Bageshwar Villages Ravaged in Illegal Mining Uttarakhand High Court Strict Order GPS Mandatory in Every Mining Vehicle उत्तराखंड में खनन से उजड़ते गांव, HC ने स्वत: लिया संज्ञान- हर वाहन में GPS अनिवार्य, Uttarakhand Hindi News - Hindustan
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उत्तराखंड में खनन से उजड़ते गांव, HC ने स्वत: लिया संज्ञान- हर वाहन में GPS अनिवार्य

बागेश्वर जिले के कांडा तहसील में अवैध खनन से मकानों में दरारें पड़ गई हैं। खेत-खलिहान उजड़ गए हैं। ग्रामीणों की शिकायत का उत्तराखंड हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। हर वाहन में जीपीएस अनिवार्य कर दिया है।

Tue, 6 Jan 2026 08:56 AMGaurav Kala नैनीताल, पीटीआई
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उत्तराखंड में खनन से उजड़ते गांव, HC ने स्वत: लिया संज्ञान- हर वाहन में GPS अनिवार्य

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बागेश्वर जिले के कई गांवों में सोपस्टोन (खैरा) खनन के कारण मकानों में दरारें पड़ने के मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने निर्देश दिए कि खनन में इस्तेमाल होने वाले सभी वाहनों में डेटा संग्रह के लिए GPS सिस्टम लगाया जाए। ग्रामीणों ने अवैध खनन से हो रहे नुकसान को लेकर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अवगत कराया था। मुख्य न्यायाधीश ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोहराया कि उत्तराखंड में खड़िया खनन को नियंत्रित करने वाले प्रावधानों के तहत खनन कार्यों में लगे सभी वाहनों में जीपीएस प्रणाली अनिवार्य है। साथ ही इन जीपीएस प्रणालियों को रामन्ना पोर्टल से एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि पोर्टल के माध्यम से वाहनों की आवाजाही और खनिज परिवहन से जुड़ा पूरा डेटा ट्रैक किया जा सके।

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गंभीर अनियमितताओं का खुलासा

अदालत के समक्ष बागेश्वर जिला खनन अधिकारी की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में खनिज परिवहन में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में 55 किलोमीटर की दूरी को 12 से 18 घंटे में तय करना दर्शाया गया, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने नियमों के सख्ती से पालन की मांग की।

हाई कोर्ट की सख्ती

इस पर खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि संबंधित नियमों को एक सप्ताह के भीतर प्रभावी रूप से लागू किया जाए। साथ ही राज्य सरकार को अपने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की सहायता से ऐसी व्यवस्था विकसित करने को कहा गया है, जिससे पूरे राज्य में खनन नीति का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा था पत्र

गौरतलब है कि कांडा तहसील के ग्रामीणों ने अवैध खड़िया खनन से हो रहे नुकसान को लेकर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अवगत कराया था। पत्र में कहा गया था कि खनन गतिविधियों के कारण गांवों में खेती, मकान, पेयजल आपूर्ति लाइनें और अन्य बुनियादी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, आर्थिक रूप से संपन्न लोग हल्द्वानी और अन्य शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं, जबकि गांवों में अब मुख्य रूप से गरीब और असहाय लोग ही रह गए हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खड़िया खनन में संलिप्त लोगों के कारण उनकी आजीविका के साधन खतरे में पड़ गए हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

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