केजीएमयू धर्मांतरण कांड में जाकिर नाइक कनेक्शन, गैंग के पास से किताबें, वीडियो मिले
लखनऊ के केजीएमयू धर्मांतरण मामले के आरोपित भी आगरा धर्मांतरण गैंग के सदस्यों की तरह विवादित इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक के वीडियो से प्रेरित थे। एसटीएफ की जांच कुछ इसी तरह आगे बढ़ रही है।

लखनऊ के केजीएमयू धर्मांतरण मामले के आरोपित भी आगरा धर्मांतरण गैंग के सदस्यों की तरह विवादित इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक के वीडियो से प्रेरित थे। आगरा में पकड़े गए गैंग के कब्जे से मौलाना कलीम सिद्दीकी की विवादित पुस्तकें बरामद हुईं थी। मोबाइल में जाकिर नाइक के भड़काऊ वीडियो मिले थे। लखनऊ मामले में एसटीएफ की जांच भी कुछ इसी तरह आगे बढ़ रही है। आगरा में पकड़े गए धर्मांतरण गैंग का मकसद गजवा ए हिंद की परिकल्पना था। एसटीएफ ने चार मौलानाओं को रडार पर लिया है। आरोप है कि उनका एसएन मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में आना जाना था। सदर की सगी बहनों के धर्मांतरण मामले में पुलिस ने पाकिस्तानी कनेक्शन खोज निकाला था। छह राज्यों में दबिश देकर 14 आरोपित पकड़े गए थे। गैंग का मास्टर माइंड अब्दुल रहमान कुरैशी था।
पुलिस ने उसे दिल्ली से पकड़ा था। उसने खुद अपना धर्मांतरण किया था। पहले ईसाई बना था। मजा नहीं आया तो मुस्लिम बन गया। महेंद्र पाल जौदान उर्फ पप्पू से नाम बदलकर अब्दुल रहमान रख लिया था। वह मौलाना कलीम सिद्दीकी का चेला था। मौलाना कलीम सिद्दीकी के पकड़े जाने के बाद उसने गिरोह की कमान संभाल ली थी। आगरा पुलिस की विवेचना में यह निकलकर आया था कि गैंग का मकसद गजवा ए हिंद था।
ब्रेनवॉश के बाद धर्मांतरण कराया जाता था। विश्वासपात्र बनने के बाद उन्हें गैंग में शामिल करके नई जिम्मेदारियां दी जाती थीं। गैंग को विदेशों से फंडिंग मिलती थी। लखनऊ केजीएमयू मामले के मुख्य आरोपित डॉ. रमीज आगरा में पढ़ा था। सूत्रों की मानें तो आरोपियों के मोबाइल में जाकिर नाइक के विवादित वीडियो मिले हैं। ऐसे ही वीडियो आगरा पुलिस द्वारा पकड़े गए धर्मांतरण गैंग के आरोपियों के मोबाइल से मिले थे।
दोनों घटनाओं से जांच एजेंसियां यह मानकर चल रही हैं कि भारत में बड़े स्तर पर धर्मांतरण गैंग सक्रिय हैं। उनके निशाने पर हिंदू युवतियां हैं। पहले उन्हें जाल में फंसाया जाता है। उनका धर्मांतरण कराया जाता है। बाद में वे गैंग के लिए काम करने लगती हैं। बहुत कम युवतियां आवाज उठाती हैं। जब आवाज उठती है तो एक गैंग के कुछ सदस्य बेनकाब हो जाते हैं। धर्मांतरण गैंग की जड़ें बहुत गहरी हैं।
आगरा धर्मांतरण गैंग से पूछताछ करने आईबी और एनआईए की टीम भी आई थी। आगरा पुलिस ने पूरे खुलासे का एनआईए के समक्ष प्रस्तुतीकरण भी दिया था। उस दौरान जांच में पाकिस्तानी कनेक्शन निकला था। जम्मू कश्मीर से तार जुड़े थे। लखनऊ गैंग में पढ़े लिखे लोग शामिल हैं। ज्यादातर डॉक्टर हो सकते हैं। इसलिए एसटीएफ ने वर्ष 2012 से अब तक एसएन मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वालों की सूची मांगी है।
सूची के मिलने के बाद उसे शार्ट लिस्ट किया जाएगा। सर्विलांस और साइबर सेल की मदद से चिन्हित आरोपियों का डाटा जुटाया जाएगा। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ आगरा टीम ने चार मौलानों के बारे में छानबीन शुरू कर दी है। उनका पिछले दस साल का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
रमीज के करीबियों ने फार्मेट किए फोन, उड़ा दी चैट हिस्ट्री
लखनऊ (सौरभ शुक्ल)। यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोपी केजीएमयू के डॉक्टर रमीज मामले में पुलिस के साथ एसटीफ ने जांच शुरू कर दी है। मामले में शिकंजा कसते देख रमीज के करीबी मेडिकल स्टाफ और उससे जुड़े लोगों ने अपने मोबाइल फार्मेट कर दिए। डॉक्टर रमीज से व्हाट्सएप पर हुई चैट को डिलीट कर दी।
रमीज के जेल जाने और प्रकरण की तफ्तीश तेजी से आगे बढ़ती और मामले को तूल पकड़ता देख केजीएमयू कई विभागों का माहौल एकदम शांत है। पैथॉलाजी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन के साथ ही अन्य फैकेल्टी के डॉक्टर और कर्मचारियों ने एक दूसरे से बातचीत तक कम कर दी है। केजीएमयू, आगरा, बस्ती समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर और कर्मचारी इस्लामिक मेडिकोज का व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने लगे हैं अथवा उसमें कमेंट और पोस्ट बंद दिया है।
डॉक्टर रमीज के कई करीबी अंडरग्राउंड हो गए हैं। वहीं, डॉक्टर रमीज का एक करीबी रेजिडेंट जो दो हिंदू महिला डॉक्टरों पर नजर रखे था। उसने भी उनसे दूरी बना ली है। प्रकरण के पहले रेजिडेंट जहां उन महिला स्टाफ से घंटों बातचीत कर खान-पान करता था। अब वह ईदगिर्द तक नहीं भटक रहा है। कोशिश भी यह करता है कि उनके समय में उसकी ड्यूटी ही न लगे। हालांकि जांच एजेसियों ने रमीज के करीबियों का डाटा जुटा लिया है। काल डिटेल्स के आधार पर उनसे जल्द ही पूछताछ करेगी। जरूरत पड़ने पर उनके मोबाइल जब्त कर टीमें डेटा भी रिकवरी कराया जाएगा।




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