गौवंश को राष्ट्रीय सम्मान देने की मांग को लेकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन
नई टिहरी में गौ सम्मान अभियान के तहत स्थानीय गौ भक्तों और नागरिकों ने गायों को राष्ट्रीय सम्मान देने की मांग की। रैली के बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन प्रेषित किया गया, जिसमें केंद्रीय गो सेवा मंत्रालय की स्थापना और गोवंश के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की गई।
नई टिहरी। गौ सम्मान अभियान के तहत टिहरी के स्थानीय गौ भक्तों, नागरिकों व संतों ने गाय व गौवंश को राष्ट्रीय सम्मान दिए जाने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय के मुख्य मार्गों से होते हुए रैली निकालकर जनजागरूता की। जिसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचकर गौ वंश के सम्मान को लेकर प्रदर्शन करते हुए स्थानीय प्रशासन की मदद से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति व राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई, कि सम्पूर्ण भारत में अखिल वेदलक्षणा गोमाता (सम्पूर्ण देशी गोवंश) की विधिवत सेवा, पूर्ण सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने के लिण् केंद्रीय कानून बनाने और गो पालन मंत्रालय स्थापना की मांग की गई।
बताया कि भारतीय देशी गोवंश हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। जब तक गोमाता असुरक्षित है, तब तक हमारी सांस्कृतिक पूर्णता अधूरी है। जिस प्रकार आपने काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक आभा को पुनर्जीवित किया है, उसी प्रकार गोमाता को राष्ट्रीय सम्मान देकर भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के इस महायज्ञ की पूर्णाहुति कर सकते हैं। मांग कर कहा कि एकीकृत केंद्रीय कानून एवं स्वतंत्र मंत्रालयः संविधान के अनुच्छेद 48 के तहत गो-संरक्षण राज्य का विषय है, कुछ राज्यों ने गोवध पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया भी है, किंतु कई राज्यों की असमर्थता अथवा अरुचि को देखते हुए केंद्र सरकार संविधान में आवश्यक संशोधन करते हुए केन्द्रीय गो सेवा एवं संरक्षण अधिनियम लागू करें। समस्त गो वधशालाओं (कसाईखाने) के लाइसेंस निरस्त हो और वधशालाओं पर शीघ्र अति कठोर कार्रवाई हो इसके क्रियान्वयन हेतु स्वतंत्र केंद्रीय गो सेवा मंत्रालय और स्पेशल टास्क फोर्स का गठन हों। संवैधानिक सर्वोच्चता में देशी गोवंश को राष्ट्रमाता या राष्ट्र आराध्या के रूप में आधिकारिक संवैधानिक मान्यता प्रदान कर उसे विशेष राष्ट्रीय संरक्षण दिया जाए। कठोर दंडात्मक प्रावधान गो तस्करी और गो वध को संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखकर आजीवन कारावास तथा अपराध में संलिप्त दोषियों की संपत्ति कुर्क करने का कठोर विधिक प्रावधान हो। आर्थिक आत्मनिर्भरता पंचगव्य (गोबर-गोमूत्र) अनुसंधान को बढ़ावा देकर इन्हें प्राकृतिक कृषि के लिए जैविक खाद, कीटनाशक और औषधि के रूप में सरकारी खरीद तंत्र से जोड़ा जाएं। स्कूलों में मिड-डे मील व मंदिरों के प्रसाद में केवल देशी गो-घृत व दुग्ध का उपयोग अनिवार्य हों सहित कई अन्य मांगें की। इस मौके पर शांति प्रसाद भट्ट, कुलदीप पंवार, विक्रम कठैत, मीना सरोजनी, सुमित, मनोरमा, संगीता, शांति सहित दर्जनों शामिल रहे।
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