बोले काशी-कच्ची और ऊबड़ खाबड़ गलियां, ‘हिचकोले’ खा रहे कदम
कादीपुर खुर्द मोहल्ले में विकास की इबारत जैसे आधी अधूरी लिखकर छोड़ दी गई है। नगर निगम की ‘चौखट’ के भीतर होने के बावजूद बड़ी आबादी आज भी सुविधाओं की बदहाली में जीने को अभिशप्त है।

वाराणसी। नवशहरी क्षेत्र में शामिल शिवपुर का कादीपुर खुर्द मोहल्ला आज दुर्दशा झेल रहा है। यहां के रहवासियों ने 'हिन्दुस्तान' के साथ अपनी समस्याएं साझा कीं। शेखर यादव, सुरेंद्र यादव बोले, नगर निगम की सीमा में होने के बावजूद यहां की घनी आबादी कच्ची सड़कों, सीवर नेटवर्क के अभाव और गंदगी के बीच जीने को मजबूर है। स्थिति यह है कि पूरे मोहल्ले में पाइप लाइन न होने से पेयजल का गंभीर संकट है। यहां न कूड़ा गाड़ी पहुंचती हैं और न ही जलजमाव से निजात मिलती है। पवन पांडेय और राजू लाल ने कहा कि मोहल्ले में विकास की किरणें जैसे आधे रास्ते में ही दम तोड़ चुकी हैं। नगर निगम की सीमा में होने के बावजूद यहां का एक बड़ा हिस्सा आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। राजेश्वर प्रसाद विश्वकर्मा, सुनील यादव बोले, जहां मोहल्ले के एक हिस्से में सुविधाएं पहुंच रही हैं, वहीं दूसरी ओर की घनी आबादी आज भी कच्ची और बदहाल सड़कों के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर है। बरसात में यह समस्या बढ़ जाती है, जब कच्ची सड़कें कीचड़ में बदल जाती हैं। जलजमाव से लोगों का घरों से निकलना दूभर हो जाता है। पप्पू खान ने कहा कि गलियों के संकरे होने और रास्तों के ऊबड़-खाबड़ होने से आए दिन राहगीर गिरकर चोटिल हो रहे हैं। रमेश विश्वकर्मा और शारदा देवी ने कहा कि सबसे गंभीर स्थिति आपातकालीन सेवाओं को लेकर है। सड़कों की खराब हालत के कारण एंबुलेंस या दमकल की गाड़ियों का पहुंचना लगभग नामुमकिन है। उषा श्रीवास्तव, मीरा और रेनू बोलीं, जर्जर रास्तों का सीधा असर बच्चों की शिक्षा और लोगों के रोजगार पर पड़ रहा है, क्योंकि स्कूल वैन और अन्य वाहन इस क्षेत्र में आने से कतराते हैं। राहुल सिंह ने कहा कि नगर निगम की सुविधाओं का विस्तार पूरे कादीपुर खुर्द में समान रूप से किया जाए, ताकि निवासियों की समस्याओं का समाधान हो सके।
सीवर नेटवर्क के नाम पर खानापूरी
सुदामा यादव तथा प्रभु कुमार ने कहा कि मोहल्ले में जलनिकासी व्यवस्था है। नगर निगम की ओर से मोहल्ले में करीब 400 मीटर की सीवर लाइन बिछाकर कुछ लोगों को राहत दी गई, लेकिन शेष घनी आबादी को आज भी भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। लोकेश श्रीवास्तव और मुन्नी राम कहते हैं कि पूरे मोहल्ले में सीवर पाइप लाइन न होने से किसी भी घर को कनेक्शन नहीं मिल सका है। लोग खुले में गंदा पानी बहाने को विवश हैं। सुशीला देवी तथा रानी यादव बोलीं, खाली पड़े भूखंडों में जमा हो रहे सीवर के पानी ने पूरे इलाके को गंदगी और संक्रामक बीमारियों का केंद्र बना दिया है। बकौल नूरजहां, कई लोग निजी सोख्ता के सहारे हैं। संध्या व ज्ञानती चौहान बोलीं, हमें रोज घरों के भीतर बने गड्ढों से बाल्टियों के जरिए गंदा पानी बाहर फेंकना पड़ता है, जो कष्टकारी और अपमानजनक है। पप्पू खान ने बताया कि कई बार सीवर लाइन विस्तार की गुहार लगाई, लेकिन आश्वासनों के सिवाय धरातल पर कुछ नहीं बदला।
पाइपलाइन का अभाव और खराब पड़े हैंडपंप
मुन्नी राम, श्रीलाल ने कहा कि मोहल्ले में पेयजल का संकट गहराने लगा है। नगर निगम का हिस्सा होने के बावजूद मोहल्ले में अब तक जलकल विभाग की ओर से पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। चंद्रमा प्रसाद, हरिलाल ने बताया कि मजबूरन लोगों को निजी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। संकट सबसे अधिक गरीब परिवारों के सामने है, जिनके लिए निजी पंप लगवाना आर्थिक रूप से मुमकिन नहीं है। दुर्गावती, निशा ने कहा कि मोहल्ले में लगे सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं। गोपाल वर्मा और गुड़िया चौहान ने कहा कि विभाग को बार-बार सूचित करने के बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गैस की किल्लत से जूझ रहे निवासी
