Water Crisis in Ramapura Ward Residents Demand Solutions बोले काशी- नलों में फोर्स कम, पानी खरीदने और ढोने में निकल रहा दम, Varanasi Hindi News - Hindustan
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बोले काशी- नलों में फोर्स कम, पानी खरीदने और ढोने में निकल रहा दम

Varanasi News - वाराणसी के रामापुरा वार्ड स्थित लौहरानी गली में पेयजल की भारी किल्लत है। लोग पानी खरीदने और दूर से लाने को मजबूर हैं। जर्जर सड़कें, गैस पाइपलाइन की कमी, आवारा पशुओं का आतंक और कूड़े की अनियमितता ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। क्षेत्रीय जनता प्रशासन से स्थायी समाधान की गुहार लगा रही है।

Fri, 29 May 2026 12:55 AMNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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बोले काशी- नलों में फोर्स कम, पानी खरीदने और ढोने में निकल रहा दम

वाराणसी। रामापुरा वार्ड स्थित लौहरानी गली और आसपास के इलाके इन दिनों बुनियादी समस्याओं के चक्रव्यूह में फंसे हैं। पेयजल की भारी किल्लत ने बाशिंदों को पानी खरीदने और दूर से ढोने पर मजबूर कर दिया है। जर्जर गलियां हादसों को दावत दे रही हैं। वर्षों बाद भी गैस पाइप लाइन का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। इसके साथ ही आवारा पशुओं का आतंक बना हुआ है। कूड़ा गाड़ी की अनियमितता ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। क्षेत्रीय जनता अब प्रशासन से इन मूलभूत समस्याओं के स्थायी समाधान की गुहार लगा रही है। लौहरानी गली के लोगों ने 'हिन्दुस्तान' के साथ अपनी पीड़ा साझा की। मंजू देवी बोलीं, एक ओर शहर स्मार्ट होने का दावा करता है, तो दूसरी ओर यहां के निवासी पानी की एक-एक बूंद के लिए भारी मशक्कत करने को मजबूर हैं। शत्रुघ्न वादवानी बोले, रामापुरा वार्ड स्थित लौहरानी गली और राम मंदिर के पीछे वाली गली में इन दिनों पेयजल की गंभीर किल्लत है। पाइप लाइन से होने वाली जलापूर्ति लगभग ठप पड़ गई है। नलों में पानी का दबाव इतना कम है कि एक बाल्टी भरने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सनी ने कहा कि इस संकट के कारण सक्षम लोग तो पीने का पानी खरीदने और दैनिक कार्यों के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। ये लोग मुख्य सड़क पर स्थित सरकारी हैंडपंप से पानी ढोकर घरों में ले जाने को मजबूर हैं। यह शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कष्टदायक साबित हो रहा है। गोनू ने कहा कि घर के सभी कार्यों के लिए दूर से पानी ढोकर लाना मुमकिन नहीं है। जल्द से जल्द जलापूर्ति सुचारू की जाए।

जर्जर सड़क ने बढ़ाई मुसीबत

भगवान दास बोले, लौहरानी गली में विकास के दावे जमींदोज नजर आ रहे हैं। महज दो साल पहले गली में बिछाए गए चौका-पत्थर देखरेख के अभाव में बदहाल हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का पैदल चलना दूभर हो गया है। सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि जगह-जगह पत्थर उखड़ गए हैं, रास्ता ऊबड़-खाबड़ हो चुका है। इससे बरसात के दिनों में फिसलन की समस्या बनी रहती है। उर्मिला गुप्ता ने कहा कि चूहों के आतंक ने समस्या को गंभीर बना दिया है। चूहों ने गली की मिट्टी खोदकर उसे अंदर से खोखला कर दिया है। इसके कारण गली कई स्थानों पर धंस गई है। बबलू गुप्ता ने बताया कि इस जर्जर रास्ते से गुजरते समय बुजुर्गों और बच्चों के चोटिल होने का हमेशा डर बना रहता है। बदहाल सड़क की मरम्मत जल्द कराई जाए, ताकि लोगों को आवाजाही में राहत मिल सके।

