बोले काशी - बांस-बल्ली में फंस कर उलझ गया विकास
Varanasi News - वाराणसी के मोहल्लों में बाहरी चमक के बावजूद अंदरूनी हालात चिंताजनक हैं। विशेषकर राजभर और हरिजन बस्तियों में गंदा पानी और खराब बुनियादी सुविधाएं हैं। 25 वर्षों से दूषित पेयजल, बिजली के खंभों की कमी, और अंधेरे में असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। बाशिंदों को राहत की दरकार है।
वाराणसी। शहरी विकास की धुरी रहे मोहल्ले में बाहरी चमक तो खूब दिखती है मगर अंदर के हालात दयनीय और चिंतनीय दिखते हैं। खासकर राजभर और हरिजन बस्तियों में। इनमें विकास बांस-बल्लियों में फंसा हुआ है तो घरों की बाल्टियों से गंदा पानी छलकता है। हर सुबह मलजल से आवाजाही मजबूरी है तो उबड़-खाबड़ गलियों में शाम के बाद अंधेरा छा जाता है। रास्ते जर्जर और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जे का दंश। अगल-बगल विकास का परचम लहराते देख बाशिंदों की पीड़ा-तनाव हमेशा बढ़ा रहता है। उन्हें राहत की दरकार है। ------------------------------- महापालिका के समय से पैगंबरपुर शहर का हिस्सा है। पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग के किनारे बसे इस मोहल्ले को व्यावसायिक रूप धरते देर नहीं लगी मगर पुरानी बस्तियों के बाशिंदों की डगर अब भी मुश्किलों से घिरी है।
‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत के दौरान उनकी पीड़ा उभर आई। ऋतिक अग्रहरी ने कहा कि अभावों की मार झेलती हमारी बस्ती में बुनियादी सुविधाएं गंभीर चुनौती हैं। विकास की किरणें बांस-बल्लियों पर लटके बिजली के तारों में उलझ गई हैं, जीवन की त्रासदी सड़क पर बहते सीवर के मलजल में साफ दिखती है। बताया कि नशेड़ियों के उपद्रव से हर कोई तंग है। चंद दूरी पर ड्यूटी करते पुलिसकर्मियों से शिकायत का असर नहीं पड़ रहा। मोहित ने बताया कि पैगम्बरपुर की लगभग साढ़े पांच हजार की घनी आबादी के बीच बिछाई गई सीवर लाइन सुविधा के बजाय मुसीबत का सबब बन गई है। पाइप के चोक होने के कारण घरों का गंदा पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। कन्हैया लाल और संदीप के मुताबिक बस्ती की पाइप लाइन को अब तक मेन सीवर लाइन से नहीं जोड़ा गया है। इस कारण मलजल की निकासी ठप है। हर सुबह गलियां जलमग्न हो जाती हैं। बरसात के दिनों में आवागमन बाधित रहता है। तब संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। संबंधित विभाग की लापरवाही का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। सालों से दूषित पेयजल रामजी, पप्पू के मुताबिक बस्ती में पिछले ढाई दशकों से पेयजल की समस्या बनी हुई है। सरकारी नलों का पानी दूषित और बदबूदार रहता है। वह पीने तो क्या, किसी भी घरेलू काम के योग्य नहीं रहता। इस समस्या का कारण सीवर और पेयजल लाइन का आपस में मिल जाना है। सबनम और मनभावती ने बताया कि जमीन में पाइपों के क्षतिग्रस्त होने से सीवर का गंदा पानी पीने के पानी में मिल रहा है। पिछले 25 वर्षों से इस स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। गंदे पानी के सेवन से लोग बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। बिजली के खंभों की कमी लक्ष्मीना, शंकर लाल ने बताया कि दोनों बस्तियों की बड़ी आबादी बांस-बल्लियों के सहारे लटके बिजली के तारों के बीच रहने को विवश है। बिजली के पर्याप्त खंभे न होने के कारण जगह-जगह घरों की दीवारों और बालकनी के सहारे तार ले जाए गए हैं। इस नाते वे ढीले भी हैं। तेज हवा से टकराने के कारण उनसे चिंगारियां निकलती हैं। तब हादसे की आशंका प्रबल हो जाती है। ज्यादातर लाइटें खराब मुन्नी और अनिता ने ध्यान दिलाया कि मोहल्ले में शाम के बाद अंधेरा पसर जाता है, तब आवागमन में बहुत परेशानी होती है। कहने को बस्ती में जगह-जगह स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, लेकिन अधिकांश खराब हैं। सनी, मोहित ने बताया कि कहीं लाइटें जलती भी रही तो उनकी रोशनी में सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते। बोले, शाम ढलते ही असुरक्षा का माहौल बन जाता है। अंधेरे में अराजक गतिविधियां बढ़ने की भी आशंका रहती है। पत्थर चौका बने मुसीबत किरन बोलीं कि सालों पहले गलियों में बिछे पत्थर-चौके उखड़ गए हैं। वर्षों से इनकी सुध नहीं ली गई है। आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। अधिक समस्या बरसात के समय होती है, जब पत्थरों पर काई जमने और कीचड़ से फिसलन हो जाती है। तारा देवी ने बताया कि बुजुर्गों और बच्चों के लिए रास्तों से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। नशेड़ियों का बोलबाला प्रमिला, पूजा देवी ने बताया कि नशेड़ियों का उपद्रव बढ़ गया है। वे बस्ती के सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम मनमानी करते हैं। टोकने पर अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं। संदीप ने बताया कि नशे की लत पूरा करने