बोले काशी- साफ पानी और सही सड़क की दरकार, पीएनजी का भी इंतजार
Varanasi News - वाराणसी की पार्वतीपुरी, महाराणा प्रताप और सूर्य नगर कॉलोनियों में पेयजल संकट, खराब सड़कें, और बंदरों का आतंक है। नागरिकों को जलापूर्ति और अन्य सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम द्वारा उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे लोग निजी संसाधनों पर निर्भर हैं।
वाराणसी। शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले व्यापारियों, कारोबारियों की कॉलोनियां। यहां कोई गृहकर या जलकर का बकायेदार भी नहीं। फिर भी नगर निगम की नजरों से उपेक्षित। प्रदूषित जलापूर्ति एवं खराब सड़कों के चलते रोज फजीहत झेल रहे हैं नागरिक। उन्हें चार वर्षों से पीएनजी की आपूर्ति शुरू होने का भी इंतजार है। गेल ने सभी घरों तक पाइप लाइन नहीं बिछाई है। शहर की संभवत: पहली नक्षत्र वाटिका देखरेख के अभाव में नष्ट हो चुकी है। बंदरों के चलते अक्सर लोगों की दिनचर्या असहज हो जाती है। ------------------------
समस्या का सामना
रामापुरा वार्ड की तीन प्रमुख कॉलोनियां-पार्वतीपुरी, महाराणा प्रताप और सूर्य नगर स्मार्ट सिटी में विकास के दावों की पोल खोल रही हैं। विभिन्न समस्याएं साझा करने पार्वतीपुरी में जुटे उन कॉलोनियों के बाशिंदों ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में भारी मन से कहा कि हम भी करदाता हैं लेकिन जरूरी सुविधाओं से वंचित। ‘क्षयमुक्त काशी’ अभियान के जनक अनिल कुमार जैन ने क्षोभ के साथ बताया कि लगभग इन सभी कॉलोनियों की सबसे बड़ी समस्या पेयजल संकट और प्रदूषित जलापूर्ति है। पुरानी पाइप लाइन से जलापूर्ति ठप है। मिनी नलकूप का आश्वासन अभी कागज पर ही है। वहीं, वर्षों पुरानी सीवर लाइन जर्जर और कई जगह ध्वस्त हो चुकी है। उसकी गंदगी से पानी का पाइप भी संक्रमित हो गया है। परिणाम, घरों तक अक्सर गंदा और बदबूदार पानी पहुंचता है। कई महीने पुरानी इस समस्या से क्षेत्रीय पार्षद से लेकर जलकल एवं नगर निगम के अधिकारी तक वाकिफ हैं मगर किसी स्तर से राहत की ठोस पहल नहीं हो रही है। लोग निजी संसाधनों और बाजार से खरीदे गए पानी पर निर्भर हैं। संदीप मेहरा, नितिन केशवानी ने कह कि लगभग पांच दशक पुरानी पाइप लाइन से ज्यादातर घरों तक पानी पहुंचता ही नहीं। जहां आता भी है तो उसमें प्रेशर नहीं रहता। नरेन्द्र कुमार और मनीष कुमार ने सवाल किया कि टैक्स भरने वाली जनता कब तक सुविधाओं के सूखे से जूझेगी और कब लौटेगी इन कॉलोनियों की रौनक? बोले, बिना जलापूर्ति के हर साल पानी का टैक्स भरना जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
सड़क की स्थिति
रोड के गड्ढों से परेशान
रोहित केजरीवाल ने ध्यान दिलाया कि महाराणा प्रताप और सूर्य नगर कॉलोनी की सड़कें मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुकी हैं। ऊपरी परत उखड़ने के कारण रास्ते ऊबड़-खाबड़ हो गए हैं। बाइक चालकों के लिए इन रास्तों पर संतुलन बनाना किसी चुनौती से कम नहीं है। गड्ढों के कारण अक्सर वे दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। पंकज वर्मा ने बताया कि बारिश के दिनों में इन ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर जलजमाव हो जाता है। कीचड़ और जलजमाव के बीच से गुजरना कठिन हो जाता है। मनीष कपूर बोले, नगर निगम सड़क सड़कों की जल्द मरम्मत कराए ताकि लोगों को राहत मिले।
पेयजल प्रदूषण
सीवर लाइन से पेयजल प्रदूषित
राज कपूर के मुताबिक पार्वतीपुरी, महाराणा प्रताप और सूर्य नगर कॉलोनी में दशकों पुरानी सीवर लाइन अंदर ही अंदर ध्वस्त हो चुकी है। पूरा सिस्टम चोक होने के कगार पर है। सबसे खतरनाक स्थिति यह है कि सीवर लाइन टूटने से गंदा पानी पेयजल के पाइप में मिल जाता है। अनिल लालवानी ने कहा कि प्रदूषित जलापूर्ति का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। घरों के नलों से पानी नहीं, सीवर का गंदा पानी आता है। बदबू के कारण उसे सूंघना भी मुश्किल है। नारायण चंद्ररानी ने बताया कि जलकल की लापरवाही के कारण प्रदूषित जलापूर्ति हो रही है।
