यूपी में फार्म-स्टे के लिए योगी सरकार की बड़ी पहल, निवेशकों को 40 करोड़ तक मिलेगी सब्सिडी
हर फार्म स्टे में पर्यटकों को ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव देने के लिए कृषि कार्य, बागवानी, मत्स्य पालन, डेयरी फार्मिंग, पशुपालन, फार्म टूर या अन्य स्वीकृत ग्रामीण गतिविधियां उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। पर्यटकों को खेती-बाड़ी, ग्रामीण संस्कृति और गांवों में आतिथ्य सत्कार का विशेष अनुभव मिलेगा।

योगी सरकार ने यूपी में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बड़ी पहल की है। प्रदेश के पर्यटन विभाग ने पहली बार प्रदेश में फार्म-स्टे आवास के लिए निवेशकों से प्रस्ताव मंगाए हैं। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि योजना के तहत परिभाषित फार्म स्टे ऐसा पर्यटक आवास है, जो खेत या उसके निकट बनाया जाएगा। यह आवास मालिक के घर से अलग होगा। इसमें कम से कम दो किराए पर देने योग्य कमरे और एक रिसेप्शन क्षेत्र अनिवार्य रूप से होगा। सरकार इस पर अधिकतम 40 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी देगी।
हर फार्म स्टे में पर्यटकों को ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव देने के लिए कृषि कार्य, बागवानी, मत्स्य पालन, डेयरी फार्मिंग, पशुपालन, फार्म टूर या अन्य स्वीकृत ग्रामीण गतिविधियां उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इस प्रकार आगंतुक के लिए पूरा गांव ही आकर्षण का केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि पर्यटकों को खेती-बाड़ी, ग्रामीण संस्कृति और गांवों में आतिथ्य सत्कार का विशेष अनुभव मिलेगा। फार्म-स्टे से पर्यटन को नई पहचान मिलेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।
ब्याज सब्सिडी भी मिलेगी
पर्यटन क्षेत्र में निवेश के लिए ब्याज सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पांच करोड़ तक के बैंक ऋण पर पांच फीसदी ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। एक निवेशक को प्रति वर्ष अधिकतम 25 लाख तक की सब्सिडी मिल सकेगी, जो पांच वर्षों तक लागू रहेगी। नई घोषणा के तहत स्टाम्प ड्यूटी, भूमि रूपांतरण शुल्क,विकास शुल्क पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
एक एकड़ भूमि वालों को नहीं मिलेगा कृषि पट्टा
यूपी में किसी व्यक्ति के पास एक एकड़ भूमि है तो उसे कृषि भूमि का पट्टा नहीं मिल सकेगा। इसके लिए इसके लिए राजस्व संहिता-2006 में संशोधन किया जा रहा है। इसके लिए उच्च स्तर पर सहमति बन गई है। मौजूदा व्यवस्था में 3.113 एकड़ तक की सीमा तक पट्टा पा सकते हैं और इस सीमा में उस व्यक्ति के पास पहले से मौजूद जमीन भी जोड़ी जाती है। जमीन की उपलब्धता में कमी को देखते हुए यह सहमति बनी है।




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