वालों के चलते इलाके में चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं, इससे लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर समस्या से आंखें मूंदे बैठा है। मनीषा बोलीं, क्षेत्र में पुलिस गश्त न होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं। बार-बार की शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। पारिवारिक-सार्वजनिक आयोजनों पर संकट रोहित और रितिक ने बताया कि बस्ती के लोग नगर निगम की खाली जमीन पर शादी-मुंडन से लेकर तेरही तक के कार्यक्रम करते रहे हैं क्योंकि मैरिज लॉन बुक कराने की उनमें क्षमता नहीं है। अब वह जगह कब्जे में ली जा रही है। मनभावती, शंकर लाल, अनिता, सनी ने कहा कि यदि यह जगह भी छीन ली गई, तो कोई विकल्प नहीं बचेगा। फिर किसी आयोजन के लिए बड़ी समस्या आएगी।
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1. सीवर लाइन बिछाने के बाद विभाग उसे मेन लाइन से जोड़ना भूल गया है। रास्ते पर गंदा पानी हमारी नियति बन चुका है। - ऋतिक अग्रहरि 2. बस्ती में पिछले 25 सालों से घरों के नलों में गंदा पानी आ रहा है। वह किसी काम लायक नहीं रहता। - मोहित 3. जब पानी की पाइप लाइन में सीवर का गंदा पानी मिलने लगे तो समझ लीजिए कि प्रशासन की प्राथमिकताएं क्या हैं। - कन्हैया लाल 4. बांस-बल्लियों के सहारे लटकते बिजली के तार हादसे की वजह बन गए हैं। विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। - संदीप 5. अंधेरे में डूबी गलियों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता है। खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत का सिर्फ आश्वासन मिलता है। - रामजी 6. सालों पुराने पत्थर चौके अब जी का जंजाल बन गए हैं। बरसात में फिसलन से हर दिन कोई न कोई चोटिल होता है। - मनभावती 7. बस्ती में नशेड़ियों का उपद्रव चरम पर है। पुलिस गश्त न होने से घर के बाहर खड़े होने में भी डर लगता है। - लक्ष्मीना 8. नशेड़ी सरे आम नशा करते हैं। शिकायत के बावजूद पुलिस प्रशासन गहरी नींद में सोया है, ध्यान नहीं है। - मनीषा 9. गरीबों के पास पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए कोई जगह नहीं बची है। एक खाली जमीन भी विभाग कब्जे में ले रहा है। - मुन्नी 10. बिजली के खंभे न होने से तारों का जाल फैला है। वह किसी भी दिन बड़ी हादसे का सबब बन सकता है। - अनिता 11. स्ट्रीट लाइटें केवल खंभों पर लटकी हैं। उनकी रोशनी में पैदल चलना भी सुरक्षित नहीं। गड्ढे नहीं दिखते। - अमरावती 12. सीवर लाइन ने जनजीवन को नारकीय बना दिया है। अंधेरे में डूबी गलियों और नशेड़ियों का बढ़ते उपद्रव से डर लगता है। - तारा देवी
सुझाव 1. बस्ती की सीवर लाइन को तत्काल मेन लाइन से जोड़ा जाए। चोक पाइप की आधुनिक मशीनों से सफाई कराई जाए। 2. पेयजल की पुराने और क्षतिग्रस्त पाइप को बदला जाए ताकि सीवर का पानी उसमें न मिले। नियमित अंतराल पर पानी की जांच कराई जाए। 3. बांस-बल्लियों को हटाकर कंक्रीट के खंभे लगाए जाएं और नंगे तारों की जगह इंसुलेटेड केबल का इस्तेमाल किया जाए। 4. बस्ती की खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत कराई जाए। कम रोशनी वाली लाइटों को हटाकर उच्च क्षमता वाली एलईडी लाइटें लगाई जाएं। 5. नगर निगम की खाली जमीन पर सामुदायिक भवन बनवाया जाए। नशाखोरी रोकने के लिए पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।
शिकायतें 1. बस्ती में सीवर लाइन बिछा दी गई लेकिन मेन लाइन से कनेक्टिविटी न होने से गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। बरसात में स्थिति नारकीय हो जाती है। 2. पिछले 25 वर्षों से लोग दूषित और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। सीवर लाइन का पानी के पाइप में मिलने से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। 3. घरों की बालकनी और लकड़ी की बल्लियों के सहारे झूलते बिजली के तार किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं 4. बस्ती में पर्याप्त लाइटें नहीं लगाई गई हैं। रात में अंधेरे के कारण लोगों का चलना दूभर है। खराब लाइटों की महीनों से मरम्मत नहीं हो रही है। 5. गरीब परिवारों के पास आयोजनों के लिए कोई जगह नहीं बची है, खाली जमीन भी छीनी जा रही है। पुलिस गश्त न होने से नशेड़ियों और चोरों का उपद्रव बढ़ गया है।
बोले जिम्मेदार
पत्थर चौकों के लिए भेजेंगे प्रस्ताव पेयजल पाइप लाइन बिछाने के दौरान सड़क के पत्थर चौके उखड़ गए हैं। उनकी मरम्मत और जलनिकासी का प्रस्ताव नगर निगम को भेजा जाएगा। जहां पानी गंदा आ रहा है, वहां के निवास शिकायत पत्र दे देंगे तो निस्तारण हो जाएगा। जरूरत के मुताबिक स्ट्रीट लाइटें लगवाई जाएंगी। खाली स्थल पर बाउंड्री के लिए नगर निगम को प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहां गेट भी लगेगा। राजेंद्र मौर्या-पार्षद, अकथा वार्ड
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