तुम्हारा बेटा पहलगाम हमले में शामिल था..., डिजिटल अरेस्ट के बाद भी ऐसे बचे 15 लाख
यूपी के इटावा में एक रिटायर दंपति को उसके बेटे के पहलगाम आतंकी हमले में शामिल होने की बात कहकर सात घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा गया। बेटे को बचाने के लिए 15 लाख रुपए मांगे गए। दहशतजदा बुजुर्ग रुपए ट्रांसफर करने बैंक भी चला गया लेकिन कैशियर ने उनके 15 लाख बचा लिये।

तुम्हारा बेटा पहलगाम हमले में शामिल था। तुम्हारे परिवार पर देशद्रोह का मुकदमा चलेगा। सबको फांसी होगी। बचना है तो खाते में 15 लाख रुपये डाल दो। साइबर ठग ने खुद को दिल्ली का आईजी बताते हुए रिटायर दंपति को यह धमकी दी। सहमा दंपति सात घंटे तक उनकी ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रहा। दहशत इतनी थी कि दंपति ठग के खाते में रुपये भेजने के लिए बैंक पहुंच गया। उनकी घबराहट देख कैशियर को संदेह हुआ। उसने बैंक मैनेजर को सूचना दी, जिनकी सूझबूझ से दंपति के 15 लाख रुपये बच गए।
कस्बे के अरविंद गुप्ता ग्राम विकास संस्थान में लिपिक और उनकी पत्नी मधु गुप्ता शिक्षिका थीं। दोनों रिटायर हो चुके हैं। बेटा झांसी में नौकरी करता है। अरविंद गुप्ता बताते हैं-24 जुलाई की सुबह आठ बजे मुझे अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली का आईजी बताते हुए कहा कि तुम्हारा बेटा पहलगाम आतंकी हमले में शामिल था। मैंने उनसे बताया कि मेरा बेटा तो वहां पहुंच ही नहीं सकता। वह झांसी में नौकरी कर रहा है। इस पर उसने डपट दिया। कहा-तुम्हारा बेटा गलत संगत में है। आतंकी आसिफ अंसारी ने उसका नाम कबूला है।
इस पर हम पति-पत्नी घबरा गए। उसने फिर धमकाया कि आगे बहुत बुरा हाल होगा। तुम्हारे परिवार को देशद्रोह में फांसी होगी। तुम्हारा कनेक्शन पाकिस्तान से है। वहां से तुम्हारे खाते में फंडिंग भी हुई है। उसने धमका कर एकाउंट, आधार, पैन नंबर पूछ लिए। फिर कहा- तुम तो एटीएम नहीं चलाते हो। 15 लाख रुपये आधे घंटे के अंदर बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दो। इसके बाद उन्होंने इस बारे में किसी से बात न करने की हिदायत दी। लगातार वीडियो कॉल करते रहे। हम दोनों घबरा कर दोपहर दो बजे स्टेट बैंक पहुंचे।
बैंक में कैशियर इंद्रजीत यादव ने बताया कि बुजुर्ग मेरे काउंटर पर आरटीजीएस फॉर्म लेकर आए। 15 लाख की रकम और उनकी घबराहट से संदेह हुआ तो मैंने प्रबंधक ऋषिकेश मदनावत के पास भेज दिया। उनकी पूछताछ के दौरान ही साइबर ठग की वीडियो कॉल आ गई। ठग पुलिस की ड्रेस में था और बुजुर्ग को डांट रहा कि अभी तक पैसे क्यों नहीं ट्रांसफर हुए? मैंने बुजुर्ग से फोन ले कर पूछताछ की तो उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। इस तरह दंपति बड़े फ्रॉड से बच गए हैं।
महासंघ ने मैनेजर-कैशियर को सम्मानित किया
घटना की जानकारी होने पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश मंत्री, जिला अध्यक्ष जितेंद्र कुमार त्रिपाठी साथियों संग बैंक पहुंचे। उन्होंने प्रबंधक व कैशियर को सम्मानित किया। प्रबंधक ने कहा कि केवाईसी और ओटीपी पूछे जाने कतई नहीं बताएं। बैंक से ऐसी जानकारी नहीं ली जाती है। सम्मानित करने वालों में संजय त्रिपाठी, रामकृष्ण दुबे, नवनीत पांडे, शिवसागर, नीरज पाल, राहुल शुक्ला आदि उपस्थित रहे।




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