बोले काशी- सीवर के जल से होकर गुजरते हैं और पीने को भी साफ पानी नहीं
Varanasi News - वाराणसी के हनुमान मंदिर क्षेत्र के लोग सीवर और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गंदगी और दुर्गंध के कारण जीवन मुश्किल हो गया है। लोग अपने खर्च पर पाइपलाइन लगवाने के बावजूद समस्या से परेशान हैं। प्रशासन की अनदेखी और नियमित सफाई न होने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
वाराणसी। सुविधाएं सभी हैं, लेकिन दुर्दशाग्रस्त। इन्हें दुरूस्त कराने की बात तो दूर, पास में ही गड्ढे खोदकर छोड़ दिए जाने से फजीहत बढ़ गई है। सीवर की फांस तो है ही, दुर्गंध से लोगों का दम घुट रहा है। हालात यह कि घर से निकलते ही पहला कदम सीवर में पड़ना मजबूरी है। इसके बगैर दूसरा कदम बढ़ ही नहीं पाता। ऐसी जलालत भरी जिंदगी जी रहे हैं हनुमान मंदिर (लहरतारा) के लोग। लहरतारा पुल से करीब चार सौ मीटर पर बने ये हालात दिनचर्या की सहजता छीन रहे हैं। कबीर बालिका विद्यालय (लहरतारा) के ठीक सामने हनुमान मंदिर है।
मंदिर के पास से ही गली गुजरती है। उसमें कदम रखने के लिए पहले सीवर पार करना पड़ेगा। मंदिर पर पूजन-अर्चन भी सीवर के बीच से ही जाकर हो सकता है। यहां के प्राचीन कुएं के पानी में भी सीवर की ‘मिलावट’ हो गई है। ‘हिन्दुस्तान’ में बातचीत में लंबे समय से झेल रहे यहां के लोगों ने अपनी दुर्दशा गिनाईं। ओमप्रकाश गुप्ता, अनिल मिश्रा, संजय चौधरी ने कहा कि सीवर की सुविधा यहां नहीं है। यहां के लोगों ने अपने खर्चे से पाइपें लगवाईं ताकि मलजल निकलने की व्यवस्था हो जाए। किसी तरह से कुछ दिनों तक स्थिति ठीक रही, लेकिन मुख्य मार्ग के आसपास नाले बनाए जाने लगे तो हालात बिगड़ गए। नाला पूरा नहीं बना सका है। आज अजीब दशा में जीवन जी रहे हैं। इतने समृद्ध भी नहीं हैं कि कहीं और जाकर बस जाएं, यहां रहना मजबूरी है और समस्याएं झेलना नियति बन गई है। कुछ दिन पहले ही यहां गैस रिसाव से घटना हुई थी। इसके बाद भी प्रशासन सुधि नहीं ले रहा है कि यहां समस्याओं का समाधान कराया जाए। यहां की समस्याएं एक दिन की नहीं, वर्षों की है। कई बार इस उम्मीद से शिकायतें की गईं कि स्थिति में सुधार के उपाय किए जाएंगे, लेकिन शिकायतें आज भी अनसुनी पड़ी हैं।घरों में रहना कठिनउषा, सुनीता, बदामा ने कहा कि घर में रहना दुश्वार हो गया है। कभी-कभी तो गंदा पानी घरों में पहुंच जाता है। मार्ग पर तो सीवर के बीच से ही होकर आना-जाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि किससे शिकायत करें कि हमारी समस्याओं का समाधान हो जाए, हम लोग भी चैन-सुकून से जीवन जी सकें। रात सोने से लेकर सुबह उठने तक पीड़ा सताती रहती है। नहाना-धोना बेकार लगने लगता है। हर समय दुर्गंध निकलती रहती है। सीवर लाइन यहां नहीं बिछाई गई है, जबकि यह क्षेत्र काफी समय से नगर निगम की सीमा में है। जीटी रोड से इस गली में बने घरों की दूरी मुश्किल से 20-25 मीटर होगी, फिर भी सुनवाई नहीं हो रही है। हमारी समस्याओं के समाधान में अनदेखी की जा रही है। हम भी इसी शहर के नागरिक हैं, हमें भी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
