VIDEO: काशी में गंगा के बीच शराब पार्टी! युवक ने नहाते हुए पी बीयर, वीडियो वायरल होने पर बवाल
वाराणसी में गंगा के बीच बीयर पीते एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो गंगा पार क्षेत्र का बताया जा रहा है। मामले में भाजपा काशी क्षेत्र विधि प्रकोष्ठ के संयोजक त्रिपाठी ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत कर दशाश्वमेध थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।

UP News: वाराणसी में गंगा के बीच बीयर पीने का मामला सामने आया है। एक युवक नहाते समय केन से बीयर पी रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो गंगा पार क्षेत्र का बताया जा रहा है। वहीं, मामले में भाजपा काशी क्षेत्र के विधि प्रकोष्ठ संयोजक शशांक शेखर त्रिपाठी ने पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल से शिकायत कर दशाश्वमेध थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
शिकायत में कहा गया है कि युवक का यह कृत्य सामाजिक मर्यादा और सार्वजनिक शालीनता के खिलाफ है तथा करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने कहा कि मां गंगा सनातन धर्म में पूजनीय हैं और गंगा तट आस्था, पूजा और साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे पवित्र स्थल पर खुलेआम शराब सेवन कर उसका प्रदर्शन करना धार्मिक वातावरण को दूषित करने जैसा है।
शिकायतकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि गंगा और धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश है और मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
नाव पर इफ्तार करने वाले 14 युवकों को हुई थी जेल
गौरतलब है कि इससे पहले नाव पर बैठकर बिरयानी पार्टी करने और गंगा में हड्डी फेंकने पर 14 युवकों को जेल हुई थी। हालांकि इसी महीने हाईकोर्ट ने सभी आरोपितों को जमानत दे दी थी। दरअसल, इस घटना के खिलाफ भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने 16 मार्च को वाराणसी के कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें उसने कहा था कि इस घटना से एक खास समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि 15 मार्च को गंगा नदी में एक नाव पर मुस्लिम समुदाय के व्यक्तियों ने रमजान तोड़ते हुए मांस खाया और अपशिष्ट गंगा नदी में फेंका। पुलिस ने पूजा स्थल को अपवित्र करने, धार्मिक भावनाएं भड़काने सहित बीएनएस की विभिन्न धाराएं लगाते हुए इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
इससे पूर्व, वाराणसी के सत्र न्यायालय ने एक अप्रैल को इन मुस्लिम युवाओं को जमानत देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि ऐसा प्रतीत होता है कि इन युवाओं का इरादा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का था। हालांकि बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा। जहां 15 मई को 8 और फिर 18 मई को बाकि के छह आरोपितों को जमानत दे दी गई। शेष छह आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर करते हुए न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने कहा, ‘इसी अपराध में आठ आरोपियों को 15 मई को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसलिए मौजूदा याचिकाकर्ता भी जमानत पाने के पात्र हैं।’




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