Critical Issues in Sarayanandan Waterlogging Electricity Hazards and Community Toilet Shortage बोले काशी- समस्याओं की सराय में विकास का कब होगा अभिनंदन, Varanasi Hindi News - Hindustan
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बोले काशी- समस्याओं की सराय में विकास का कब होगा अभिनंदन

Varanasi News - वाराणसी के सरायनंदन मोहल्ले में जलजमाव, बिजली के खतरनाक तार और सामुदायिक शौचालय की कमी जैसी समस्याएँ हैं। स्थानीय निवासी मानसून के आगमन से चिंतित हैं। कई वर्षो से इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। क्षेत्र की सफाई और सड़कें भी खराब हैं। लोग राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

Thu, 14 May 2026 02:03 PMNewswrap हिन्दुस्तान, वाराणसी
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बोले काशी- समस्याओं की सराय में विकास का कब होगा अभिनंदन

वाराणसी। शहर के पुराने मोहल्ले में समस्याओं ने ‘सराय’ बना लिया है। उनमें सबसे गंभीर समस्या जलजमाव की है। बीते सालों में हुई दुश्वारियों का दर्द पूरी तरह से गायब नहीं हुआ है कि बाशिंदों को आगत मानसून की चिंता घेरने लगी है। साल भर के दौरान आश्वासनों का पुलाव पका मगर घर-घर राहत का इंतजार जारी है। बिजली के बेतरतीब तार, सफाई और सामुदायिक शौचालय की कमी भी परेशानी की वजह है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर सरायनंदन में समग्र विकास के अभिनंदन की ख्वाहिश कब पूरी होगी? काशी में नवाबों के समय आबाद हुई खोजवां गल्ला मंडी में आने वाले किसानों, व्यापारियों की सुविधा के लिए किन्हीं नंदन साव ने सराय बनवाई जिसे लोगबाग सरायनंदन के नाम से जानते हैं। समस्याएं यहां जगह-जगह दिखती हैं। लोगों ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत के पहले हालात दिखाए। सावित्री, कल्लू साहू ने कहा कि यहां बिछाई गई सीवर पाइप लाइन छोटी है। जगह-जगह जाम भी है। ओवरफ्लो की स्थिति में रोड पर चल पाना मुश्किल हो जाता है। बताया कि हल्की बारिश में कुछ घंटों में पानी निकल जाता है, लेकिन बारिश तेज हुई तो कई दिनों तक परेशानी झेलनी पड़ती है। घरों में पानी घुस जाता है। हालात खराब हो जाते हैं। पिछली बरसात में सांसत में जीते रहे। यह आस थी कि इस समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन हुआ कुछ नहीं। बोले, अभी मानसून के आने में कुछ दिन हैं, लेकिन अब से ही हम लोग भयभीत हैं। कुछ सूझ नहीं रहा क्या करें, कैसे जीएं। बरसात में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, रोजमर्रा की जिंदगी जलजमाव में ‘छटपटाती’ रहती है। इसका समाधान शीघ्र मिलना चाहिए। अली हुसैन अंसारी ने ध्यान दिलाया कि सरायनंदन की अजीम नगर कालोनी में बिजली व्यवस्था खतरनाक संकेत दे रही है। काफी संख्या में बिजली के तार मुख्य मार्ग से खींचकर घरों तक ले जाए गए हैं। हजीफुर्रहमान ने कहा कि घरों तक ले जाए गए तार भयभीत किए रहते हैं। करंट उतरने का डर सताता है। बरसात में भय बढ़ जाता है। कहा कि इस कालोनी का मार्ग भी अस्तव्यस्त है। इसे बनाने की दिशा में पहल नहीं हो रही है। काफी दिनों से दुर्दशा झेल रहे हैं।