पीने के पानी का संकट
चंदा, रजवंती, दुर्गावती ने कहा कि इस क्षेत्र में पेयजल को लेकर भी संकट काफी समय से बना हुआ है। आपूर्ति का पानी इतना गंदा आता है कि उसे पीया नहीं जा सकता। पानी से दुर्गंध भी निकलती रहती है। यहां के लोग पेयजल की जरूरत पूरी करने के लिए खरीदकर पानी मंगवाते हैं। इससे आर्थिक संकट भी बढ़ जाता है। यह रोज की मजबूरी है। यहां कोई हैंडपंप भी नहीं लगाया है, जिससे कि मौके-बेमौके इसका उपयोग किया जा सके। कुएं का पानी भी अब उपयोग लायक नहीं रहा। कभी यह कुआं ही यहां के लोगों के लिए ‘जीवनी’ था, लेकिन आज कुएं का ही जीवन दांव पर लग गया है। इसके पानी में न जाने कहां से सीवर का मिश्रण होने लगा है। यहां पेयजल की उपलब्धता की व्यवस्था की जानी चाहिए।
तार लटक रहे, स्ट्रीट लाइटें नहीं
अविनाश, अजय कुमार गुप्ता, बसंती ने कहा कि इस क्षेत्र में बिजली की दशा में बहुत खराब है। खंभों पर तार लटके पड़े हैं। घरों के पास से ही जा रहे हैं। इन्हें व्यवस्थित नहीं किया जा रहा है। खंभों पर जो तार खींचे गए हैं, वे खुले हैं। सुरक्षित तारों को लगाकर यदि घरों में कनेक्शन दिए जाएं तो करंट उतरने का खतरा नहीं रहेगा। बरसात में यहां जलजमाव भी हो जाता है। उस समय तो अक्सर करंट उतरने का खतरा बना रहता है। यहां स्ट्रीट लाइटों का भी अभाव बना हुआ है। रात में यहां अंधेरा पसरा रहता है। आसपास के घरों से निकलती रोशनी ही लोगों के आवागमन का आधार बनती है। हमारी शिकायतों पर सुनवाई नहीं की जाती है। लगता है कि प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है। यहां की बिजली की व्यवस्था दुरुस्त की जानी चाहिए। साथ ही साथ स्ट्रीट लाइटें भी लगावाईं जाएं।
आयुष्मान कार्ड से वंचितप
तालू, किशन यादव, रचना ने कहा कि यहां के कुछ लोगों के ही आयुष्मान कार्ड बने हैं, ज्यादातर लोग इस सुविधा से वंचित है। गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज कराने के लिए कर्ज लेने की नौबत आने का अंदेशा रहता है। यहां के लोगों की सुविधा के लिए कभी शिविर नहीं लगाया जाता। अगर शिविर लगाकर समस्याओं की सुनवाई कर दी जाए तो बहुत राहत हो जाएगी। निस्तारण भी समयबद्ध रूप से हो सकेगा। ज्यादातर लोग तो यह भी नहीं जानते कि आयुष्मान कार्ड बनवाने की प्रक्रिया क्या है।
नियमित सफाई नहीं
रीतू, डा. आरके मौर्या, अनिल ने कहा कि यहां सफाई को लेकर भी दुर्दंशा ही है। सफाई नियमित नहीं होती है। कूड़ा फेंकने का भी कोई स्थान तय नहीं है। अक्सर सड़क पर कूड़ा पड़ा रहता है। सीवर, दुर्गंध का दंश तो झेल ही रहे हैं, कूड़ा भी समस्या बना हुआ है। यहां कहीं भी डस्टबिन नहीं रखा गया है, जिससे कि लोग वहां कूड़ा फेंक सकें। अन्य समस्याओं के समाधान के साथ ही नियमित उठान की भी व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे बहुत राहत हो जाएगी।
हमारा दर्द सुनें
मंदिर के पास गली है। इस गली में कदम रखने के लिए पहले सीवर पार करना होगा। दाएं-बाएं से भी नहीं निकल सकते।ओमप्रकाश गुप्ता