नक्षत्र वाटिका की उपेक्षा
उपेक्षा की शिकार नक्षत्र वाटिका
अनिल कुमार जैन ने कहा कि सामुदायिक मेल-मिलाप का केंद्र रही पार्वतीपुरी में प्रदेश की पहली नक्षत्र वाटिका पहचान खोने के कगार पर है। इस वाटिका में 27 नक्षत्रों और 9 ग्रहों के प्रतीक स्वरूप विशिष्ट पौधे लगाए गए थे। लेकिन नगर निगम की अनदेखी से सभी नष्ट हो गए। पानी की उचित व्यवस्था न होने के कारण दुर्लभ पौधे सूख चुके हैं। वाटिका का हर कोना रखरखाव के बिना जर्जर हो गया है। सालों पहले यह वाटिका तीज, कृष्ण जन्माष्टमी और सावन के त्योहारों के उल्लास का साक्षी बनती थी। देर रात तक लोग यहां बैठकर आपसी चर्चा करते थे और सुकून के पल बिताते थे। लेकिन अब गंदगी के बीच बैठना मुश्किल है। अशोक यादव ने बताया कि महाराणा प्रताप और पार्वतीपुरी कॉलोनियों के अन्य पार्क भी दुर्दशाग्रस्त हैं। पार्कों में न तो बैठने की व्यवस्था बची है और न ही हरियाली। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने की जगह अब वीरान दिखने लगी है।
बंदरों का आतंक
बंदरों से दहशत का माहौल
पंकज वर्मा ने ध्यान दिलाया कि इधर की तीनों कॉलोनियों में बंदरों का आतंक चरम पर है। उनके हमले से कई लोग घायल हो चुके हैं। लोगों का अपने घरों में सुरक्षित रहना मुश्किल है। कॉलोनी में बंदरों ने स्थायी ठिकाना बना लिया है। छतों से लेकर गलियों तक हर तरफ वे ही नजर आते हैं। संतोष महेन्द्रू ने बताया कि लोगों ने बंदरों के डर से अपने घरों की खिड़कियों और बालकनियों को लोहे की जालियों से बंद करवा लिया है। बंदर न केवल हिंसक हो रहे हैं, बल्कि घरों में पहुंच कर वस्तुओं को भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। राजेश लालवानी के मुताबिक बच्चों और बुजुर्गों के का घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है।
पीएनजी की आपूर्ति की कमी
चार वर्षों से पीएनजी का इंतजार
राजेश कपूर ने बताया कि साल 2022 में गैस पाइप लाइन बिछाई गई थी लेकिन चार साल बाद भी किसी घर में न कनेक्शन हुआ है, न पीएनजी की आपूर्ति शुरू हो सकी है। सड़कों और गलियों में बिछी पाइप लाइनें केवल शोभा बनी हैं, जबकि जनता रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत से जूझ रही है। सौरभ अग्रवाल ने बताया कि गैस पाइप लाइन सभी घरों तक नहीं बिछी है, जिससे आधी आबादी इस सुविधा से वंचित है। हरजीत सिंह बोले, पाइप लाइन बिछाने के वक्त उम्मीदें जगी थीं कि अब सिलेंडर उठाने से निजात मिलेगी, लेकिन संबंधित विभाग की शिथिलता के कारण इंतजार की अवधि बढ़ती जा रही है।
सुनवाई की मांग
हमारी व्यथा सुनें
1. नक्षत्र वाटिका कभी हमारे त्योहारों की जान हुआ करती थी, आज वहां सिर्फ गंदगी और सन्नाटा है। पार्क के नाम पर सिर्फ लोहे के ढांचे बचे हैं।
- अनिल कुमार जैन
2. नलों से सीवर का बदबूदार पानी आ रहा है। नगर निगम टैक्स तो पूरा लेता है, लेकिन पीने के लिए शुद्ध पानी भी नसीब नहीं है।
- नरेन्द्र कुमार
3. पुरानी पेयजल की जर्जर पाइप लाइन अंदर ही अंदर सीवर लाइन में मिल गई है। जानकारी के बाद भी अधिकारियों को इस बात की चिंता नहीं है।
- संदीप मेहरा
4. राशन की तरह अब पीने का पानी खरीदना पड़ रहा है। जो पैसा बच्चों की पढ़ाई पर खर्च होना चाहिए, वह हम बोतलबंद पानी पर लुटा रहे हैं।
- नितिन केशवानी
5. महाराणा प्रताप और सूर्य नगर की सड़कें दुर्घटनाओं का केंद्र बन गई हैं। ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर बाइक चलाना खतरे से खाली नहीं रहता है।
- मनीष कपूर
6. बरसात होते ही सड़कों पर जलजमाव और कीचड़ के कारण घर से निकलना कठिन हो जाता है। शहरी विकास का यह भी एक नमूना है।
- हरजीत सिंह
7. नक्षत्र वाटिका की हालत देखने लायक नहीं है। हमारी सांस्कृतिक विरासत को प्रशासन ने लावारिस छोड़ दिया है।
- राज कपूर
8. वार्ड की तीन कॉलोनियों में पेयजल पाइप लाइन गल चुकी है। शुद्ध पानी की उम्मीद कैसे करें?
