चारधाम यात्रा शुरू पर संकट के बादल मंडराए! केंद्र से अब तक नहीं मिला LPG कोटा
Chardham Yatra Lpg Crisis: 19 अप्रैल को चारधाम यात्रा का आगाज तो हो गया, लेकिन यात्रा शुरू होते ही एलपीजी संकट गहरा गया है। अभी तक केंद्र से एलपीजी का कोटा नहीं पहुंचा है।

Chardham Yatra Lpg Crisis: चारधाम यात्रा का आगाज हो चुका है, लेकिन मिडिल ईस्ट तनाव के कारण उपजे गैस संकट के बीच केंद्र से अतिरिक्त एलपीजी कोटा अभी तक नहीं मिल पाया है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में अगले कुछ दिन में स्थिति विकट होने के आसार बन रहे हैं। इस बीच रविवार को चारधाम यात्रा का आगाज हो गया। अक्षया तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट खोले गए। आगामी 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे।
पीएम मोदी के नाम पर पहली पूजा
मां गंगा की डोली सुबह रविवार लगभग सात बजे भैरव घाटी स्थित भैरव मंदिर से गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई और करीब नौ बजे मंदिर परिसर पहुंची। यहां तीर्थ पुरोहितों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा कर 12:15 बजे कपाट खोल दिए। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धाम में मौजूद रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से मां गंगा की पहली पूजा की। साथ ही उन्होंने चारधाम यात्रा की सफलता और देश-प्रदेश के लिए सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
यात्रा रूटों पर गैस संकट
यात्रा रूट से जुड़े जिलों में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ होटल और ढाबा संचालक अब पुराने दौर की तरह लकड़ी के चूल्हों और डीजल भट्टियों के सहारे काम चलाने को मजबूर हैं। राज्य को पूरी चारधाम यात्रा के लिए 10 लाख से अधिक गैस सिलेंडर की जरूरत है। यह डिमांड केंद्र सरकार भेजी गई है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार से चारधाम यात्रा के लिए कोटा जारी नहीं होने से यात्रा रूट पर मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
15 दिनों में 1.5 लाख सिलेंडरों की जरूरत
खाद्य आपूर्ति सचिव आनंद स्वरूप के मुताबिक केंद्र से अतिरिक्त कोटा मिलते ही सप्लाई सामान्य हो जाएगी। यात्रा के शुरुआती 15 दिनों में लगभग डेढ़ लाख अतिरिक्त सिलेंडरों की जरूरत होगी। समय रहते आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो परेशानी होगी।
रुद्रप्रयाग को सात हजार कॉमर्शियल सिलेंडर की जरूरत
रुद्रप्रयाग जिले में कॉमर्शियल सिलेंडरों का बैकलॉग सात हजार से अधिक का चल रहा है। घेरलू गैस की आपूर्ति भी सामान्य नहीं हो पाई है और 15 हजार परिवार सिलेंडर मिलने के इंतजार में हैं। कामर्शियल के लिए आवेदन करने वालों को पांच किलो का सिलेंडर थमाया जा रहा है।
यात्रा शुरू होने पर भी नहीं पहुंचे सिलेंडर
गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुल गए हैं, लेकिन दोनों ही रूट पर जरूरत के हिसाब से गैस सिलेंडर नहीं पहुंच पाए हैं। गंगोत्री रूट पर स्थित हर्षिल घाटी में पिछले दो महीनों से आपूर्ति ठप है। होटल व्यवसायियों का कहना है कि एडवांस भुगतान के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए ढाबा संचालक अब महंगे डीजल और लकड़ी का इंतजाम कर रहे हैं।
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