उत्तराखंड में स्कूलों की तर्ज पर चलेंगे मदरसे, तलबा बनेंगे डॉक्टर-इंजीनियर, ये बनी नई व्यवस्था
उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। 452 मदरसे अब स्कूलों की तर्ज पर संचालित होंगे। बच्चों को कक्षा आठ तक सामान्य शिक्षा मिलेगी और बाद में धार्मिक तालीम दी जाएगी। इससे मुस्लिम बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनने में सक्षम होंगे।
उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया जा रहा है। यहां पर 452 मदरसे स्कूलों की तर्ज पर संचालित होंगे। स्कूलों की तरह तालीम हासिल कर तलबा भी डॉक्टर और इंजीनियर बनेंगे। वर्तमान में प्रदेश भर में कुल 458 मदरसे संचालित हो रहे हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शनिवार को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने मदरसा शिक्षा को लेकर वीडियो बयान जारी किया। उन्होंने कक्षा आठ तक के मदरसों को जिला स्तर और नौवीं से 12वीं तक मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता देने की नई व्यवस्था का स्वागत किया।
मदरसा बोर्ड के भंग होने और अल्पसंख्यक प्राधिकरण के गठन से प्रदेश के गरीब मुस्लिम बच्चे अब केवल मजहबी तालीम तक ही सीमित नहीं रहेंगे। बच्चे हाफिज-ए-कुरान बनने के साथ आधुनिक शिक्षा हासिल कर डॉक्टर और इंजीनियर बन सकेंगे। अब छोटे मदरसे भी सामान्य स्कूलों की तर्ज पर संचालित किए जाएंगे। मदरसों में सुबह से दोपहर तक उत्तराखंड बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार आधुनिक शिक्षा दी जाएगी, उसके बाद बच्चों को धार्मिक तालीम मिलेगी। इस सकारात्मक बदलाव को एक नई क्रांति बताया। मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी समाज के अन्य वर्गों के बच्चों के साथ कदमताल कर सकेंगे और मुख्यधारा से जुड़ेंगे।
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