- अनिल लालवानी
9. बंदरों का छतों पर उनका कब्जा है। हम अपने घरों में लोहे की जालियों के पीछे कैदी के रूप में रहते हैं।
- नारायण चंद्ररानी
10. कॉलोनी में बंदरों के कारण बच्चों को पार्क में भेजने की हिम्मत नहीं होती। कई लोग उनके हमले से घायल हो चुके हैं।
- रोहित केजरीवाल
11. गैस पाइप लाइन बिछा दी गई, लेकिन आज तक न कनेक्शन हुआ न आपूर्ति शुरू हुई। सिर्फ दिखाने के लिए बिछाई गई थी क्या?
- अशोक यादव
12. नगर निगम सीमा में होने का क्या फायदा जब न पानी मिले, न गैस। न ही चलने लायक सुरक्षित सड़कें हैं।
- राजेश लालवानी
सुझाव और शिकायतें
सुझाव
1. पार्वतीपुरी, महाराणा प्रताप और सूर्य नगर कॉलोनी की सालों पुरानी पेयजल पाइप लाइन को बदलकर तत्काल नई लाइन बिछाई जाए।
2. नक्षत्र वाटिका का सौंदर्यीकरण कराया जाए। पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल की व्यवस्था होनी चाहिए।
3. ध्वस्त हो चुकी सीवर लाइन को पेयजल के पाइप से अलग किया जाए। नई सीवर लाइन बिछवाई जाए ताकि संक्रामक बीमारियों से बचा जा सके।
4. कॉलोनियों की बदहाल सड़कों का हॉट मिक्स विधि से पुननिर्माण कराया जाए। जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण हो।
5. गैस पाइप लाइन योजना में जिन घरों में अब तक कनेक्शन नहीं हुए हैं, वहां तत्काल मीटर लगाकर गैस आपूर्ति शुरू की जाए।
शिकायतें
1. जलकर देने के बावजूद स्थानीय नागरिकों को दूषित पानी की आपूर्ति झेलनी पड़ रही है, जो उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
2. पार्वती नगर की नक्षत्र वाटिका उपेक्षा के कारण नष्ट होती जा रही है। एक सांस्कृतिक धरोहर का अस्तित्व खतरे में है।
3. बंदरों के आतंक और हिंसक घटनाओं के बावजूद नगर निगम की ओर से उन्हें पकड़ने के लिए ठोस पहल नहीं की जा रही है।
4. खराब सड़कों पर बुजुर्ग और बच्चे आए दिन चोटिल हो रहे हैं। लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
5. गैस पाइप लाइन बिछाने के बाद उसे कॉलोनियों के घरों में अब तक पीएनजी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
बोले जिम्मेदार
मिनी नलकूप से दूर होगी पेयजल समस्या
पार्वतीपुरी, महाराणा प्रताप और सूर्य नगर कॉलोनी की पेयजल समस्या से जलकल को अवगत कराया गया है। मिनी ट्यूबेल की फाइल स्वीकृत नहीं हो पाई है, इसलिए समस्या लगातार बनी हुई है। नक्षत्र वाटिका और अन्य पार्कों के लिए नगर निगम को प्रस्ताव भेजा गया है। महाराणा प्रताप और सूर्य नगर कॉलोनी में सड़क मरम्मत के लिए 22 लाख का बजट पास हो गया है, काम जल्द शुरू होगा।
- रामविलास वर्मा, पार्षद, वार्ड नं- 90 रामापुरा
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