रसोई का बिगड़ा बजट और बढ़ीं मुश्किलें

गुरु दास ने बताया कि लौहरानी गली के निवासी आज भी चूल्हा जलाने के लिए सिलेंडर पर निर्भर हैं। पाइप लाइन से गैस पहुंचाने की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। मनीष ने कहा कि गैस सिलेंडरों की समय पर आपूर्ति न होने और उनकी बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। विक्की शर्मा बोले, शहर के अन्य हिस्सों में यह सुविधा उपलब्ध है, लेकिन उनकी गली की अनदेखी की गई है। गेल गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जाए, ताकि एलपीजी संकट का स्थायी समाधान मिल सके।

आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक

रमेश गुप्ता ने कहा कि लौहरानी गली इन दिनों आवारा पशुओं के आतंक का केंद्र बन गई है। इससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों का घरों से निकलना दूभर है। क्षेत्र में बंदरों की फौज ने छतों पर स्थायी डेरा जमा रखा है। यह न केवल लोगों के सामान को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि उन्हें काटने और डराने के लिए भी हमलावर रहते हैं। रवि प्रजापति बोले, संकरी गली होने के कारण आवारा कुत्तों के झुंड के बीच से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। कुत्तों के भौंकने और पीछा करने के कारण बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा पर हर समय खतरा मंडराता रहता है। कैलाश ने बताया कि स्थिति यह है कि डर के मारे लोगों ने गलियों में अकेले चलना बंद कर दिया है। इन बेसहारा पशुओं और बंदरों को पकड़ने के लिए तत्काल अभियान चलाया जाए, ताकि लोगों को इस आतंक से मुक्ति मिल सके।

कूड़ा गाड़ी की अनियमितता

गौतम पाल बोले, लौहरानी गली और उससे सटी अन्य गलियों में नगर निगम की कूड़ा गाड़ी रोजाना न आने से दिक्कतें हो रही हैं। कूड़ा उठाने वाली गाड़ी हफ्ते में मुश्किल से चार दिन ही पहुंचती है। इसके कारण लोग घरों का कूड़ा अंदर ही जमा रखने को मजबूर हैं। भगवान दास ने कहा कि नियमित उठान न होने की वजह से कई लोग मजबूरन सड़कों पर ही कचरा फेंक रहे हैं, तो कुछ लोग दूर मुख्य सड़क तक जाकर कूड़ा निस्तारण कर रहे हैं। रमेश गुप्ता ने बताया कि इस अव्यवस्था के चलते संकरी गलियों में गंदगी और दुर्गंध का साम्राज्य फैलता जा रहा है। कूड़ा गाड़ी का परिचालन रोजाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि स्वच्छता बनी रहे और लोगों को घर में कचरा सड़ाने की मजबूरी से निजात मिल सके।

हमारी भी सुनें

1. लौहरानी गली में पाइप लाइन तो है, लेकिन पानी का फोर्स इतना कम है कि बाल्टी भरने में ही घंटों बीत जाता है। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।

- उर्मिला गुप्ता

2. गली के लोग पीने का पानी खरीदने को मजबूर हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार दूर से पानी ढोकर लाते हैं, समय और श्रम दोनों बर्बाद हो रहा है।

- गोनू

3. दो साल पहले बिछाए गए चौका-पत्थर अब उखड़ने लगे हैं। गली ऊबड़-खाबड़ हो गई है, पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।

- शत्रुघ्न वादवानी

4. चूहों ने गली की इतनी खोदाई कर दी है कि रास्ता जगह-जगह धंस गया है। आवाजाही करने में दिक्कत होती है, कोई सुनने वाला नहीं है।

- भगवान दास

5. इलाके को पीएनजी सुविधा अबतक नहीं मिली है। एलपीजी संकट के कारण रसोई गैस सिलेंडर के लिए भागदौड़ करना पड़ता है। महंगी गैस बजट भी बिगाड़ती है।

- सनी

6. बरसात के दिनों में लौहरानी गली का रास्ता फिसलन भरा हो जाता है। जर्जर सड़क के कारण बुजुर्गों और बच्चों का घर से निकलना दूभर हो गया है।

