केदारनाथ में उमड़ी भारी भीड़ के बीच नियमों को तोड़ते दिखे श्रद्धालु, वायरल वीडियों को देख लोगों ने लगाई क्लास
कुछ लोगों ने अव्यवस्था के लिए भीड़ को ही दोषी ठहराया। एक व्यक्ति ने लिखा, जब आप लोगों में जरा भी सब्र नहीं है, तो आप वहां जाते ही क्यों हैं? जब आप लोगों को भेड़ों की तरह एक-दूसरे के पीछे भागने की आदत पड़ चुकी है, तो इसमें सरकार भला क्या कर सकती है?

चारधाम यात्रा शुरू होने के साथ ही बाबा केदारनाथ के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। इस दौरान 22 अप्रैल को मंदिर के कपाट खुलते ही पहले ही दिन करीब 38,000 भक्तों ने मंदिर के दर्शन किए। हालांकि, इतनी भारी भीड़ के एक साथ पहुंचने की वजह से इंतजाम कम पड़ गए और लोगों को संभालना मुश्किल हो गया। साथ ही लोगों की अनुशासनहीनता की वजह से मंदिर परिसर के आसपास भारी अराजकता का माहौल देखने को मिला।
न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार पहले दिन मंदिर परिसर में उमड़ी भारी भीड़ के बीच वहां का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वहां दर्शन के लिए लाइन में लगे भक्त और व्यवस्था को भंग कर बीच में घुसते हुए कुछ लोग नजर आ रहे हैं। जो वीडियो क्लिप सामने आई है, वह कुल 23 सेकंड की है और उसमें लाइन में खड़े भक्तों के बीच लोगों को बैरिकेड्स पर चढ़ते, धक्का-मुक्की करते और लाइन में घुसने की कोशिश करते देखा जा सकता है।
इस बीच जब कई लोग बैरिकेड्स फांदकर जबरन लाइन में घुस जाते हैं, तो वहां आसपास खड़े लोग और एक महिला उनमें से एक शख्स पर गुस्सा निकालते हुए उसकी बुरी तरह पिटाई कर देते हैं। दरअसल उन लोगों ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उस लाइन में ठीक से खड़े होने की जगह भी नहीं थी, वे एक-दूसरे से बिल्कुल सटकर खड़े हुए थे और यहां तक कि उनके हिलने-डुलने में भी दिक्कत हो रही थी। इसी वजह से जब कुछ लोग जबरन उनके बीच में घुस गए तो उनका धैर्य जवाब दे गया।
इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर करते हुए एक यूजर ने गुस्से में लिखा, 'भाई इन जैसे लोगों के तो हाथ-पैर तोड़ देने चाहिए, इस देश को भारी पेनल्टी वाला देश बनाना होगा, तभी ये सुधरेंगे।' आगे इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने इस वीडियो पर तरह-तरह के कमेंट्स करते हुए अपना गुस्सा निकाला। इस दौरान यूजर्स दो गुटों में बंटे नजर आए। कुछ ने सरकारी इंतजामों को कोसा, तो कुछ ने श्रद्धालुओं के धैर्य की कमी को जिम्मेदार ठहराया।
एक यूजर ने इतनी भीड़ उमड़ने के लिए रील्स बनाने वालों को जिम्मेदार बताते हुए कमेंट में लिखा, 'यहां से पता चल रहा है, रील्स का क्या असर होता है, वहां मौजूद ज्यादातर लोग रील्स के लिए गए हैं। मेरी बात मानो तो रील का युग शुरू होने से पहले केदारनाथ मंदिर में इतनी भीड़ नहीं उमड़ती थी।'
एक महिला यूजर ने लिखा, 'ऐसे में क्या श्रद्धा रह जाएगी, जब स्थिति इतनी भीड़भाड़ वाली हो तो वहां जाना बेकार है। घर पर बैठ कर ही पूजा करने में भलाई है।'
एक अन्य यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, 'मेरे घर के पास एक छोटा सा शिव मंदिर है,अगर कर्म अच्छे हैं तो भगवान हर जगह है, अगर कर्म गंदे हैं तो केदारनाथ, बदरीनाथ जाने से कुछ नहीं होने वाला।'
एक यूजर ने लिखा, 'नहाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाए। मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाए॥ अगर मन की गंदगी दूर न हो, तो विधि-विधान से स्नान करने का क्या लाभ? मछली सदा जल में ही रहती है, किंतु उसकी गंध कभी नहीं जाती।'
एक अन्य यूजर ने लिखा, 'भारतीय सामान्य जन सामाजिक दायित्व निर्वहन के न्यूनतम स्तर पर सदा से रहते आए हैं, जो यहां भी दिख रहा है। सफाई, सड़क पर गाड़ी चलाना या भीड़ भरे स्थान पर संयम व नियमपूर्वक रहना हमने कभी सीखा ही नहीं है। अत्यंत दुखद।'
उधर एक अन्य यूजर ने लिखा, 'भोले बाबा मन और मान के है घर पर भी अगर सच्चे मन से याद करोगे तो आपके साथ आ जाएंगे। आजकल तीर्थस्थल कमाई के चक्कर में पागल हो चुके हैं और ये आदमी को आदमी नहीं समझते।'
एक और यूजर ने ऐसे श्रद्धालुओं की श्रद्धा पर सवाल उठाते हुए लिखा, 'बताओ , हर जगह मंदिरों मैं लाइन लगी होती है, इन लोगों को अलग ही vip ट्रीटमेंट चाहिए। कोई गर्मी भी नहीं कुछ नहीं, आराम से रहें लाइन में, इन्हें लगता है महादेव सुनेंगे इनकी।' एक अन्य शख्स ने लिखा, 'क्यों जाते तुम लोग जब तुम्हारे में सब्र नहीं है तो, सरकार करे तो क्या करे, जब आदत हो भेड़ के जैसी तो इंसान कहाँ से बनोगे, भगवान ने कहाँ बोला की, आज के आज सभी एकसाथ आओ यहाँ..!!'
एक यूजर ने इस अव्यवस्था के लिए सरकार को दोषी बताते हुए लिखा, 'सरकार की गलती है, सब जानती है, आम जनता को मरने के लिए छोड़ देती है बाहर वालों के साथ।' एक अन्य यूजर ने लिखा, 'अगर मनुष्य दर्शन करने भक्ति भाव से नही जा पा रहा तो उसे जाना ही नही चाहिये। असली भक्ति रास्ते मे ही दिखती है। किसी के सर पर पैर रखकर उसको कुचलकर तुम 2 घंटे पहले भगवान के दर्शन कर लोगे तो भगवान खुश तो नही ही होंगे। अगर क्षमता नही है तो मत जाओ। घर के पास के शिवमंदिर मे मन से जाओ।'
कई भक्तों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद मुश्किल से 5 सेकंड के लिए दर्शन मिल पाते हैं। इतनी धक्का-मुक्की और शोर-शराबे के बीच शांति और आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस करना लगभग असंभव हो गया है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन