बिना मंजूरी भूजल इस्तेमाल करने पर दोगुना जुर्माना; देहरादून-हरिद्वार और नैनीताल में कड़े प्रतिबंध
Kaam ki Khabar: उत्तराखंड में भूजल इस्तेमाल को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल में कड़े प्रतिबंध जारी रहेंगे। बिना मंजूरी भूजल इस्तेमाल पर दोगुना जुर्माना लगेगा।

Kaam ki Khabar: उत्तराखंड में सरकार ने भूजल के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर नई नीति लागू कर दी है। इसके तहत अब उद्योग, हाउसिंग सोसायटी और व्यावसायिक संस्थानों को भूजल के उपयोग के लिए सिंचाई विभाग से पांच हजार रुपये का शुल्क देकर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य हो गया है। बिना मंजूरी इस्तेमाल पर दोगुना जुर्माना लगेगा। देहरादून-हरिद्वार और नैनीताल में कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
नई व्यवस्था में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्षा जल संचयन और पानी के पुनर्चक्रण (रिसाइकिल) एवं इसके दोबारा उपयोग (रियूज) को प्रोत्साहन दिया जाएगा। जो भी संस्थान पानी को रि-जनरेट, रि-साइकिल और रि-यूज करने वाले संयंत्र लगाकर 25% तक पानी बचाएंगे, उन्हें भूजल शुल्क में 10 प्रतिशत तक छूट मिलेगी। एनओसी के बिना भूजल उपयोग पर दोगुना तक जुर्माना लगेगा।
भूजल उपलब्धता के आधार पर चार कैटेगरी
सरकार ने भूजल उपलब्धता के आधार पर चार श्रेणियां तय की हैं, जिनमें सुरक्षित, अर्द्ध गंभीर, गंभीर और अतिदोहित क्षेत्र शामिल हैं। उद्योगों की तीन श्रेणियां- प्रोसेस इंडस्ट्री, पानी को कच्चे माल के रूप में उपयोग करने वालीं और अन्य इकाई भी बनाई गई है। 50 घनमीटर से पांच हजार घनमीटर रोजाना से अधिक पानी उपयोग करने वालों के लिए अलग अलग दरें निर्धारित की गई हैं। 300 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाले भूखंड पर वर्षा जल संरक्षण प्रणाली को लगाना जरूरी कर दिया गया है। इतना ही नहीं, भूजल के उपयोग की निगरानी के लिए उत्तराखंड जल प्रबंधन एवं नियामक आयोग के गठन तक यह जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है।
अतिदोहित क्षेत्रों में सीमित होगी भूजल की निकासी
नई नीति के अनुसार, अतिदोहित क्षेत्रों में अधिकतम एक हजार घनमीटर तक भूजल उपयोग की सशर्त अनुमति दी जाएगी। इससे अधिक भूजल दोहन प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, पेयजल उपयोग के लिए एनओसी तभी जारी होगी, जब स्थानीय स्तर पर जल संस्थान या पेयजल निगम आवश्यक जलापूर्ति उपलब्ध नहीं करा पा रहे हों।
प्रति घनमीटर प्रतिदिन भूजल के उपयोग की दरें
नई नीति के तहत भूजल उपयोग के लिए अलग-अलग क्षेत्रों और उद्योगों के अनुसार शुल्क तय किया गया है। सुरक्षित क्षेत्रों में प्रोसेस इंडस्ट्री को 1 से 3 रुपये, अन्य उद्योगों को 1 से 10 रुपये और व्यावसायिक उपयोग के लिए 1 से 5 रुपये प्रति घनमीटर प्रतिदिन शुल्क देना होगा। अर्द्ध गंभीर क्षेत्रों में यह दरें बढ़कर क्रमशः 2 से 4 रुपये, 2 से 20 रुपये और 2 से 8 रुपये होंगी। गंभीर क्षेत्रों में प्रोसेस इंडस्ट्री के लिए 3 से 6 रुपये, अन्य उद्योगों के लिए 4 से 60 रुपये और कमर्शियल उपयोग के लिए 4 से 10 रुपये प्रति घनमीटर शुल्क तय किया गया है। वहीं अतिदोहित क्षेत्रों में सबसे अधिक दरें लागू होंगी, जहां प्रोसेस इंडस्ट्री को 4 से 7 रुपये, अन्य उद्योगों को 8 से 120 रुपये और व्यावसायिक उपयोग के लिए 6 से 20 रुपये प्रति घनमीटर प्रतिदिन शुल्क देना होगा।
दून-हरिद्वार और नैनीताल में कड़े प्रतिबंध जारी रहेंगे
देहरादून-हरिद्वार और नैनीताल के अति दोहित क्षेत्रों में भूजल दोहन पर कड़े प्रतिबंध लागू रहेंगे। बता दें कि, उत्तराखंड में हरिद्वार के भगवानपुर और लक्सर, देहरादून के अपर जोन राजपुर रोड और सहस्रधारा रोड क्षेत्र, जबकि नैनीताल के काठगोदाम और गोलापार क्षेत्र अतिदोहित श्रेणी में शामिल हैं।
इन कमर्शियल संस्थानों पर पड़ेगा सीधा असर
नई नीति लागू होने के बाद कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, वाटर एम्यूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई केंद्र, स्वीमिंग पूल संचालन, बिल्डर, वेडिंग प्वाइंट, होटल, मिनरल वाटर, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम और बर्फ निर्माता इकाइयों के साथ ही हाउसिंग सोसायटी और आवासीय अपार्टमेंट भी सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
सरकार के कड़े निर्देश हैं कि एनओसी की शर्तों का उल्लंघन करने पर सीलिंग और बिजली कनेक्शन काटने के साथ ही कानूनी कार्रवाई तक का प्रावधान किया गया है।
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