- गुरु दास

7. बंदरों का आतंक इतना है कि छतों पर जाना मुश्किल है। वे न केवल सामान का नुकसान करते हैं, बल्कि अब राहगीरों पर हमला भी करने लगे हैं।

- मनीष

8. संकरी गलियों में आवारा कुत्तों के झुंड के कारण आवाजाही मुश्किल है। डर बना रहता है कि कब कोई कुत्ता किसी को अपना निशाना न बना ले।

- विक्की वर्मा

9. कूड़ा गाड़ी का हफ्ते में सिर्फ चार दिन आना नाकाफी है। रोज गाड़ी नहीं आने से गंदगी फैल रही है और लोग घरों में कूड़ा जमा करने को मजबूर हैं।

- रमेश गुप्ता

10. कुछ गलियों में सफाई व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। अगर रोजाना गाड़ी नहीं आएगी, तो स्वच्छता का दावा सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा।

- रवि प्रजापति

11. राम मंदिर के पीछे वाली गली में भी पेयजल की स्थिति बेहद खराब है। बुनियादी सुविधाओं के लिए भी हमें संघर्ष करना पड़ रहा है। ध्यान दें।

- कैलाश

12. विकास के नाम पर बिछाए गए पत्थर परेशानी का सबब बन गए हैं। मरम्मत के अभाव में गली जर्जर हो चुकी है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।

- गौतम पाल

सुझाव और शिकायतें

सुझाव

1. गलियों में पेयजल के लिए पाइप लाइन के दबाव की तकनीकी जांच कराकर बूस्टर पंप या नई फीडर लाइन की व्यवस्था की जानी चाहिए।

2. लौहरानी गली की जर्जर सड़कों को देखते हुए चौका-पत्थरों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और इंटरलॉकिंग टाइल्स का विकल्प तलाशा जाए।

3. गैस पाइप लाइन बिछाने के कार्य को प्राथमिकता दी जाए ताकि रसोई गैस की किल्लत और सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति से राहत मिल सके।

4. आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम की टीम की ओर से विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया जाए। राहत मिलेगी।

5. स्वच्छता बनाए रखने के लिए कूड़ा गाड़ी का समय निर्धारित करते हुए उसे प्रतिदिन गलियों में भेजना सुनिश्चित किया जाए। सफाई बनी रहेगी।

शिकायत

1. पेयजल का दबाव इतना कम है कि एक बाल्टी भरने में घंटों लग रहे हैं। इसके कारण निवासी पीने का पानी खरीदने और दूर से ढोने पर विवश हैं।

2. दो साल पहले बिछाए गए पत्थर बदहाल हो चुके हैं और चूहों की खुदाई से सड़क जगह-जगह धंस गई है, जिससे आवाजाही में खतरा बना रहता है।

3. नगर निगम क्षेत्र में होने के वर्षों बाद भी गैस पाइप लाइन नहीं नसीब हुई। इससे रसोई का बजट बिगड़ गया है और सप्लाई भी समय पर नहीं होती है।

4. गलियों में कुत्तों के झुंड और छतों पर बंदरों के जमावड़े के कारण लोग दहशत में हैं। आए दिन पशु राहगीरों को काटकर घायल कर रहे हैं। विभाग ध्यान दें।

5. कूड़ा गाड़ी हफ्ते में केवल चार दिन ही आती है। इसके कारण लोग घरों और सड़कों पर कचरा फेंकने को मजबूर हैं। गंदगी की समस्या बढ़ सकती है।

बोले जिम्मेदार

लौहरानी गली में पेयजल की समस्या बनी हुई है। जलकल विभाग की ओर से निरीक्षण किया गया है, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ है। सड़क मरम्मत के लिए नगर निगम को प्रस्ताव भेजा गया है। बंदरों के आतंक से जूझ रहे निवासियों के लिए पशु चिकित्साधिकारी से शिकायत की गई है।

- राम गोपाल वर्मा, पार्षद, वार्ड नं- 90 रामापुरा

एक नजर में

- लौहरानी गली 100 साल पुरानी है

- 100 के लगभग मकानों की संख्या

- पांच सौ लगभग आबादी

- रामापुरा वार्ड नं-90

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