मुख्य मार्ग के पास नाला बनने लगा तो हालात बिगड़ गए। नाला पूरा नहीं बना सका है। अजीब दशा में जीवन जी रहे हैं।अनिल मिश्रा
पूजन-अर्चन भी सीवर के बीच से ही जाकर हो सकता है। प्राचीन कुएं के पानी में भी रिसाव के चलते सीवर मिल रहा है।संजय चौधरी
घर में रहना मुश्किल है। कभी-कभी गंदा पानी घरों में पहुंच जाता है। समस्या के समाधान के लिए कोई आगे नहीं आ रहा।उषा
समझ नहीं आ रहा कि किससे शिकायत करें कि समस्याओं का समाधान हो जाए। हम लोग भी चैन-सुकून से जीवन जी सकें।सुनीता
जीटी रोड से इस गली में बने घरों की दूरी मुश्किल से 20-25 मीटर ही होगी, फिर भी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो रही है।बदामा
इस क्षेत्र में पेयजल को लेकर संकट बना हुआ है। आपूर्ति का पानी इतना गंदा आता है कि उसे पीया नहीं जा सकता है।चंदा
पानी से दुर्गंध भी निकलती है। लोग पेयजल की जरूरत पूरी करने के लिए खरीदकर पानी मंगवाते हैं। आर्थिक बोझ बढ़ता है।रजवंती
यहां हैंडपंप नहीं लगाया गया है, जिससे कि मौके-बेमौके इसका उपयोग किया जा सके। कुएं का पानी भी उपयोग लायक नहीं है।दुर्गावती
क्षेत्र में बिजली की दशा में बहुत खराब है। तार लटके पड़े हैं। घरों के पास से ही जा रहे हैं। इन्हें व्यवस्थित नहीं किया जा रहा है।अविनाश
खंभों पर जो तार खींचे गए हैं, वे खुले हैं। सुरक्षित तारों को लगाकर यदि घरों में कनेक्शन दिए जाएं तो करंट का खतरा नहीं रहेगा।अजय कुमार
बरसात में अक्सर करंट उतरने का खतरा बना रहता है। सुनवाई नहीं होती। लगता है प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है?बसंती
सुझाव
यहां सीवर लाइन यथाशीघ्र बिछाई जानी चाहिए, ताकि इस समस्या से लोगों को मुक्ति मिल सके। गंदा पानी भी मार्ग पर नहीं फैलेगा।प्राचीन कुएं का जीर्णोंद्धार कराया जाए। सीवर का रिसाव रोकने की जरूरत है, ताकि इस कुएं के पानी का भी उपयोग किया जा सके।स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। आपूर्ति का पानी साफ रहे, इसके लिए भी शीघ्र उपाय किए जाने चाहिए।लटकते तारों को दुरुस्त करने के साथ ही साथ सुरक्षित तार लगाएं। स्ट्रीट लाइटों की भी व्यवस्था की जाए, इससे प्रकाश रहेगा।जगह-जगह डस्टबिन रखवाए जाने चाहिए, इससे कूड़ा फैलेगा नहीं। कूड़े का उठान भी नियमित किया जाना चाहिए। राहत हो जाएगी।
शिकायतें
नालियां जाम हैं। सफाई नहीं कराई जा रही है। जीडी रोड पर किनारे जलजमाव जैसी स्थिति है। समाधान नहीं किया जा रहा है।कुएं का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। गंदा पानी कुएं के पानी में मिल रहा है। कुएं को ढंकवाने पर किसी का ध्यान नहीं है।स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। लोग काफी दिनों से परेशान है।लटकते बिजली के तारों को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर हर समय यहां हादसा होने का अंदेशा बना ही रहता है।कूड़ा फेंकने का स्थान तय नहीं है। डस्टबिन भी नहीं रखवाए गए हैं। दुर्गंध-गंदगी से लोग त्रस्त हो गए हैं। सुनवाई नहीं होती।
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