सामुदायिक शौचालय की जरूरत

अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि तेजी से बदलते शहर की स्थिति का थोड़ा भी सुखद संकेत सरायनंदन में नहीं मिल रहा है। यहां न सामुदायिक शौचालय है और न व्यवस्थित सफाई। अगर किसी राहगीर को जरूरत पड़ी तो लघुशंका के लिए किसी दीवार की आड़ लेनी पड़ती है या ऐसे ही दर्द सहते जाना पड़ता है। लगभग दो किमी के दायरे में कोई सामुदायिक शौचालय नहीं है, जबकि यह सबसे जरूरी है। राजेश उपाध्याय ने कहा कि इस दिशा में किसी का ध्यान नहीं है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर यहां उपयुक्त स्थान पर सामुदायिक शौचालय बनवा दिया जाए तो लोगों को राहत के साथ गंदगी भी नहीं होगी।

पशुओं का जमावड़ा

मनीष गुप्ता, जिंतेंद्र पांडेय ने ध्यान दिलाया कि इस क्षेत्र में छुट्टा पशुओं का जमावड़ा भयभीत करता है। कभी कभी छुट्टा पशु सड़क घेरकर बैठ जाते हैं। पुरुष तो निकल जाते हैं, लेकिन बच्चों और महिलाओं को फजीहत झेलनी पड़ती है। जहां कूड़ा पड़ा रहता है, वहां पशुओं का जमघट भी हो जाता है। यह समस्या वर्षों की है। पशुओं की धरपकड़ अभियान का असर इस क्षेत्र में नहीं दिखता। लोग पशुओं को खुले में छोड़कर निश्चिंत हो जाते हैं। यह स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मवेशी पालकों को जागरूक किया जाए या छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशाला में भेजा जाए। इससे आवागमन बाधित नहीं होगा।

पर्याप्त स्ट्रीट लाइटें नहीं

सचिन पांडेय, सीमा, राजकुमार मौर्या ने कहा कि दिन में तो काम चल जाता है, लेकिन रात में रोड पर पर्याप्त रोशनी नहीं रहती। इससे आवागमन में बहुत दिक्कतें होती हैं। यह घनी आबादी का क्षेत्र है, इसलिए आसपास के घरों से निकलती रोशनी सहायक हो जाती है या वाहनों की रोशनी के सहारे लोग निकल जाते हैं। यहां की गलियों में भी स्ट्रीट लाइटों का अभाव है। कहा कि सर्वे कराकर जहां-जहां जरूरी हों, वहां स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं। बिजली के लटकते तारों को भी दुरुस्त किया जाए ताकि किसी प्रकार का भय नहीं रहे।

क्षतिग्रस्त रास्तों को दुरुस्त कराएं

मोहम्मद आमिर, राजेश मौर्या के मुताबिक क्षेत्र में कई जगह रास्ते क्षतिग्रस्त हैं। पास की कुछ गलियां इस कदर ऊबड़-खाबड़ हैं कि उन पर चलना गंभीर चुनौती है। लोग काफी समय से रास्तों का ‘संत्रास’ झेल रहे हैं। यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर कब ऐसी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। क्षतिग्रस्त गलियों के बीच से रोज आने जाने की लोगों की नियति बन गई है। दुर्गा प्रसाद बोले, इन समस्याओं का समाधान शीघ्र करने की जरूरत है, ताकि हम लोग भी यह महसूस कर सकें कि शहर में रहते हैं।

हमारी पीड़ा सुनें

यहां बिछाई गई सीवर पाइप लाइन छोटी है और जगह-जगह जाम भी है। ओवरफ्लो की स्थिति में सड़क पर चल पाना कठिन हो जाता है।

सावित्री

हल्की बारिश में कुछ घंटों में पानी निकल जाता है, लेकिन बारिश तेज हुई तो कई दिनों तक जलजमाव की परेशानी झेलनी पड़ती है।

कल्लू साहू

बिजली के बगैर कोई काम नहीं हो सकता। घरों तक ले जाए गए तार भयभीत करते हैं। करंट उतरने का भय सताता है।