लक्ष्मण, पवन पाण्डेय बोले, मोहल्ले में गैस पाइप लाइन (पीएनजी) की सुविधा न होना मुसीबत का सबब बना हुआ है। चेतरा, रन्नो बोलीं, जहां शहर के अन्य हिस्सों में पाइप लाइन से निर्बाध गैस आपूर्ति हो रही है, वहीं यहां के लोग आज भी सिलेंडरों की बुकिंग और उनकी डिलीवरी के भरोसे हैं। लोकेश श्रीवास्तव, मनोज कुमार ने कहा कि गैस बुकिंग करने के बावजूद लोगों को कई दिनों तक सिलेंडर का इंतजार करना पड़ता है, जिससे घरों में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो जाता है। डिलीवरी में होने वाली देरी और बुकिंग की तकनीकी समस्याओं से लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। आर्यन यादव, नंदलाल ने कहा कि प्रशासन जल्द से जल्द मोहल्ले में गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू करे ताकि निवासियों को सिलेंडरों की किल्लत और बुकिंग की लंबी प्रतीक्षा से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।
संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा
सोनू पाल, भास्कर पाल ने बताया कि कादीपुर खुर्द मोहल्ले में नगर निगम की सफाई व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। निशा बोलीं, मोहल्ले में न तो नियमित रूप से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां आती हैं और न ही सफाई कर्मचारी झाड़ू लगाने पहुंचते हैं। सुदामा देवी, लक्ष्मीना ने कहा कि गंदगी के निस्तारण का कोई विकल्प न होने से लोग मजबूरन खाली पड़े प्लॉटों में कचरा फेंक रहे हैं, जिससे जगह-जगह गंदगी हो गई हैं। मीरा, दर्गावती, उषा श्रीवास्तव ने कहा कि जलजमाव और सड़ते कूड़े के कारण पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। डेंगू, मलेरिया जैसी जलजनित बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है। राजेश यादव और रीता यादव ने कहा कि संबंधित विभाग की ओर से आज तक मोहल्ले में फॉगिंग या कीटनाशकों का छिड़काव नहीं कराया गया है। प्रशासनिक अनदेखी से यहां के निवासी बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में हो रही फजीहत
वीरेंद्र यादव और कमलेश प्रसाद बोले, नगर निगम की सीमा में शामिल होने के बाद भी कादीपुर खुर्द मोहल्ले के निवासियों को अब तक मकान नंबर आवंटित नहीं हो सके है। घर का कोई आधिकारिक नंबर न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जेपी यादव, सदानंद यादव ने बताया कि मकान नंबर न होने से आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में सुधार कराने या नए पते पर पहचान पत्र बनवाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। किसी भी तरह की बैंकिंग सेवा या निजी पत्राचार के लिए भी सटीक पता न होना बड़ी बाधा बन गया है। सुभाष यादव ने कहा कि बुनियादी पहचान के रूप में मकान नंबर भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। जल्द से जल्द सर्वे कराकर मकानों का नंबर आवंटित किया जाए, ताकि राहत मिल सके।
बांस-बल्ली पर तार और अंधेरे में गलियां
शेखर यादव, राजेश्वर प्रसाद विश्वकर्मा ने कहा कि बुनियादी ढांचे के अभाव से जूझ रहे कादीपुर खुर्द मोहल्ले में जगह-जगह बिजली व्यवस्था बदहाल है। मोहल्ले में बिजली के पर्याप्त खंभे न होने से दर्जनों घरों तक बिजली की सप्लाई बांस-बल्लियों और घरों के किनारों से असुरक्षित तरीके से की गई है। सुरेन्द्र यादव और पप्पू खान बोले, बरसात में इन लटकते तारों के कारण करंट उतरने का खतरा बढ़ जाता है। आर्यन और राजेश यादव ने बताया कि इसके अलावा, मोहल्ले में स्ट्रीट लाइटों का घोर अभाव है, जिसके चलते शाम ढलते ही मोहल्ले में कई स्थानों पर अंधेरा छा जाता है। पर्याप्त प्रकाश न होने के कारण रात के समय बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का गलियों से गुजरना दूभर हो गया है। आए दिन लोग अंधेरे के कारण चोटिल हो रहे हैं। प्रभु कुमार और राहुल सिंह ने कहा कि जर्जर तारों को हटाकर नए खंभे लगाए जाएं और स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि मोहल्ले को अंधेरे और संभावित हादसों से निजात मिल सके।
हमारी व्यथा सुनें
