भाजपा के ब्राह्मण विधायकों का क्यों हुआ जुटान, बैठक में रहे दो MLA ने बताया; राजभर का तंज
अनिल त्रिपाठी ने कहा कि देश की आजादी के लिए ब्राह्मण समाज ने कुर्बानियां दी हैं। यह ऐसा वर्ग रहा है, जिसने भिक्षा लेकर शिक्षा देने का काम किया। इसके बाद भी समाज को कोई भी अपमानित करने का प्रयास करता है। सहभोज में हम लोगों के बीच इसे लेकर चर्चा हुई।

उत्तर प्रदेश की विधानसभा का सत्र एक बड़ी चर्चा के साथ समाप्त हुआ है। लखनऊ में सत्र में हिस्सा लेने आए भाजपा के ब्राह्मण विधायकों का सहभोज के नाम पर जुटान हुआ तो उसकी चर्चाएं तेज हैं। पिछले सेशन में कुटुंब के नाम से ठाकुर विधायक एक साथ नजर आए थे तो अब ब्राह्मणों के जुटान ने सत्ताधारी दल समेत सूबे की सियासत में कयासों को बल दिया है। वहीं इस सहभोज में ही शामिल रहे भाजपा के दो विधायकों का बयान आया है। उन्होंने कहा कि इस बैठक को लेकर ज्यादा कयास लगाने की जरूरत नहीं है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, जिसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू की जाएं।
भाजपा विधायक अनिल त्रिपाठी ने कहा कि इस बैठक में समाज को लेकर बात हुई और कुछ चिंताएं जाहिर की गई हैं। अनिल त्रिपाठी ने कहा कि देश की आजादी के लिए ब्राह्मण समाज ने कुर्बानियां दी हैं। यह ऐसा वर्ग रहा है, जिसने भिक्षा लेकर शिक्षा देने का काम किया। इसके बाद भी समाज को कोई भी अपमानित करने का प्रयास करता है। इस पर चर्चा हुई। इसके अलावा एक और विधायक रमेश मिश्रा ने कहा कि हमारे समाज का एक-एक वोटर भाजपा के साथ रहा है। हमने यह लक्ष्य रखा है कि 2027 में फिर से भाजपा को पूरी ताकत से समर्थन किया जाए।
उनकी यह बात अहम है क्योंकि बैठक में रहे ज्यादातर विधायकों को सीएम योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है। इस बीच ब्राह्मण विधायकों के जुटान को लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से भी सवाल हुआ। उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र होता है तो ज्यादातर विधायक एक-दूसरे से मिलते हैं। इसे अलग चश्मे से नहीं देखना चाहिए। कभी भी मेल-जोल गलत नहीं होता है। मीडिया के लोग जो चला रहे हैं, उसका कोई औचित्य ही नहीं है। इस तरह उन्होंने चर्चाओं को तवज्जो न देने की बात कही, लेकिन कयास यहीं समाप्त नहीं होते हैं।
राजभर का तंज- सपा ने ब्राह्मणों को कौन से हक दिए थे
एनडीए सरकार का हिस्सा ओम प्रकाश राजभर ने तो इस मीटिंग पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि सपा की जब सरकार थी तो ब्राह्मणों कौन से हक मिल गए। उन्होंने परशुराम जी की मूर्ति लगा दी थी, फिर झांकने भी नहीं गए। परशुराम की जयंती थी, लेकिन एक ट्वीट तक उन्होंने नहीं किया। फिर उनसे सवाल हुआ कि क्या ओबीसी विधायकों का भी जुटान होगा। इस पर उन्होंने कहा कि ओबीसी के लोग तो संतुष्ट हैं। फिर ऐसे जुटान करने की क्या जरूरत है। बता दें कि 2002 के चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने भगवान परशुराम की एक प्रतिमा का उद्घाटन किया था।

विधायकों की सुनवाई नहीं हो रही, इसलिए बैठक पर बैठक जारी: सपा
वहीं सपा के नेता संग्राम यादव ने कहा कि जनता सरकार से बेहद नाराज है। इससे पार्टी में हलचल है और भाजपा के लोगों के बीच ही बैठकों पर बैठकें हो रही हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ प्रतिनिधियों की बात नहीं सुन रहे हैं। इसलिए ऐसी मीटिंग हो रही हैं। कुछ दिन बाद कुछ और बैठकें भी सामने आएंगी।




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