अली हुसैन अंसारी

बिजली के तारों को व्यवस्थित कर दिया जाए तो राहत हो जाएगी। मार्ग भी अस्त-व्यस्त हैं। उन्हें बनाने की दिशा में पहल नहीं हो रही है।

हजीफुर्रहमान

तेजी से बदलते शहर की स्थिति का थोड़ा भी संकेत सराय नंदन में नहीं मिल रहा है। यहां न सामुदायिक शौचालय है, न व्यवस्थित सफाई।

अरुण कुमार गुप्ता

अगर इस क्षेत्र में उपयुक्त स्थान देखकर सामुदायिक शौचालय बनवा दिया जाए तो इससे लोगों को बहुत राहत हो जाएगी, गंदगी भी नहीं होगी।

राजेश उपाध्याय

कभी कभी छुट्टा पशु पूरी सड़क घेरकर बैठ जाते हैं। पुरुष तो किसी तरह निकल जाते हैं, लेकिन बच्चों और महिलाओं को परेशानी होती है।

मनीष गुप्ता

जहां कूड़ा रहता है, वहां पशुओं का जमघट हो जाता है। यह समस्या पुरानी है। पशुओं की धरपकड़ अभियान का असर यहां नहीं है।

जितेंद्र पांडेय

दिन में काम चल जाता है, लेकिन रात में मार्ग पर पर्याप्त रोशनी न होने से आवागमन में बहुत दिक्कतें होती हैं। स्ट्रीट लाइटों का इंतजाम हो।

सचिन पांडेय

क्षेत्र का सर्वे कराकर जरूरत के अनुसार स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं। बिजली के लटकते तारों को दुरूस्त किया जाए ताकि करंट उतरने या लगने का भय न रहे।

सीमा

क्षेत्र में कई जगह रास्ते क्षतिग्रस्त । पास की कुछ गलियां तो इस कदर ऊबड़-खाबड़ हैं कि उन पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं है।

राजेश मौर्या

काफी समय से रास्तों का ‘संत्रास’ झेल रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर कब समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।

दुर्गा प्रसाद

सुझाव

जलनिकासी का शीघ्र इंतजाम हो ताकि बरसात में यहां जलजमाव न हो सके। सीवर लाइन की भी सफाई कराई जाए।

बिजली के तारों को व्यवस्थित किया जाए ताकि करंट उतरने की आशंका न रहे। इसके लिए पर्याप्त संख्या में खंभे लगवाए जाएं।

सर्वे करा कर उपयुक्त स्थान पर सामुदायिक शौचालय बनाने की जरूरत है, ताकि राहगीरों को कोई परेशानी न झेलनी पड़े।

सड़क दुरुस्त कराने के साथ जगह-जगह स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं ताकि रात में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था बनी रहे। माहौल सुरक्षित महसूस हो।

क्षेत्र में छुट्टा घूमते पशुओं को गोशाला में भेजने का अभियान चलाया जाए। इससे आवागमन बाधित नहीं होगा।

शिकायतें

जलनिकासी की व्यवस्था बेहतर नहीं है। सीवर ओवरफ्लो करने लगता है। बरसात में गंदा पानी घरों में घुस जाता है। सुनवाई नहीं हो रही है।

बिजली के तारों को व्यवस्थित नहीं किया जा रहा है। घरों की दीवारों के सहारे बिजली के तार ले जाए गए हैं। इससे करंट का भय बना रहता है।

सामुदायिक शौचालय न होने से लोगों को शौचादि के लिए बहुत परेशान होना पड़ता है। इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है।

काफी समय से सड़क और गलियां क्षतिग्रस्त पड़ी हुई हैं। उनकी मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बहुत परेशानी होती है।

मार्ग पर छुट्टा पशु घूमते रहते हैं। कभी-कभी सड़क घेरकर बैठ जाते हैं। इससे आवागमन बाधित हो जाता है। उनकी धरपकड़ के लिए अभियान नहीं चलाया जाता।

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