Where did tradition of celebrating Jyeshtha Bade Mangal originate? Why are there so many Bhandara in Lucknow? Bada Mangal: बड़े मंगल को मनाने की परंपरा कहां से शुरू हुई? लखनऊ में क्यों लगते हैं इतने अधिक भंडारे, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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Bada Mangal: बड़े मंगल को मनाने की परंपरा कहां से शुरू हुई? लखनऊ में क्यों लगते हैं इतने अधिक भंडारे

Bada Mangal:  ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाले मंगलवारों को बड़ा मंगल कहा जाता है। बड़े मंगल पर पूरे लखनऊ में जगह-जगह भंडारे लगाए जाते हैं। आइए आपको बताते हैं कि इन भंडारों की शुरुआत किसने कराई।

Tue, 12 May 2026 02:59 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Bada Mangal: बड़े मंगल को मनाने की परंपरा कहां से शुरू हुई? लखनऊ में क्यों लगते हैं इतने अधिक भंडारे

Bada Mangal: बड़ा मंगल ज्येष्ठ माह के मंगलवार को भगवान हनुमान की पूजा, सेवा और दान-पुण्य के लिए मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही हनुमान जी और श्रीराम की पहली मुलाकात हुई थी। इसी दिन हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान भी मिला था। इस दिन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए भक्त विशेष पूजा और भंडारा लगाते हैं। वहीं नवाबों के शहर में हनुमान भक्ति और बड़े मंगल की अनोखी परंपरा है। यहां एक ऐसे नवाब हुए जो हनुमान जी के परम भक्त थे। नवाब वाजिद अली शाह, जिन्हें लखनऊ में बड़े मंगल की परंपरा शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। इस आस्था की डोर में केवल नवाब ही नहीं, बल्कि उनकी बेगमें भी बराबर की भागीदार रहीं।

नवाबों के शहर लखनऊ में ऐसे नवाब हुए हैं, जो हनुमान जी के बड़े भक्त थे। यह नवाब वाजिद अली शाह थे, जिन्होंने बड़े मंगल की शुरुआत करवाई थी। सिर्फ नवाब ही नहीं उनकी बेगमों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के जाने माने इतिहासकार स्वर्गीय इतिहासकार योगेश प्रवीन ने अपनी कृति लखनऊ नामा में लिखा है कि नवाब वाजिद अली शाह ने अलीगंज स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में भंडारा करवाया था।

लखनऊ के तेलीबाग में भंडारा

बेगम ने पुराने हनुमान मंदिर की मरम्मत करवाई थी, गुड़ और प्रसाद बांटा था

अवध के नवाब और उनकी बेगम ने इस खुशी में अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर की मरम्मत करवाई थी। जिसका काम ज्येष्ठ में पूरा हुआ था। इसके बाद पूरे लखनऊ में गुड़ और प्रसाद बांटा गया। बताया जाता है कि तभी से लखनऊ में बुढ़वा मंगल के दिन भंडारा कराने और प्रसाद बांटने की शुरुआत हुआ. लखनऊ में ज्येष्ठ मास के सभी मंगलवार पर जगह-जगह बड़े मंगल को मनाने की परंपरा कहां से शुरू हुई।

हजरतगंज में भंडारा

दूसरे मंगल पर भी लखनऊ में जगह-जगह भंडारे

इस बार ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल की शुरुआत 28 मई से हो चुकी है। इस साल आठ मंगल पड़ेंगे। बड़े मंगल को अवध क्षेत्र में लखनऊ में धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। राजधानी लखनऊ में जगह-जगह भंड़ारे होते हैं। हनुमान जी को पांच किलो बूंदी का भोग लगाया और चोला चढ़ाया जाएगा। दर्शन के लिए सुबह पांच बजे मंदिरों के कपाट खोल दिए जाते हैं और देर रात तक कपाट खुले रहते है। इसी क्रम में आज दूसरे मंगलवार पर जगह-जगह भंडारे लगाए गए हैं। इंदिरा नगर सेक्टर 25 में बड़े मंगल का भंडारा लगा। जहां वेद प्रकाश सिंह और ओपी सिंह ने श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटा। वहीं तेलीबाग बाजार श्री तंगाराम टावर भंडारा लगा है। हजरतगंज स्थित एलईसी मुख्यालय पर भंडारा लगाया गया।

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