1. नगर निगम में होने का क्या फायदा, जब विकास की किरणें आधे रास्ते में ही दम तोड़ दे रही हैं? हम कच्ची सड़कों पर चलने को मजबूर हैं।
- शेखर यादव
2. बरसात आते ही हमारे मोहल्ले में कीचड़ हर तरफ फैल जाता है। कच्ची सड़क पर जलजमाव के कारण घरों से निकलना भी दूभर हो जाता है।
- पप्पू खान
3. सीवर के नाम पर सिर्फ कुछ मीटर तक पाइप डालकर खानापूरि कर दी गई। आधा मोहल्ला आज भी गंदगी और बदबू के बीच जीने को विवश है।
- सुरेन्द्र यादव
4. घरों का गंदा पानी निकालने का कोई साधन नहीं है। मजबूरी में महिलाओं को खुद गड्ढों से पानी निकालकर बाहर फेंकना पड़ता है। सीवर नहीं है।
- प्रभु कुमार
5. पेयजल पाइप लाइन तो दूर की बात है, मोहल्ले के सरकारी हैंडपंप भी लंबे समय से खराब पड़े हैं। संबंधित विभाग हमारी सुधि लेने को तैयार नहीं है।
- लोकेश श्रीवास्तव
6. गरीब आदमी कहां से निजी सबमर्सिबल लगवाए? पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी हमें हर रोज जद्दोजहद करनी पड़ रही है, पाइप लाइन बिछाएं।
- राजू लाल
7. हमारे यहां गैस पाइप लाइन भी नहीं है। सिलेंडर की बुकिंग के बाद हफ्तों इंतजार करना पड़ता है, जिससे रसोई का बजट बिगड़ता जा रहा है।
- वीरेन्द्र यादव
8. मोहल्ले में कूड़ा गाड़ी कभी नहीं आती। खाली प्लॉट कचरे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। इससे बीमारियां फैलने का डर हमेशा बना रहता है।
- उषा श्रीवास्तव
9. सफाई कर्मचारी झाड़ू लगाने नहीं आते हैं और न ही आज तक फागिंग कराई गई है। गंदगी के कारण मच्छरों ने जीना मुहाल कर दिया है।
- शारदा यादव
10. हम नगर निगम की सीमा में हैं, लेकिन घरों को आज तक मकान नंबर भी नहीं मिला। सरकारी कागजों में हमारा कोई वजूद ही नहीं दिखता है।
- जेपी यादव
11. बिजली के खंभे न होने से तार बांस-बल्लियों के सहारे लटक रहे हैं। आए दिन शॉर्ट सर्किट का डर रहता है, लेकिन बिजली विभाग सोया हुआ है।
- सुभाष यादव
12. स्ट्रीट लाइट न होने से शाम होते ही गलियों में अंधेरा पसर जाता है। अंधेरे के कारण राहगीर आए दिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लाइटें लगनी चाहिए।
- मीरा
सुझाव और शिकायतें
सुझाव
1. कादीपुर खुर्द के अधिकांश हिस्से में आज भी कच्ची सड़कें हैं, वहां तत्काल इंटरलॉकिंग या पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। मदद होगी।
2. पूरे मोहल्ले में सीवर पाइप लाइन का विस्तार कर हर घर को सीवर कनेक्शन से जोड़ा जाए, ताकि निवासियों को जलजमाव से मुक्ति मिल सकें।
3. जलकल विभाग की ओर से मोहल्ले में पेयजल पाइप लाइन बिछाई जाए। जल्द से जल्द खराब पड़े सरकारी हैंडपंपों की मरम्मत सुनिश्चित हो।
4. नगर निगम नियमित रूप से कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों और सफाई कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करे। बरसात के दिनों में फॉगिंग कराना जरूरी है।
5. बांस-बल्लियों के सहारे की जा रही बिजली आपूर्ति को बंद कर पर्याप्त खंभे लगाएं। इसके अलावा, नई एलईडी स्ट्रीट लाइटों की भी व्यवस्था हो।
शिकायत
1. मोहल्ले का एक बड़ा हिस्सा आज भी कच्ची और बदहाल सड़कों के सहारे है। बरसात में रास्ते कीचड़ में बदल जाते हैं, आवाजाही बाधित रहती है
2. सीवर के नाम पर महज कुछ मीटर तक पाइप लाइन बिछाकर छोड़ दिया गया। इसके कारण आज भी लोगों को खुले में जलनिकासी करनी पड़ती है।
3. पेयजल पाइप लाइन न होने से लोग निजी साधनों पर निर्भर हैं। खराब हैंडपंपों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है, जिससे पानी का संकट गहरा गया है।
4. कूड़ा गाड़ी न आने से खाली प्लॉटों में कचरा फेंक रहे हैं और सफाई कर्मचारियों के न आने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। झाड़ू नहीं लगता है।
5. पर्याप्त खंभे न होने से बांस-बल्ली के सहारे बिजली की सप्लाई हो रही है। वहीं कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें न होने से गलियों में अंधेरा पसरा रहता है।
एक नजर में
- सौ साल से अधिक पुराना है कादीपुर खुर्द मोहल्ला
- 01 हजार- लगभग मकानों की संख्या
- 07 हजार- लगभग आबादी
- वार्ड नं-9 शिवपुर
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