (मानदेय) दिया जाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा, बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के हमसे सरकारी योजनाओं और सर्वे के काम करवाना सरासर अन्याय है। उन्होंने शासन से मांग की है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। डेटा खर्च के अभाव में जेब काटने को मजबूर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताआंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताते हुए ऑनलाइन डेटा फीडिंग में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को उजागर किया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार एक ओर डिजिटल कामकाज पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर इसके लिए जरूरी संसाधन और खर्च देने में कंजूसी कर रही है। महिलाओं ने बताया कि विभाग द्वारा डेटा रिचार्ज के लिए सालाना मात्र 2000 रुपये दिए जाते हैं। आज के महंगे डेटा पैक के दौर में यह राशि साल भर के लिए नाकाफी है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि विभाग ने उन्हें स्मार्टफोन तो दिए हैं और उन पर 'फेस कैप्चर' (चेहरा स्कैन) कर महिलाओं का विवरण ऑनलाइन अपलोड करने का काम भी दिया है, लेकिन डेटा खत्म होने पर उन्हें अपनी बेहद कम आय से रिचार्ज कराना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि अपनी जेब से पैसा खर्च कर सरकारी रिपोर्टिंग करना उनके साथ सरासर अन्याय है। उन्होंने मांग की है कि ऑनलाइन कार्यों के सफल संचालन हेतु विभाग उन्हें प्रतिमाह उचित डेटा शुल्क या इंटरनेट भत्ता प्रदान करे। पांच शिकायतें मानदेय ना बढ़ाने से परेशान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिछले 12 सालों से बढ़ाई गई मानदेय आंगनबाड़ी के अलावा भी करवाया जाता है अतिरिक्त काम फेस कैप्चर के लिए दिए गए फोन पर डेटा डालने के लिए नहीं मिलते पैसे अतिरिक्त काम करवाने के नहीं मिलते पैसे पांच सुझाव आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया जाए समय से दिया जाए मानदेय आंगनबाड़ी के अलावा अतिरिक्त काम नहीं करवाया जाए फेस कैप्चर के लिए अलग से डेटा का पैसा दिया जाए अतिरिक्त काम करवाने का उचित मानदेय दिया जाए बोली कार्यकर्तासरकार हमें डिजिटल इंडिया का हिस्सा तो बनाना चाहती है, लेकिन ₹2000 सालाना डेटा में साल भर काम कैसे होगा। केंद्रो में तालाबंदी करना हमारी मजबूरी है। जब तक मानदेय नहीं बढ़ता, ताले नहीं खुलेंगे।गीता आर्या14 मार्च की वह घटना हम भूल नहीं सकते। हमारी बहनों को भेड़-बकरियों की तरह पुलिस ने घसीटा। क्या अपनी जायज मांग रखना अपराध है। जब तक मुख्यमंत्री हमारी बात नहीं सुनते, हम झुकने वाले नहीं हैं।निर्मला आर्याहम आंगनवाड़ी का काम करें या बीएलओ और एसआईआर का, हमसे दिन-रात अतिरिक्त काम लिया जाता है। लेकिन मेहनताना एक रुपये नहीं मिलता। यह हमारा मानसिक और शारीरिक शोषण है, जिसे अब और नहीं सहेंगे।दीपा बिष्ट
पोषण और टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण काम ठप होने की जिम्मेदारी सरकार की है। हम 12 सालों से मानदेय बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। अब खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, हमें ठोस शासनादेश चाहिए।कमला आर्याहमें क्षेत्र में सर्वे के लिए भेजा जाता है, लेकिन न किराया भत्ता मिलता है न ईंधन का पैसा। राशन की ढुलान का खर्च भी हमारी जेब से जाता है। सरकार को हमारी समस्याओं की कोई फिक्र नहीं है।सुशीला देवी अधिकारी हमें डराने के लिए नोटिस जारी कर रहे हैं। जब समाधान के लिए बैठक बुलानी चाहिए, तब वे कार्रवाई की धमकी देते हैं। हम इस बार इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं, लड़ाई जारी रहेगी।मीनाक्षी भट्टऑनलाइन मॉनिटरिंग के नाम पर हमें 24 घंटे परेशान किया जाता है। नेट रिचार्ज खत्म हो जाए तो स्पष्टीकरण मांग लिया जाता है। हमें प्रतिमाह उचित डेटा भत्ता दिया जाना चाहिए ताकि ऑनलाइन रिपोर्टिंग हो सके।पुष्पा कांडपाल बीएलओ ड्यूटी के कारण आंगनवाड़ी का मूल काम प्रभावित होता है। हम पर काम का दोगुना बोझ है और मानदेय आधा भी नहीं। या तो अतिरिक्त काम बंद हो या उसका अलग से भुगतान किया जाए।हेमा बोरा 12 साल में महंगाई कहां से कहां पहुंच गई, लेकिन हमारा मानदेय वहीं खड़ा है। क्या सरकार को हमारी स्थिति नहीं दिखती? 1 अप्रैल से हमने काम बंद कर दिया है, अब फैसला मुख्यमंत्री के हाथ में है।इंद्रा बिष्टहम गरीब तबके की महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। पोषण ट्रैकर पर काम बंद करना हमारा पहला कदम था। अब तालाबंदी से सरकार को समझ जाना चाहिए कि हमारा धैर्य जवाब दे चुका है।ज्योति बिष्टहम पिछले 12 वर्षों से मानदेय बढ़ने का इंतज़ार कर रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं। जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, केंद्रों के ताले नहीं खुलेंगे।ललिता नयाल आंगनबाड़ी का काम बच्चों को पोषण देना है, लेकिन हमसे बीएलओ और सर्वे जैसे अतिरिक्त काम जबरन कराए जा रहे हैं। इन कामों का न तो पैसा मिलता है और न ही सम्मान। हम अब और शोषण नहीं सहेंगे।नीरू सम्मल फेस कैप्चर और ऑनलाइन फीडिंग के लिए विभाग ने फोन तो थमा दिए, पर नेटवर्क और डेटा का कोई ठिकाना नहीं। अपनी जेब से पैसे भरकर सरकारी रिपोर्ट भेजना हमारे साथ सरासर अन्याय है। हमें उचित इंटरनेट भत्ता चाहिए।यासमीनअधिकारी केवल नोटिस जारी करना जानते हैं। जब हम अपनी समस्या लेकर जाते हैं, तो समाधान के बजाय कड़ी कार्रवाई की धमकी दी जाती है। प्रशासन का यह संवेदनहीन रवैया कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ रहा हैशबनम
बोले जिम्मेदार
आंगनबाड़ी कार्यकर्ती/सेविका की हड़ताल के संबंध में जानकारी है। मामले में उच्च अधिकारियों को पत्राचार कर हड़ताल के बारे में बताया गया है। रेनू मर्तोलिया, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी
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